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10 तक

ना ड्रग्स, ना सबूत फिर आर्यन को लेकर क्यों बोला गया झूठ? देखें 10तक

27 मई 2022

10तक में आज बात होगी इंसाफ की डगर की. वो डगर जहां इंसाफ पाने में शाहरुख खान के बेटे को भी 230 दिन लग गए हैं.  इंसाफ पाने में जहां शाहरुख खान के बेटे को भी 27 दिन जेल में बि‍ताने पड़े हैं. आज ड्रग्स केस में शाहरुख के बेटे आर्यन खान को क्लीनचिट दी गई. आर्यन से ना तो ड्रग्स मिली थी और ना आर्यन के खिलाफ कोई सबूत मिला. फिर क्या आर्यन खान को सिर्फ शाहरुख का बेटा होने की सजा दी गई? आर्यन को मिली क्लीनचिट बताती है कि सिस्टम में ऐसी अंधेरगर्दी है जो किसी भी निर्दोष को दोषी बनाने की चाल चल सकती है. सईद अंसारी के साथ देखें दस्तक.

IAS पर टहलने के लिए स्टेडियम खाली कराने का आरोप, हुआ एक्शन

26 मई 2022

देश के संविधान में कोई पदधारी नहीं, कोई अधिकारी नहीं, कोई संस्था नहीं, कोई धर्म नहीं बल्कि देश की जनता संप्रभु है लेकिन आज कहानी उनकी जिन्हें जनता चुनती है, जिन्हें जनता के पैसे से वेतन मिलता है लेकिन वो खुद को ही सर्वोच्च मान लेते हैं. जो कहते हैं हमसे बढ़कर दुनिया में ना होगा कोई और. दिल्ली में IAS अधिकारी पर आरोप है अपने और अपने कुत्ते की ईवनिंग वॉक के लिए खिलाड़ियों से स्टेडियम खाली करा लिया.

यासीन को उम्रकैद से पाकिस्तान हुआ परेशान, देखें दस्तक

25 मई 2022

1990 के दशक में जो आतंकवादी बना, जिसने फिर अलगाववाद की चादर ओढ़कर पाकिस्तान के इशारे पर कश्मीर में नौजवानों को आतंकवादी बनाया. वो यासीन मलिक आज उम्रकैद की सजा पाता है. सजा पाने से पहले आतंकी यासीन मलिक महात्मा गांधी को याद करने लगता है और यासीन मलिक की सजा के बाद पाकिस्तान आंसू बहाने लगता है. देखें दस्तक.

'कौन थी बादशाहों की बीवी', मुगलों पर ओवैसी की राजनीति? देखें दस्तक

24 मई 2022

63 साल पहले फिल्म आई थी, नाम था- धूल के फूल. उसका एक गीत बहुत मशहूर हुआ... तू हिंदू ना बनेगा, ना मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा....अब आज धार्मिक ध्रुवों पर बंटी हुई राजनीति और धर्म के आधार पर ही मंदिर मस्जिद के विवाद के साए में माहौल को देखिए. एक तरफ दुनिया में हम बात करते हैं तो 130 करोड़ भारतीयों की बात करते हैं. दूसरी तरफ सियासत है. जिसमें एक पक्ष मुगलों को आज के मुस्लिमों से जोड़कर याद कराता है. तो ओवैसी मुगलों की बीवियां कौन का सवाल उठाकर उकसाने का काम करते हैं. जहां मुगलकाल को याद करके खोल दिया जाता है इतिहास का पाताललोक! देखें दस्तक.

दुनिया के नक्शे पर भारत की अर्थनीति, कूटनीति और राष्ट्रनीति की दस्तक

23 मई 2022

आज दस्तक में आधुनिक पूरब-पश्चिम की कहानी बताने जा रहे हैं. जहां पूरब में जापान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के चार प्रमुख देशों के चतुर्भज यानी क्वाड देशों की बैठक में पहुंचे हैं. 40 घंटे में 23 बैठक प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं तो पश्चिम में दावोस में विश्व आर्थिक सम्मेलन में भारत अर्थनीति के मोर्चे पर दुनिया के सामने अपना रोडमैप रख रहा है. पूरब से पश्चिम तक राष्ट्रनिर्माण की भारतीय दस्तक के बारे में आज दस्तक में बताने जा रहे हैं. इसी पूरब पश्चिम को एक-एक करके समझेंगे. सबसे पहले बात पूरब यानी जापान की. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने के बाद उनके स्वागत में खूब नारे लगे. भारत का शेर कहकर पीएम की अगवानी की गई. देखें दस्तक.

ज्ञानवापी में नमाज होगी या पूजा? देखें दस्तक

20 मई 2022

ज्ञानवापी मस्जिद में क्या होगा? पूजा होगी या नमाज होगी? ज्ञानवापी मस्जिद मानी जाएगी या मंदिर मानी जाएगी? क्या ज्ञानवापी का धार्मिक रूप बदलेगा? ज्ञानवापी में मिले दावे वाले शिवलिंग का क्या होगा? वजूखाने का क्या होगा? सर्वे रिपोर्ट का क्या होगा? इतने सवाल हैं. जवाब सिर्फ अदालत से मिलेगा. अदालत जहां एक गांव की जमीन के मामले में दशक बीत जाते हैं. अदालत जहां अयोध्या का फैसला आने में दशकों लग गए. सामाजिक तनाव के मुद्दे के समाधान में वक्त लगता है तो उसी वक्त का फायदा राजनीति उठाती है. तनाव बढ़ता है, समरसता कम होती है, ऐसे में देश का माहौल हमेशा सुधरा रहे, इसलिए जरूरी है कि ज्ञानवापी विवाद में अदालत को हर पक्ष को सुनने के बाद फैसला देने में देर ना हो जाए कहीं! देखें दस्तक.

अयोध्या के बाद अदालत में काशी-मथुरा, देखें दस्तक

19 मई 2022

1990 मे नारा लगता था, रामजन्म भूमि तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है. आंदोलन के 29 साल बाद 2019 में अयोध्या का फैसला आया. अब तीन साल बाद काशी और मथुरा की कानूनी लड़ाई शुरू हो चुकी है. स्वास्तिक, त्रिशूल, डमरू, कमल, शिवलिंग ये सारे शब्द उस सर्वे रिपोर्ट में हैं, जो कोर्ट की तरफ से नियुक्त दो कमिश्नर ने ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर देखने के बाद लिखे हैं. मस्जिद के गेट के पास अगर डमरू के चिन्ह हैं तो क्यों हैं? मस्जिद के गुंबद के नीचे खंभे में स्वास्तिक का चिन्ह कैसे है? इतिहास का सच वर्तमान में सब जानना चाहते हैं. अयोध्या के बाद अब काशी से मथुरा तक. इस पर देखें दस्तक.

बच्चे ने नीतीश कुमार को दिखाया 'सुशासन' का आईना, देखें दस्तक

18 मई 2022

बिहार में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सुशासन को आईना दिखाते एक छात्र ने मुख्यमंत्री से अपना अधिकार मांगा. अधिकारियों के सामने उनकी पोल खोली. पूर्व डिप्टी सीएम के सामने उनके राज की नाकामियों के सच से सामना कराया. बिहार में पूरी व्यवस्था को समझा दिया कि छोटा बच्चा जानके हमको ना समझाना रे. जिस नालंदा को आज सिर्फ मुख्यमंत्री के गृह जिले के तौर पर कहा जाने लगा है. वो नालंदा का अपना इतिहास है. इतिहास तलाशते देश में नालंदा का इतिहास ऐसा है. जो प्राचीन काल में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र रहा. उसी नालंदा के एक बच्चे ने सात साल पहले सरकारी स्कूली शिक्षा की बदहाली का सच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने रखा था. उसी नालंदा के एक बच्चे ने अब फिर से मुख्यमंत्री के ही सामने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की चौपट नीतियों को उजागर किया है. देखें दस्तक.

ज्ञानवापी विवाद में वर्शिप एक्ट 1991 लागू होगा या नहीं? देखें दस्तक

18 मई 2022

देश में जब खुदरा महंगाई के बाद थोक महंगाई दर भी ऐतिहासिक रूप से रिकॉर्ड का सत्य बना रही है. तब कितनी मस्जिद में मंदिर हैं? धार्मिक स्थल पर सत्य किसका जीतेगा? खबर यही प्रमुख बनती जा रही है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक तक में विवाद के बाद यही सवाल है. उत्तर प्रदेश की बड़ी धार्मिक नगर काशी से देश की राजधानी दिल्ली तक अदालतों में मंदिर मस्जिद विवाद की याचिकाओं पर आज सुनवाई हुई है. इस पर देखें दस्तक.

इतिहास खोजते देश में ऐतिहासिक गर्मी का क्या है कारण?

16 मई 2022

Heat Waves in India: मई के महीने में गर्मी पड़ती है. ये सत्य उसी तरह है जैसे सूरज पूरब से निकलता है लेकिन दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक बढ़ा हुआ तापमान गर्मी का सत्य हमेशा नहीं रहा है. 122 साल का इतिहास देखें तो मार्च सबसे गर्म और अप्रैल चौथा सबसे गर्म महीना बना. मई में रविवार को तापमान दिल्ली में कुछ जगह पर 49 डिग्री के पार तक आ गया. ये ऐतिहासिक गर्मी का रिकॉर्ड है. अब सवाल है आगे क्या होगा? कब तक ऐसे ही झुलसाती गर्मी की दस्तक देश में पड़ेगी? जानने के लिए देखें दस्तक.

मुफ्त राशन के गेहूं में कटौती, ब्रेड से ब‍िस्क‍िट पर होगा असर? देखें 10तक

13 मई 2022

याद करिए रद्द हो चुके कृषि कानून में क्या कहा गया था? कहा था कि किसान अपना अनाज मंडी से बाहर भी बेच पाएंगे. उन्हें ज्यादा कीमत मिलेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और याद करिए मुफ्त राशन की योजना को जिसके दम पर बड़ी जीत चुनाव में हासिल हुई. लेकिन आज क्या स्थिति है? आज गेहूं जब सरकारी मंडी से ज्यादा किसानों ने प्राइवेट व्यापारियों को बेच दिया तो सरकारी गोदाम में इस साल गेहूं की खरीद कम हुई. गेंहू कम आया तो अब आठ राज्यों में मुफ्त राशन में दिए जाने वाले गेहूं में कटौती अगले महीने से करने का फैसला हुआ है. अब इसे सिर्फ गरीब परिवारों की चिंता समझकर दस्तक मत दीजिएगा. पूरी रिपोर्ट देखिए सईद अंसारी के साथ दस्तक में.

कब खुलेगा महंगाई के इतिहास का तहखाना!

12 मई 2022

विश्व धर्म संसद के मंच से स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भारत को धर्म नहीं रोटी चाहिए. लेकिन आज की स्थिति ये है कि रोटी से ज्यादा धर्म की चिंता में डूबे हुए मुद्दे हैं. किसी को ताजमहल में बंद 22 दरवाजे खुलवाने हैं. किसी को मुस्लिम बस्ती में चलता बुलडोजर रोकना है. किसी को ऐतिहासिक मंदिरों के पास सटी मस्जिदों का सर्वे कराना है, तहखाना खुलवाना है किसी को मुस्लिम बच्चियों की शिक्षा को रोकना है. तब आज आप दस्तक देकर कहिए कि एक तहखाना महंगाई से मुक्ति दिलाने वाला भी खुलना चाहिए. बंद दरवाजे मुस्लिम बच्चियों को शिक्षा से दूर करने वाले भी खुलने चाहिए. अतिक्रमण करके बुलडोजर को धर्म के नाम पर रोकने वालों की राजनीति के दरवाजे बंद होने चाहिए. पूजा सिंघल जैसे सभी भ्रष्टाचारी अधिकारियों के करप्शन के तहखाने भी खुलने चाहिए. इसकी लड़ाई कोई पार्टी नहीं, आपको लड़नी है. दस्तक दीजिए, आवाज उठाइए. इतिहास खंगालते वर्तमान में महंगाई की बात सबसे पहले जो आठ साल का इतिहास बनाकर आई है.

क्या अब भी जनता का पैसा खा रहे हैं भष्ट अफसर? देखें 10तक

11 मई 2022

देश में एक वक्त था जब टॉप टेन करप्ट आईएएस अफसरों की लिस्ट तैयार हुई थी. फिर दावा हुआ कि अब सरकारी योजना का पूरा पैसा जनता तक पहुंचने लगा है. लेकिन क्या जनता का पैसा अब भी भ्रष्टाचारी अफसर ही खा रहे हैं? दुनिया में करप्शन पर नजर रखने वाली रैंकिंग एजेंसी ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में भारत 86वें नंबर पर आ गया. जबकि 2019 में 80वें नंबर पर था. यानी करप्शन में छह पायदान ऊपर. ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 46 फीसदी लोगों का मानना है कि पुलिस और स्थानीय अफसर रिश्वत लेने के मामले में सबसे आगे हैं. 41 फीसदी लोग कहते हैं कि सरकारी कर्मचारी बिना रिश्वत के काम नहीं करते. देखें 10तक.

ताज महल मंदिर है या मकबरा? देखें 10 तक

10 मई 2022

Taj Mahal Controversy: ताज महल दुनिया का एक अजूबा है, वास्तुकला का उत्कृष्ठ नमूना और हिंदुस्तान की शान भी है जो सदियों से प्यार के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. इसे बनवाने वाले मुगल बादशाह शाहजहां ने इसके लिए कहा था कि ये सूरज और चांद का दिल भी पिघला सकता है. हर साल दुनिया भर से हज़ारों लोग संगमरमर के इस बेमिसाल करिश्मे को देखने आते हैं लेकिन आज सवाल ये है कि क्या ताज महल एक मकबरा है या फिर मंदिर? ऐसी ही एक याचिका पर आज सुनवाई होनी थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के चलते यह टल गई.  इस याचिका में ताजमहल के तहखाने में बने कमरों को खोलने की इजाजत मांगी गई है. सईद अंसारी के साथ देखें दस्तक.

पेपर लीक करने वालों पर 'बुलडोजर' कब? देखें दस्तक

09 मई 2022

देश में आजादी के 75 साल बाद भी ईमानदारी से एग्जाम कराने का एक ठीक ठाक सिस्टम क्यों नहीं बना पाई सरकारें? क्या पारदर्शिता से परीक्षा ना करा पाना, सिस्टम का बेरोजगारों से द्रोह नहीं है? देश में इस बात को जानने की कोशिश सियासत और सरकारें क्यों नहीं करतीं कि ईमानदारी से परीक्षा करवाने का लीकप्रूफ सिस्टम कैसे बनेगा? कोई छोटी मोटी परीक्षा नहीं बल्कि बिहार लोक सेवा आयोग की तरफ से होने वाली परीक्षा का पेपर लीक हुआ है. सईद अंसारी के साथ देखें दस्तक.

पुतिन का 9 मई प्लान... खत्म होगी जंग या होगा महायुद्ध? देखें 10 तक

08 मई 2022

रूस यूक्रेन युद्ध शुरु हुए ढाई महीने बीत चुके हैं लेकिन जंग अब तक बेनतीजा है. हर तरफ तबाही का मंज़र है. इसी तबाही के बीच रूस में 9 मई को विक्ट्री डे का जश्न मनाया जाएगा. जानकारों की माने को 9 मई को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध से जुड़ा कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. आखिर क्या होगा ये बड़ा फैसला? क्या ये जंग को खत्म कर देगा या फिर ये जंग को और खतरनाक कर सकता है? 9 मई को रूस विक्ट्री डे मनाता है. इस दिन व्लादिमीर पुतिन देश को संबोधित करेंगे. दुनियाभर के नेता इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर पुतिन के दिमाग में चल क्या रहा है? आखिर 9 मई की तारीख रूस के लिए इतनी ज़रूरी क्यों है. देखें 10 तक का ये एपिसोड.

पुलिस क्या बन जाती है सियासी वार का औजार? देखें दस्तक

07 मई 2022

2018 के एक सर्वे के मुताबिक भारत में पुलिस पर जनता का भरोसा सिर्फ 5.7 प्रतिशत है, जबकि राजनीतिक दलों पर आम आदमी का भरोसा माइनस 1.7 फीसदी है. इतने कम भरोसे की वजह है पुलिस का राजनीतिकरण और राजनेताओं का अपनी-अपनी पुलिस को अपना राजनीतिक एजेंडे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश लगातार करना. आज के दौर में जब राज्यों के बीच राजनीति की दीवार खड़ी है तो सियासत "मेरे पास पुलिस है" वाली ताकत दिखा रही हैं. तो क्या जो पुलिस देश में राज्यों को कानून व्यवस्था संभालने और अपराधों की जांच के लिए मिली. उसी पुलिस को राजनेताओं ने अपनी सियासी हित साधने का संगठन बना लिया है? देखें दस्तक सईद अंसारी के साथ.

अश्रीन-नागराजू के प्यार पर भी हिंदू-मुसलमान! धर्म की रक्षा के ठेकेदारों पर देखें दस्तक

05 मई 2022

धर्म के नाम पर 1947 में देश बंटा, लेकिन आजादी के 75वें साल में भी देश के भीतर धर्म के नाम पर समाज को बांटने वाली राजनीति के खिलाफ दस्तक आपको देनी है. कहानी की शुरुआत से पहले खबरों की दस्तक का कैलेंडर देखते हैं, जिसमें अगले 14 दिन अहम है. पहली बड़ी जरूरी तारीख 6 मई की है. यानी शुक्रवार को जब काशी विश्वनाथ से सटे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मौजूद ऋंगार गौरी की वीड़ियोग्राफी और सर्वे अदालत के आदेश पर होना है, जिसका विरोध किया जा रहा है. 10 मई की तारीख भी अहम होने वाली है. जब देश में राजनीतिक प्रतिशोध का हथियार बन चुके राजद्रोह कानून की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी. तय होगा कि इसे क्या और बड़ी जजों की बेंच सुनेगी. तीसरी अहम तारीख इस महीने 19 मई को आएगी. जब मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की याचिका पर जिला सिविल कोर्ट को फैसला सुनाना है.

महंगाई पर कब चलेगा बुलडोजर? देखें 10 तक

04 मई 2022

एक तरफ युद्ध है रूस और यूक्रेन का युद्ध तो वहीं दूसरी तरफ दुनिया भर के कई देशों को इस लड़ाई ने महंगाई के मोर्चे पर लाकर खड़ा कर दिया है. भारत भी उन्हीं देशों में से एक है. भारत में महंगाई के लाउडस्पीकर को कंट्रोल करने के लिए आरबीआई ने आज एक आपात बैठक की, फिर जो फैसला लिया, उससे महंगाई और लाउड होने की आशंका है. दरसल, आरबीआई ने खुद बैंकों को कर्ज देने वाली दर यानी रेपो रेट को महंगा कर दिया है. अब अंदेशा है कि इसके बाद होम लोन महंगा हो सकता है. अंदेशा ये भी कि होम लोन ही नहीं बल्कि जनता के लिए कार लोन भी महंगा हो सकता है. बहुत मुश्किल में पर्सनल लोन लेने वाले आम आदमी के लिए भी महंगी ब्याज दर का संकट खड़ा हो सकता है. एजुकेशन लोन पर भी महंगाई का संकट आ खड़ा हुआ है। यानी शिक्षा के लिए कर्ज लेंगे तो महंगाई का मर्ज मिलेगा. आखिर, महंगाई पर कब चलेगा बुलडोजर? देखें 10 तक का ये एपिसोड.

सात साल का सबसे बड़ा बिजली संकट क्यों? देखें 10 तक

03 मई 2022

गर्मी में 1901 का रिकॉर्ड मार्च में भी टूटा, फिर अप्रैल में भी 122 साल में सबसे ज्यादा गर्म होने का रिकॉर्ड पारा दर्ज करा कर गया. गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद छू मंतर है. 16 राज्यों में घोषित-अघोषित रूप से सात घंटे तक बिजली कट जा रही है और फिर भीषण गर्मी- बिजली की कटौती के बीच हकीकत इस बात की भी है कि देश के गांवों में आज भी करोड़ों महिलाएं साफ पानी के लिए कम से कम ढाई किमी पैदल चल रही है. लेकिन इसी तेज गर्मी में जो अनियंत्रित है, जो अविकसित है, जो अब भी बेहद दर्दनाक है वो है साफ पानी के लिए देश के गांवों में महिलाओं का संघर्ष. सात साल का सबसे बड़ा बिजली संकट क्यों? देखें 10 तक का ये एपिसोड.

भारत में 122 साल की रिकॉर्डतोड़ गर्मी क्यों आई? जानिए

03 मई 2022

गर्मी इतनी है कि 122 साल का रिकॉर्ड मार्च में भी टूटा, अप्रैल में भी टूट गया और अब मई आ गई, आगे क्या होगा? बिजली का संकट इतना बढ़ चुका है कि 16 राज्यों में बिजली की किल्लत का सामना जनता कर रही है. प्रचंड गर्मी- बिजली की कटौती के बीच देश का एक सच ये भी है कि ग्रामीण इलाकों में करोड़ों महिलाओं को पानी के लिए कम से कम ढाई किमी तक पैदल जाना पड़ता है. महाराष्ट्र में 46 डिग्री के करीब पहुंच चुकी है. गर्मी बढ़ने का बड़ा कारण है भारतीय शहरों का स्वरूप बदलना. देखें 10 तक का ये एपिसोड.