देश की सुरक्षा के लिए चीन और पाकिस्तान के खिलाफ तीन ऐतिहासिक युद्धों में दुश्मनों से लोहा लेने वाले 92 वर्षीय रिटायर्ड कैप्टन चुन्नीलाल आज अपने ही हक की चौथी लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं. जैसलमेर के इंदिरा गांधी नहरी क्षेत्र में स्थित उनकी 25 बीघा कीमती जमीन को भू-माफिया गिरोह ने सरकारी सिस्टम से सांठगांठ कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे हड़प लिया और किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया.
दरअसल, रिटायर्ड कैप्टन चु्न्नीलाल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं और पोंग डैम (बांध) के निर्माण के विस्थापित हैं. कांगड़ा जिले में पोंग डैम के निर्माण के दौरान उनकी बेशकीमती पैतृक जमीन पानी में चली गई थी, जिसके बदले में सरकार ने उन्हें जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में नहरी भूमि आवंटित की थी. वह वर्षों से स्थानीय काश्तकारों के माध्यम से यहां खेती करवाते रहे और हर साल अपनी उपज का हिस्सा प्राप्त करते रहे, लेकिन इस बार जब उनके काश्तकार ने अचानक फोन कर बताया कि उनका मुरब्बा किसी ने बेच दिया है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.
6 दिनों के अंदर किया म्यूटेशन
धोखाधड़ी के तौर-तरीकों की जानकारी देते हुए पीड़ित पूर्व सैन्य अधिकारी ने बताया कि कुछ शातिर लोगों ने उनके फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे. आरोपियों ने आधार कार्ड और अन्य जरूरी पहचान पत्रों में कथित रूप से हेरफेर किया और किसी अज्ञात व्यक्ति को कैप्टन चुन्नीलाल बनाकर 16 जून को जमीन की रजिस्ट्री करवा दी.
इसके बाद महज छह दिन बीतने पर 22 जून को मोहनगढ़ उपनिवेशन तहसील कार्यालय में मिलीभगत से म्यूटेशन भी दर्ज करा लिया गया.
कैप्टन चुन्नीलाल का कहना है कि उन्हें इस पूरे काले खेल की भनक तक नहीं थी फुल स्टॉप सूचना मिलते ही वे तुरंत हिमाचल से मोहनगढ़ पहुंचे और तहसील से लेकर पुलिस थानों तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन शुरुआती दिनों में कहीं भी उनका मामला दर्ज नहीं किया गया.
कैप्टन चुन्नीलाल का गंभीर आरोप है कि ये कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में बाहरी लोगों, विशेष रूप से कांगड़ा के विस्थापितों और पूर्व सैनिकों के मुरब्बों को निशाना बनाकर फर्जीवाड़ा करने का एक बड़ा संगठित खेल चल रहा है.
बेटे ने भी लगाए गंभीर आरोप
उनके साथ आए बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर ने रजिस्ट्री के सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि आखिर फिंगर प्रिंट, फोटो और अन्य दस्तावेजों के सही मिलान के बगैर तथा मूल बेचानकर्ता के मौके पर मौजूद न होने पर भी उनकी जमीन की रजिस्ट्री कैसे कर दी गई.
मुल्तान सिंह ने बताया कि जमीन फर्जी तरीके से बिकने की जानकारी मिलने पर वह सबसे पहले मोहनगढ़ थाना गए थे, लेकिन वहां से उन्हें ये कहकर टरका दिया गया कि ये मामला उनके अधिकार क्षेत्र का नहीं है. इसके बाद वो एक दूसरे थाने में भी भटकते रहे.
मुल्तान सिंह ने हिमाचल प्रदेश के अन्य मुरब्बाधारकों से भी अपील की है कि वह समय-समय पर अपनी जमीनों के रिकॉर्ड की जांच करते रहें ताकि वे भी इस कथित फर्जीवाड़े का शिकार न बनें.
सैनिक विश्राम गृह के प्रभारी लालाराम ने दावा किया कि दलाल विशेष रूप से कांगड़ा के विस्थापितों और पूर्व सैनिकों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वह दूर रहते हैं और स्थानीय व्यवस्था की जानकारी कम होती है. इस लिए दलालो द्वारा फर्जी कागजात बनाकर जमीन हड़पाने का काम करते रहते है. पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, लेकिन उम्मीद है देश के लिए तीन-तीन युद्ध लड़ने वाले इस जांबाज सैनिक को अपने ही हक के लिए इंसाफ मिल पाएगा.
वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेवंतदान ने इस पूरे मामले के संबंध में बताया कि रिटायर्ड कैप्टन की नहरी जमीन फर्जी तरीके से बेचे जाने के मामले में शनिवार को पुलिस थाना कोतवाली में फ्रॉड की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है.