2012 विधान सभा चुनाव के नतीजों के बाद देश की सियासत में एक बार फिर थर्ड फ्रंट की उम्मीद जोर मारने लगी. क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं के बयानों में केंद्र की राजनीति पर पकड़ बनाने की कसक नजर आने लगी है.