चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए कथित ट्रस्ट अध्यक्ष और वकील संतोष राय सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस जांच में सामने आया है कि मठ की करीब 750 बीघा जमीन और बैंक खातों में जमा 4.33 करोड़ रुपए की संपत्ति पर कब्जा करने की मंशा से इस हत्याकांड की साजिश रची गई थी. हत्या की सुपारी एक लाख रुपए में दी गई थी, जिसे चार लोगों ने मिलकर अंजाम दिया.
पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि संतोष राय मठ की संपत्तियों और प्रशासनिक नियंत्रण पर कब्जा जमाना चाहता था. लेकिन महंत देवानंद द्वारा नई कार्यकारिणी का गठन कर दिए जाने से उसकी योजना विफल हो गई. इसी के बाद उसने अपने करीबी आदित्य वर्मा के जरिए हत्या की साजिश रची.
पुलिस के अनुसार, शक से बचने के लिए संतोष राय घटना से पहले जयपुर के एक अस्पताल में पैर की सर्जरी के बहाने भर्ती हो गया था, ताकि हत्या के समय खुद को शहर से दूर साबित कर सके.
दो दिन पहले की गई थी रेकी
जांच में सामने आया कि हत्या से दो दिन पहले संतोष राय, आदित्य और प्रिंस मठ पहुंचे थे और उन्होंने पूरे परिसर की रेकी की थी. मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से इसकी पुष्टि हुई.
घटना की रात चार आरोपी दो बाइकों पर सवार होकर मठ पहुंचे. सबसे पहले उन्होंने दूसरे कमरे में सो रहे नंदनवन महाराज के कमरे की बाहर से कुंडी लगा दी. इसके बाद महंत देवानंद पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया.
हमले के दौरान महंत जान बचाने के लिए कमरे से बाहर निकले, लेकिन बदमाशों ने उन्हें मुख्य गेट के पास पकड़ लिया और पीठ व शरीर पर कई वार किए. गंभीर रक्तस्राव के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
हत्या के बाद गोवा भागने की कोशिश
वारदात के बाद आरोपी आरकेपुरम स्थित आदित्य के घर पहुंचे. वहां उसकी पत्नी जैक्शन जॉर्ज को पूरी घटना की जानकारी दी गई. पुलिस के अनुसार, उसने आरोपियों के खून से सने कपड़े वॉशिंग मशीन में धोकर सबूत मिटाने का प्रयास किया. इसके बाद सभी आरोपी जयपुर पहुंचे और फिर दिल्ली होते हुए संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से गोवा रवाना हो गए.
मोबाइल लोकेशन और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस लगातार उनका पीछा कर रही थी. महाराष्ट्र पुलिस के सहयोग से आरोपियों को पुणे पहुंचने से पहले ट्रेन में दबोच लिया गया. पुलिस अब उन्हें कोटा लेकर आ रही है. जैक्शन जॉर्ज को भी आरोपियों की मदद करने के आरोप में मामले में नामजद किया गया है.
चाकू से वार करने के तरीके ने दिया सुराग
पुलिस के लिए यह मामला चुनौतीपूर्ण था क्योंकि घटनास्थल और आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था. करीब 100 पुलिसकर्मियों की विशेष जांच टीम गठित की गई. जांच के दौरान पुलिस को हमले के तरीके से अंदेशा हुआ कि वारदात में स्थानीय अपराधी शामिल हो सकते हैं. इसके बाद मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई.
पुलिस को पता चला कि घटना वाले दिन और उससे पहले कई संदिग्ध मोबाइल नंबर मठ के आसपास सक्रिय थे. बाद में इन नंबरों की लोकेशन जयपुर में संतोष राय के मोबाइल के साथ मिलने लगी, जिससे पुलिस का शक गहरा गया. पूछताछ में आखिरकार पूरा षड्यंत्र सामने आ गया.
नई कार्यकारिणी बनने से नाराज था संतोष
जांच में यह भी सामने आया कि संतोष राय पहली बार फरवरी में चंद्रेसल मठ आया था. उसने ट्रस्ट की संपत्तियों, दस्तावेजों और वित्तीय स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी. इसी दौरान महंत देवानंद ने नई कार्यकारिणी का गठन कर देवस्थान विभाग को प्रस्ताव भेज दिया. इससे संतोष नाराज हो गया और उसने लगातार इस फैसले का विरोध किया. पुलिस का मानना है कि इसी विवाद ने हत्या की साजिश की नींव रखी.
फास्ट ट्रैक ट्रायल की तैयारी
एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केस ऑफिसर स्कीम में शामिल किया जाएगा और फास्ट ट्रैक आधार पर ट्रायल करवाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आरोपियों को जल्द और कड़ी सजा मिल सके. पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है.