जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में काइट फेस्टिवल के दौरान जबरदस्त ट्यूनिंग देखने को मिली है. दोनों ही देशों के बीच जिस तरह के एग्रीमेंट साइन हो रहे हैं, उससे यही लगता है कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक सीधा, मजबूत रणनीतिक संदेश देने की कोशिश है. गौरतलब है कि ट्रंप की अदूरदर्शी नीतियों के असर से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व चिंतित है. इसी क्रम में यूरोप भी अमेरिकी जाल से बाहर निकलने की रणनीति पर काम कर रहा है. भारत ने अभी कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन और फ्रांस से कई समझौते किए हैं. ब्रिटेन के साथ भारत की एफटीए डील भी हो चुकी है. जर्मनी के साथ भारत की कई तरह की डिफेंस डील हो रही है. शायद यह पहली बार है कि जर्मनी इस लेवल की डील किसी गैर नाटो देश के साथ कर रहा है.
ट्रंप प्रशासन ने 2025 में भारत पर 50% तक टैरिफ लगा दिए. ट्रंप प्रशासन ने एक विधेयक पास किया है कि अगर कोई देश रूसी तेल खरीद नहीं रोकता है तो अमेरिकी राष्ट्रपति 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है. दूसरी तरफ ट्रंप बार-बार ग्रीन लैंड पर कब्जे की धमकी दे रहे हैं. ऐसे में जर्मनी के साथ भारत का गहरा रक्षा, तकनीकी और आर्थिक सहयोग ट्रंप की एकतरफा दुनिया को चुनौती देता है. यह दिखाता है कि भारत और यूरोप अब अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा .बल्कि वैकल्पिक साझेदारों (जर्मनी, यूरोप) के साथ मजबूत हो रहा है.
जर्मन चांसलर मर्ज की पहली एशिया यात्रा, संदेश बहुत दूर तक है
जर्मन चांसलर मर्ज जिन्होंने मई 2025 में पद संभाला है कि यह पहली एशिया यात्रा और NATO/EU के बाहर पहली द्विपक्षीय यात्रा है. वे 12 जनवरी को अहमदाबाद पहुंचे, जहां मोदी ने उनका स्वागत किया. दोनों ने साबरमती आश्रम का दौरा किया, इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल में भाग लिया, और फिर द्विपक्षीय बैठक भी की है. समझा जा रहा है कि कई MoUs पर साइन हो रही है. सबसे खास डील रक्षा क्षेत्र में हो रहा है. लगभग ₹70,000 करोड़ की सबमरीन डील तेजी से आगे बढ़ रही है. जर्मनी की ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) और भारत की Mazagon Dock Shipbuilders (MDL) मिलकर 6 एडवांस्ड AIP-इक्विप्ड स्टेल्थ सबमरीन (Project-75I) भारत में बनाएंगी. इसमें पूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा, जो भारत के लिए पहली बार इतने बड़े स्तर पर यूरोपीय देश से मिल रहा है.
यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा समझौता है. यह डील भारत की नौसेना को इंडो-पैसिफिक में मजबूत बनाएगी, चीन और पाकिस्तान के खतरे से निपटने में मदद करेगी. इसके साथ ही सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स पर MoU से भारत की चिप और बैटरी इंडस्ट्री को बूस्ट मिल सकती है. माइग्रेशन और वर्कर्स मोबिलिटी पर भी एग्रीमेंट होनी हैं. जिससे जर्मनी में भारतीय कुशल श्रमिकों की भर्ती आसान होगी. इसके साथ ही EU-India FTA के बारे में मर्ज ने कहा कि जनवरी अंत तक यह डील हो सकती है.
ईयू के साथ एफटीए गेमचेंजर साबित होगा
जर्मनी EU-India FTA (भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता) को बहुत तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है. यह समझौता EU के सभी 27 सदस्य देशों (जिसमें जर्मनी प्रमुख है) के साथ होगा, इसलिए यह जर्मनी के साथ भी लागू होगा.
जर्मनी का मानना है कि भारत-जर्मनी आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता को अनलॉक करने के लिए भारत-EU FTA की जरूरत है. जर्मन राष्ट्रपति ने भारत को desired partner और partner of choice बताया. जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने यात्रा से पहले कहा कि जर्मन बिजनेस FTA को गेम-चेंजर मानता है और चांसलर इस पर जोर देंगे .
जर्मनी भारत का EU में सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. FTA से टैरिफ कम होंगे, एक्सपोर्ट बढ़ेगा. ट्रंप के टैरिफ के बाद भारत EU की ओर ज्यादा देख रहा है.
ट्रंप को सीधा जवाब क्यों कह सकते हैं ?
जर्मनी को हम आम तौर पर उस देश के रूप में जानते हैं जिसके चलते ही नाटो का गठन हुआ था. परंतु आज जर्मनी सहित पूरा यूरोप चिंतित है. माना जा रहा है कि अमेरिका ग्रीन लैंड पर कब्जे के लिए नाटो पर हमले की योजना बना रहा है. शायद यूरोप को इस समय भारत को एक मात्र भरोसेमंद साथी के रूप में देख रहा है जो रूस से दूरी कम करा सकता है. इसके साथ ही भारत और यूरोप मिलकर व्यापार में अमेरिका और चीन को रिप्लेस करने की ताकत रखते हैं.
भारत ने रूस से S-400, तेल खरीद जारी रखी, जो ट्रंप को पसंद नहीं. इसलिए जर्मनी के साथ डील ट्रंप को जवाब है . भारत अब अमेरिका के अलावा जर्मनी, फ्रांस (राफेल, स्कॉर्पीन), इजराइल से रक्षा साझेदारी बढ़ा रहा है. इसके साथ ही EU-FTA और जर्मनी के साथ व्यापार बढ़ेगा, ट्रंप के टैरिफ का असर कम होगा. भारत एकतरफा नहीं झुकेगा. ट्रंप की धमकियों के बावजूद भारत की का सहयोग मजबूत है.
ट्रंप ने क्यूबा, ईरान पर सख्ती की, लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश पर दबाव से यूरोप भी खुश नहीं है. यही कारण है कि भारत और यूरोप करीब आए हैं. जर्मनी की यात्रा ट्रंप को दिखाती है कि भारत वैश्विक साझेदारियों में विविधता ला रहा है.
भारत के लिए फायदे
6 AIP सबमरीन से इंडियन ओशन में भारत का दबदबा बढ़ सकता है. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से Make in India को बूस्ट मिल सकता है. जर्मनी भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर (2025 में $50 बिलियन से अधिक), FTA से और बढ़ेगा. इसके साथ वैश्विक व्यापार में एक तरह का रणनीतिक संतुलन भी पैदा होगा. ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति ने भारत को मजबूर किया कि वह यूरोप की ओर देखे. इसी तरह यूरोप भी अमेरिका के प्रभाव से अब बाहर निकलना चाहता है. मोदी-मर्ज डील इसका सीधा जवाब है. भारत अब किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा. यह मल्टी-अलाइनमेंट की जीत है.