विशाखापत्तनम के एक फ्लैट में एक नेवी स्टाफ रहा करता था. 30 मार्च की शाम अचानक वो पुलिस स्टेशन पहुंचता है. पुलिस वालों से कहता है कि उसने एक कत्ल किया है और वो सरेंडर करने आया है. इसके बाद पुलिस उसे लेकर उसी के फ्लैट पर पहुंचती है और घर में घुसे फ्रिज का दरवाजा जैसे ही खोलती है अंदर से श्रद्धा और आफ्ताब की एक और कहानी बाहर आ जाती है.