देश अपने भविष्य को लेकर चिंतित है. लेकिन कभी विरासत की खींचतान, कभी इतिहास का ज्ञान भटका देता है. मोदी अब तक जोश जगाते थे. आजकल इतिहास का ज़िक्र अधिक छेड़ते हैं. क्या उनका विकास इतिहास में फंस गया है?