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नफरत की मोहब्‍बत से नफरत

नफरत की मोहब्‍बत से नफरत

कायदे से मोहब्बत को किसी एक दिन में कैद नहीं किया जा सकता. लेकिन चलिए लोगों ने कम से कम मोहब्बत के नाम एक दिन तो किया. मोहब्‍बत दरअसल वो अहसास है जो हर दिल में रहता है. वो जज़्बा है जो कायनात के ज़र्रे-ज़र्रे में बिखरा है और बस मोहब्बत की इसी एक फितरत पर नफ़रत को भी मोहब्बत से नफ़रत है.

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