भूपेन बोरा ने कांग्रेस छोड़ दी है, और असली वजह भी बता दी है. असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके भूपेन बोरा ने 16 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था. अव्वल तो इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से भूपेन बोरा को मनाने की भी काफी कोशिशें हुईं. लेकिन, सारी कवायद व्यर्थ साबित हुई है.
कांग्रेस की तरफ से काफी जोर देकर कहा गया था कि भूपेन बोरा को मना लिया गया है, लेकिन एक दिन बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई. भूपेन बोरा ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने की बात कंफर्म कर दी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भूपेन बोरा से मुलाकात की है, और कहा है कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं.
भूपेन बोरा को कांग्रेस में आखिरी सर्वमान्य हिंदू नेता बता चुके हिमंत बिस्वा सरमा ने आश्वस्त किया है कि बीजेपी में उनकी गरिमा और सम्मान को बरकरार रखा जाएगा - और, बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनाव में भूपेन बोरा को उम्मीदवार भी बनाएगी.
कांग्रेस से भूपेन बोरा के बीजेपी में शिफ्ट होने की सबसे बड़ी वजह बने हैं, कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन. भूपेन बोरा का आरोप है कि रकीबुल हुसैन असम में कांग्रेस को अपने तरीके से चला रहे हैं - अगस्त, 2015 में हिमंत बिस्वा सरमा भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे.
1. भूपेन बोरा ने कांग्रेस क्यों छोड़ी?
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं. जून, 2025 में गौरव गोगोई को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपने वाले भूपेन बोरा के इस्तीफा देने पर कांग्रेस में हड़कंप मच गया. आनन फानन में सीनियर कांग्रेस नेता उनके घर की तरफ दौड़ पड़े. गौरव गोगोई के अलावा AICC के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह, असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देवब्रत सैकिया, प्रद्युत बोरदोलोई और मनोज चौहान जैसे नेताओं ने मुलाकात कर भूपेन बोरा को समझाने बुझाने की कोशिश की.
कांग्रेस प्रभारी जितेंद्र सिंह ने मुलाकात के बाद कहा कि कांग्रेस पार्टी ने भूपेन बोरा का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. और, भूपेन बोरा ने अंतिम निर्णय के लिए कुछ समय मांगा है - लेकिन, भूपेन बोरा तो आखिरी फैसला पहले ही ले चुके थे.
अगले ही दिन भूपेन बोरा ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला फाइनल तो बताया ही, वे सारी बातें भी बताईं जो उनके अपने फैसले पर अडिग रहने की वजह बनीं. भूपेन बोरा ने इस्तीफा देने के अपने फैसले के लिए धुबरी लोकसभी सीट से कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन को जिम्मेदार ठहराया है, और कांग्रेस में मची कलह की भी असली वजह बताया है.
2021 के असम विधानसभा चुनाव में AIUDF नेता बदरुद्दीन अजमल के साथ चुनावी गठबंधन से लेकर टिकट बंटवारे में भी हद से ज्यादा दखल देने, बल्कि मनमानी करने जैसे आरोप लगाए हैं. 9 साल पहले हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस मिलती जुलती परिस्थितियों में ही छोड़ी थी - हालांकि, तब वो असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और राहुल गांधी के व्यवहार से नाराज बताए गए थे.
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2. कौन हैं रकीबुल हुसैन
लगातार 5 बार विधायक रह चुके रकीबुल हुसैन फिलहाल धुबरी लोकसभा सीट से सांसद हैं, जहां से वह 2024 में भारी मतों से जीतकर रिकॉर्ड कायम किया है - खास बात यह है कि रकीबुल हुसैन ने अमित शाह और शिवराज सिंह चौहान जैसे बीजेपी नेताओं की जीत का रिकॉर्ड तोड़ा है.
एक और खास बात है कि 2024 के आम चुनाव में रकीबुल हुसैन ने AIUDF नेता बदरुद्दीन अजमल को शिकस्त देकर रिकॉर्ड बनाया है, जो तीन बार सांसद रह चुके हैं. धुबरी लोकसभा सीट पर रकीबुल हुसैन ने 10,12,476 वोटों से जीत दर्ज की थी. चुनाव में रकीबुल हुसैन को 14,71,885 वोट मिले थे, जबकि बदरुद्दीन अजमल को 4,59,409 वोट ही मिले. धुबरी सीट पर एनडीए गठबंधन में एजीपी उम्मीदवार जाबेद इस्लाम को 4,38,594 वोट मिले थे.
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान किशनगंज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार कमरुल होदा के लिए निकाली गई ट्रैक्टर रैली में रकीबुल हुसैन शामिल हुए थे. रकीबुल हुसैन ने AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और AIUDF के बदरूद्दीन अजमल को बीजेपी के लिए वोट काटने वाली मशीन बताया था. कहा था, अगर एक वोट ओवैसी को दिया जाएगा, तो दो वोट बीजेपी को फायदा पहुंचाएंगे - कांग्रेस उम्मीदवार कमरुल होदा ने बीजेपी उम्मीदवार को हराकर चुनाव जीत लिया था, और असदुद्दीन ओवैसी का कैंडिडेट तीसरे स्थान पर पाया गया था.
3. कांग्रेस बन गई थी कांग्रेस-आर?
भूपेन बोरा ने आरोप लगाया है कि असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) अब APCC-R यानी रकीबुल हुसैन की कांग्रेस बन कर रह गई है. आने वाले असम विधानसभा चुनाव की तरफ इशारा करते हुए भूपेन बोरा ने यह इल्जाम भी लगाया कि कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन टिकट बंटवारे की प्रक्रिया को भी कंट्रोल करते हैं.
बीजेपी में शामिल होने जा रहे भूपेन बोरा का कहना था, मैं APCC का हिस्सा बनना चाहता हूं, APCC-R का नहीं... यह किसी पार्टी के गुट जैसा है.
असम कांग्रेस में मची कलह और नेताओं की नाराजगी के बारे में बताते हुए भूपेन बोरा ने कहा, बरसों से कांग्रेस में मेरे करीब रहने वालों से मैंने कहा है कि अगर कांग्रेस में टिके रहना है, तो APCC में नहीं, आपको APCC-R में रहना होगा... बहुत से लोग कांग्रेस छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन वे APCC-R का हिस्सा बनने को तैयार नहीं हैं.
4. धुबरी उपचुनाव में हार
भूपेन बोरा ने समागुड़ी विधानसभा सीट पर उपचुनाव का जिक्र करते हुए कांग्रेस की हार के लिए रकीबुल हुसैन को जिम्मेदार बताया. समागुड़ी विधानसभा सीट से ही रकीबुल हुसैन 5 बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे, और उनके लोकसभा चले जाने की वजह से नवंबर, 2024 में वहां उपचुनाव हुआ था. भूपेन बोरा पूछते हैं, अगर मैं सच में APCC अध्यक्ष था, और अगर मैं समागुरी से उपचुनाव लड़ता, तो क्या वह पार्टी के हित में नहीं होता?
दरअसल, उपचुनाव में रकीबुल हुसैन के बेटे तंजिल को कांग्रेस का टिकट दिया गया था - कांग्रेस उपचुनाव हार गई और उस मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट पर बीजेपी के दिप्लु रंजन सरमा ने जीत हासिल कर ली थी. भूपेन बोरा ने बताया कि वह खुद उस सीट पर उपचुनाव लड़ना चाहते थे. बोले, देवब्रत सैकिया और पाबन सिंह घटोवार जैसे नेताओं ने कहा था कि मुझे उस सीट से चुनाव लड़ना चाहिए.
5. एआईयूडीएफ से गठबंधन
भूपेन बोरा ने रकीबुल हुसैन पर 2021 के असम विधानसभा चुनाव से पहले बदरुद्दीन अजमल के साथ चुनावी गठबंधन महाजोट के लिए भी जिम्मेदार ठहराया है. चुनाव नतीजे आने के कुछ दिन बाद ही कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ बने महाजोट खत्म करने का ऐलान कर दिया था.
कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले AIUDF और BPF के साथ साथ CPM CPI, ANP और RJD के साथ महाजोट बनाया था. दस राजनीतिक दलों के महाजोट ने विधानसभा चुनाव में 50 सीटें जीती थीं. कांग्रेस, असल में, बदरुद्दीन अजमल की AIUDF और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट द्वारा लगातार मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और बीजेपी की तारीफ किए जाने से नाराज थी.