राजस्थान की राजधानी जयपुर में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की किल्लत ने मध्यम और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है. शहर के स्ट्रीट फूड वेंडर्स अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं. गैस न मिलने के कारण कई दुकानदारों ने अपने खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं, तो कुछ ने स्टॉक खत्म होने पर दुकानें बंद करने की चेतावनी दी है.
जयपुर के लोकप्रिय 'मामा पराठा' के मालिक प्रमोद यादव ने बताया कि उन्होंने 2100 रुपये में कमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में खरीदा है. इसके चलते अब 30 रुपये में मिलने वाले दो पराठों के दाम बढ़ गए हैं. इसी तरह 'माधव डोसा' ने भी डोसे के दाम में 10 रुपये की बढ़ोतरी की है क्योंकि उन्हें घरेलू सिलेंडर ब्लैक में 1900 रुपये का मिल रहा है.
घर का चूल्हा ठेले पर लाने की मजबूरी
पावभाजी बेचने वाले सुशील की कहानी और भी भावुक कर देने वाली है. वे अपने घर का एकमात्र सिलेंडर खोलकर ठेले पर ले आए हैं. उनका कहना है, "दिन भर इस सिलेंडर से पावभाजी बनाएंगे तो ही कमाई होगी और शाम को इसी सिलेंडर को वापस घर ले जाएंगे ताकि घरवालों के लिए खाना बन सके."
बंद होने की कगार पर मशहूर दुकानें
पंडित चायवाले संतोष भारद्वाज का कहना है कि उनके पास आज भर का ही स्टॉक बचा है. गैस की नई बुकिंग नहीं ली जा रही है, ऐसे में कल से उन्हें दुकान बंद करनी पड़ सकती है.
शहर के कई अन्य दुकानदार अब विकल्प के तौर पर कोयले की भट्टी लगाने की सोच रहे हैं, लेकिन भारी डिमांड के कारण कोयला भी अब महंगा और दुर्लभ हो गया है. देखें VIDEO:-
प्रशासन की चिंता
एक तरफ जहां कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रुकी हुई है, वहीं बाजार में घरेलू सिलेंडरों का कमर्शियल इस्तेमाल और उनकी कालाबाजारी बढ़ गई है. प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए स्ट्रीट वेंडर्स के रोजगार को कैसे बचाया जाए.