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10 तक

कोरोना से डरना जरूरी है! देखें दस्तक

12 अप्रैल 2021

कोरोना की ये दूसरी लहर देश को डरा रही है लेकिन लोग अब भी लापरवाही बरत रहे हैं. कोरोना को एक और बीमारी की तरह ले रहे हैं. कोरोना की पहली लहर में पिछले साल 16 सितंबर को एक दिन में 97,894 कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे. ये आंकड़ा दूसरी लहर में 1,68,912 तक पहुंच चुका है. दिल्ली में पिछली बार नवंबर में 24 घंटे में कोरोना के सबसे ज्यादा 8593 मामले सामने आए थे. लेकिन आज देश की राजधानी में 11,491 पॉजिटिव केस आए हैं मुंबई में कोरोना की पहली लहर में 2848 संक्रमित मिले थे. जो दूसरी लहर में तकरीबन ढाई गुना होकर 6905 पर पहुंच गए हैं. अगर भी हम सब नहीं जागे तो इसकी देश बहुत भारी कीमत चुकाएगा. हम सबकी जिंदगी प्रभावित होगी. हालात कितने गंभीर हो गए हैं. इसका अंदाजा इस बात से आप लगा सकते हैं कि सूरत में शमशान की भट्टियों ने पिघलना शुरू कर दिया है. सूरत की तरह की तरह देशभर में शमशान की भट्टियां न पिघलें, इसे रोकना जरूरी है. देखें दस्तक, रोहित सरदाना के साथ.

बंगाल चुनाव: अब जो जीता, वही सिकंदर!

11 अप्रैल 2021

आधी लड़ाई बीत गई और आधी अभी बाकी है लेकिन ये कहना अब भी मुश्किल है कि कौन जीत रहा है बंगाल? यही सबसे बड़ा प्वाइंट भी है बंगाल चुनाव के दिलचस्प होने का कि अभी तक कोई किसी की जीत की भविष्यवाणी नहीं कर सकता. हालांकि अपनी-अपनी जीत के दावे जरूर किए जा रहे हैं लेकिन हर बीतते चरण के साथ पश्चिम बंगाल का चुनाव लोकतंत्र के उत्सव से कहीं अलग जंग का मैदान बनता जा रहा है, इससे कोई इंकार नहीं कर सकता. देखें खास कार्यक्रम, श्वेता सिंह के साथ.

लॉकडाउन का डर: देखें, अपने ही देश में भटकते प्रवासी मजदूरों की कहानी

09 अप्रैल 2021

आज 10तक में बात करेंगे प्रवासी मजदूरों की जिन्होंने पिछले साल लॉकडाउन के बाद तमाम दिक्कतें झेलीं. जिस मुंबई में आज 9200 कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. वहां से ट्रेन की खचाखच भरी बोगियों में सफर करके ये मजदूर एक बार फिर अपने घर को लौट रहे हैं. यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों के डिब्बों में पैर रखने की जगह नहीं है. बोगी के अंदर लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरे जा रहे हैं. जबकि वो जानते हैं कि घर पहुंचने से पहले इनके शरीर में कोरोना पहुंच सकता है. अजीब विडंबना है कि जिस डर से ये लोग अपने घर लौट रहे हैं वो इनके साथ ही जा रहा है. सोशल डिस्टेंसिंग इन ट्रेनों में असंभव है. लेकिन लॉकडाउन लगने का डर ऐसा है कि लोग हर खतरा मोल लेने को तैयार हैं.

कोरोना ने खोली गुजरात के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल, भगवान सहारे लोग, देखें दस्तक

08 अप्रैल 2021

गुजरात के वडोदरा से आई तस्वीर देश को चीख-चीख कर बता रही है कि कोरोना के खिलाफ जंग में आप देश की स्वास्थ्य सेवाओं के भरोसे न रहें क्योंकि वो खुद कोरोना की कृपा पर जिंदा है. सब्जी के ठेले पर जिस 65 साल के बुजुर्ग का शव रखा है. उनकी मौत कोरोना से हुई. लेकिन सिस्टम देश के एक नागरिक को सम्मान के साथ विदा भी न कर सका. उस व्यक्ति के शव को ठेले से ही श्मशान घाट तक ले जाना पड़ा. गुजरात देश के सम्पन्न राज्यों में से एक है. लेकिन कोरोना ने वहां की स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी तरह से पोल खोलकर रख दी है. देखें वीडियो.

दस्तक: कोरोना कार में बढ़ता है, रैली प्रदर्शन में डरता है?

07 अप्रैल 2021

पिछले साल से लगातार ये बात वैज्ञानिक तौर पर मानी गई है कि मास्क लगाना कोरोना से बचने का सबसे जरूरी, प्राथमिक और कारगर उपाय है. अब दिल्ली में हाईकोर्ट ने कार में अकेले सफर करने पर भी मास्क पहनना अनिवार्य बताया है. मास्क लगाने का नियम जनता के लिए जरूरी बताया जाए और नेताओं की रैली-प्रदर्शन में छूट दी जाए तो आम आदमी पूछने लगता है. क्या कोरोना कार में फैलता है और पार्टियों की रैली-प्रदर्शन में दम तोड़ देता है. क्या कोरोना जनता को जकड़ता है और पार्टी कार्यकर्ताओं को देखकर डरता है? देखें दस्तक, रोहित सरदाना के साथ.

दस्तक: असम से बंगाल तक, EVM पर क्यों बवाल?

06 अप्रैल 2021

पहले बैलेट पेपर से मतदान होता था. मतपत्रों की लूट होती थी. बैलेट बॉक्स में स्याही फेंककर वोटों को बर्बाद किया जाता था. बूथ कैप्चरिंग होती थी. फिर देश में निष्पक्ष चुनावों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन आई. 2009 से ईवीएम को हैक करके चुनाव जीतने के आरोप आज तक कई दलों के नेताओं ने लगाए लेकिन कभी ईवीएम हैक कोई करके दिखा नहीं सका. अभी पांच राज्यों के चुनाव के दौरान फिर ईवीएम सुर्खियों में है. क्योंकि जो EVM चुनाव से पहले और चुनाव के बाद सुरक्षित हाथों में दिखनी चाहिए, वो बीजेपी नेता की कार के बाद अबकी बार टीएमसी नेता के घर में बरामद हुई है. क्यों बदनाम हो रही है ईवीएम, देखें दस्तक, रोहित सरदाना के साथ.

सिस्टम सरकारी कमचलाऊ बीमारी! देखें दस्तक

05 अप्रैल 2021

देश में सर्वोच्च जांच एंजेंसी सीबीआई के पास अपना नियमित निदेशक 2 फरवरी के बाद से नहीं है. नियमित निदेशक की जगह सीबीआई की जिम्मेदारी पिछले 62 दिन से अंतरिम निदेशक के भरोसे चल रही है. इसी के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा है कि सीबीआई प्रमुख के पद पर किसी को यूं ही अंतरिम तौर पर रखकर काम कराने की व्यवस्था नहीं चल पाएगी. यानी एक ऐसी व्यवस्था जो सिर्फ काम चलाने के नाम पर चलाई जाती है. वहीं कॉलेज में पढ़ाई करके रोजगार पाने के सपने देखते युवा हों या प्राइमरी स्कूलों में भविष्य की नींव तैयार करते बच्चे, उन सभी को कामचलाऊ सिस्टम के भरोसे रुलाने का काम अलग अलग राज्यों में हो रहा है, क्योंकि कॉलेज में लेक्चरर के पद खाली खाली पड़े हैं और स्कूलों में शिक्षकों के. राजस्थान में पिछले आठ साल से कॉलेज में किसी लेक्चरर की नियुक्ति नहीं की गई है. आखिर सिस्टम रोजगार देने के नाम पर इतना क्यों स्लो है, देखें दस्तक.

10 तक: असम में बीजेपी नेता की कार में ईवीएम कैसे आई?

03 अप्रैल 2021

जिस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर भरोसा करके जनता चुनावी लोकतंत्र को मजबूत करती है. उस ईवीएम पर एक बार फिर से सवाल उठने लगे हैं. चुनाव आयोग चुनौती देकर कहता है कि ईवीएम को हैक नहीं जा सकता है. लेकिन क्या जिस ईवीएम की हैकिंग नहीं हो सकती, उसी वोटिंग मशीन की अपने हिसाब से किडनैपिंग होने लगी है? ये आरोप जिस वोटिंग मशीन, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर लग रहे हैं. देखें वीडियो.

राजस्थान: बिना अध्यापकों के ये कॉलेज, बच्चे कैसे करे पढ़ाई, देखें दस्तक

01 अप्रैल 2021

देश में हर साल करीब एक करोड़ युवा ग्रेजुएट हो जाते हैं. लेकिन नौकरी सबको नहीं मिलती. इसके दो कारण होते हैं. पहला कारण रोजगार के मौके सरकार की तरफ से पैदा ना करना. दूसरा कारण होता है रोजगार लेने लायक शिक्षा ही नहीं देना. ये नौबत कैसे आती है. इसलिए राजस्थान की कहानी देखते हैं. जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते नहीं थकते कि उन्होंने 150 से ज्यादा कॉलेज खोल दिए .लेकिन मुख्यमंत्री जी जहां कॉलेज खोले हैं, वहां टीचर भी तो दीजिए. टीचर होंगे नहीं तो बच्चे पढ़ेंगे क्या. पढ़ेंगे नहीं तो नौकरी पाएंगे क्या ?

व्हील चेयर पर डॉन: UP जाने से बचने के लिए मुख्तार अंसारी ने खेला दांव?

31 मार्च 2021

न्याय व्यवस्था को लेकर कहा जाता है कि इंसाफ के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं. हमारे देश में ये भी कहा जाता है कि सौ दोषी छूट जाएं लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए. लेकिन जब हत्या, हत्या के प्रयास, फिरौती, भ्रष्टाचार, जमीन कब्जा करने का आरोपी माफिया डॉन मुख्तार अंसारी पूरे सिस्टम को घुमाने लगे तो दस्तक देनी जरूरी है. एक एंबुलेंस. एक व्हीलचेयर और पेशी के बहाने तारीखें बढ़ाता मुख्तार अंसारी. जहां लाखों कैदी देश की जेलों में तारीखों के इंतजार में सिर्फ आरोपी बनकर अपनी जिंदगी इंसाफ के इंतजार में बिता देते हैं. उसी सिस्टम में मुख्तार अंसारी अपने मन मुताबिक अब भी जेल तय करने में जुटा है. जो मुख्तार अंसारी 27 महीने में एक बार अदालत में पेश नहीं होता, वो जब अचानक व्हील चेयर पर बैठकर कोर्ट के सामने पेश होने पहुंच गया तो इसका मतलब ये नहीं कि न्याय के मंदिर को मुख्तार पूजने लगा है. तो क्या मुख्तार ने अब यूपी जाने से बचने का नया दांव व्हीलचेयर पर खेला है? देखें दस्तक.

नेताओं की करनी, नांदेड़ की भरनी! देखें दस्तक

30 मार्च 2021

1 अप्रैल से देश में 45 साल के ज्यादा उम्र के नागरिकों को कोरोना की वैक्सीन लगेगी. आम आदमी के मुद्दे को वोट लेकर भुला देने वाले राजनीतिक संक्रमण को रोकने वाली वैक्सीन कब इजाद होगी. क्या कोरोना के संकट काल में नेताओं चुनावी लापरवाही आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोक देती है? वहीं बात उस इलाके की भी होगी, जहां पति की जिंदगी से ज्यादा कीमती महिलाएं पानी को मानती हैं. उत्तर प्रदेश में ऐसे 62 गांवों की कहानी जहां पानी के लिए पैर में फफोले झेलने पड़ते हैं. महाराष्ट्र का नांदेड़ उन जिलों में से एक है, जहां कोरोना के कारण हालात गंभीर हैं. इसीलिए 25 मार्च से 4 अप्रैल के लिए पूरी तरह लॉकडाउन लगाया गया. फिर होली मनाने के लिए नांदेड़ में क्यों तलवारें निकल पड़ीं? देखें दस्तक, रोहित सरदाना के साथ.