scorecardresearch
 

'जितनी आबादी-उतनी हिस्सेदारी' का नारा खाक में मिला, एमपी में कांग्रेस टिकट बंटवारे का खेल देखिये

पिछड़़ी जाति के वोटों के लिए नारेबाजी करने में कांग्रेस सबसे आगे है. राहुल गांधी घूम घूमकर इस बारे में बातें कर रहे हैं. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के पास मौका था कि वो अपने नारे 'जितनी आबादी-उतनी हिस्सेदारी' को चरितार्थ करती. पर यहां उसका सवर्ण प्रेम ही उजागर हुआ है.

Advertisement
X
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी करते दिग्विजय सिंह और कमलनाथ
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी करते दिग्विजय सिंह और कमलनाथ

देश की राजनीति में कांग्रेस पिछड़ा-पिछड़ा का खेल कुछ ज्यादे ही खेल रही है. राहुल गांधी ने संसद में महिला बिल पर बहस के दौरान कहा था कि देश के कुल सेक्रेटरीज में 3 परसेंट भी पिछड़ी जाति के नहीं हैं. राहुल ने इसी आधार पर महिला आरक्षण में पिछड़ी जातियों के लिए कोटे में कोटा की मांग की है. यही नहीं राहुल ने लालू  यादव के नारे जिसकी जितनी आबादी-उसकी उतनी हिस्सेदारी को जमकर सपोर्ट किया. इसी के चलते राहुल और कांग्रेस के अन्य नेता लगातार जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं. पर जब टिकट बांटने की बारी आई तो पिछड़ों का दर्द भूल गए कांग्रेस नेता.

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में यह फैसला लिया गया था जिस भी प्रदेश में काग्रेस की सरकार बनेगी वहां जाति सर्वे कराया जाएगा. केंद्र में सरकार बनने पर जाति जनगणना का भी संकल्प लिया गया. इसी आधार पर मध्यप्रदेश चुनाव के लिए जो कांग्रेस का घोषणापत्र जारी किया गया है उसमें प्रदेश की जनता से जाति सर्वे कराने का वादा किया गया है. पर सवाल यह है कि जिसकी जितनी आबादी-उसकी उतनी हिस्सेदारी की बातें केवल नारा लगाने के लिए ही हैं क्या? अगर ऐसा नहीं है तो जिसकी जितनी आबादी है उसके हिसाब से टिकट बांटने में क्या मजबूरी है. मध्य प्रदेश के कांग्रेस टिकट बंटवारे के आंकड़े तो कह रहे हैं कि जितनी आबादी-उतनी हिस्सेदारी का नारा तो यहां जुमलेबाजी हो गया है.

कांग्रेस ने मौका गंवा दिया

नौकरियों में आरक्षण के एक केस में मध्य प्रदेश सरकार के हाईकोर्ट में पेश किए गए एक आंकड़े के अनुसार राज्य में 50.09 प्रतिशत आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग की है.2021 में तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर असोसिएशन के अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर के हवाले से यह जानकारी छपी मिल जाएगी. वैसे भी करीब सभी राजनीतिक दलों के पिछड़े वर्ग के नेता यह दलील देते रहे हैं कि राज्य में आधे अधिक आबादी पिछड़े वर्ग की है.कांग्रेस के पास एक मौका था कि वो कम से कम 50 परसेंट टिकट पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों को देकर मिसाल कायम करती. आखिर जाति जनगणना कराने का वादा कांग्रेस पार्टी ने इसलिए ही तो किया है कि जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी को अमल में लाया जा सके. पर यहां तो उल्टा हुआ है. पार्टी ने सबसे अधिक टिकट सवर्णों को दिए हैं.

Advertisement

कुल टिकटों का बंटवारा, किस जाति को कितना टिकट

कांग्रेस ने अब तक कुल 144 सीटों पर कैंडिडेटों की घोषणा की है. कुल सीटों के जातिगत आधार पर बंटवारे को देखें तो कांग्रेस अपने पुराने प्यार पर ही ज्यादा मेहरबान दिख रही है. सभी जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी का वोट बैंक सवर्ण -दलित और अल्पसंख्यक रहे हैं. इन्हीं के बल पर कांग्रेस ने कई दशक भारत पर राज किया.पर अब बिना पिछड़े वोटों के सत्ता प्राप्ति मुश्किल हो गई है. बीजेपी जैसी ब्राह्मण-बनियों की पार्टी ने भी अपना मेकओवर कर लिया और पिछड़ों की पार्टी बन गई ( हालांकि बीजेपी में भी सवर्णों को टिकट कम नहीं मिला है, पर बीजेपी जितनी आबादी-उतनी हिस्सेदारी की बात नहीं करती). देखा-देखी कांग्रेस ने भी बहुत जोर-शोर से पिछड़ा वोटों के लिए प्रयास शुरू किया. पर पार्टी की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिख रहा है.
 कांग्रेस ने जो उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है उसमें सबसे अधिक संख्या में सवर्ण ही दिख रहे हैं. प्रदेश में सवर्णों की आबादी अगर 15 से 20 प्रतिशत तक भी हो तो उनको आबादी के हिसाब से करीब दोगुना टिकट मिले हैं. लिस्ट में सवर्णों के बाद ओबीसी और एसटी-एससी समुदाय के कैंडिडेट दिखाई दे रहे हैं. अभी तक जारी कुल 144 उम्मीदवारों की सूची में सवर्ण समुदाय से करीब 52 प्रत्याशी दिखाई दे रहे हैं. सवर्णों में ठाकुर करीब 22, ब्राह्मण 18 और जैन 5 और 7 अन्य सवर्ण जातियों जैसे बनिया-कायस्थ आदि हैं. करीब 39 सीटों पर पिछड़ी जाति के उम्मीदवार हैं तो 30 सीटों पर अनुसूचित जनजाति को कैंडिडट्स को टिकट मिले हैं. 22 सीटों पर दलित समुदाय के प्रत्याशी हैं.

Advertisement

महिलाओं और अल्पसंख्यकों के हिस्से में क्या आया?

कांग्रेस ने पहली लिस्ट में सिर्फ एक मुस्लिम कैंडिडट का नाम दिख रहा है. पर कहा जा रहा है कि मुस्लिम इलाकों के उम्मीदवारों की अभी घोषणा नही हुई है. इसलिए अभी अल्पसंख्यकों को उनकी आबादी के अनुपात में पार्टी ने टिकट दिया या नहीं इसका आंकलन करना ठीक नहीं होगा. पार्टी की 144 प्रत्याशियों की सूची में 19 महिलाएं शामिल हैं.देखा जाए तो महिलाओं की संख्या भी बहुत कम है. देश की संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत के करीब महिला आरक्षण का प्रावधान किया गया पर अभी एक्जिक्यूट नहीं हो सका है. इसके हिसाब से देखा जाए तो महिलाओं को भी टिकट बंटवारे में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है.

सवर्णों पर बीजेपी भी मेहरबान 

मध्यप्रदेश में सवर्ण समुदाय पर कांग्रेस ही नहीं बीजेपी भी मेहरबान है. कांग्रेस के 52 सवर्ण कैंडिडेटों के मुकाबले बीजेपी ने करीब 48 की संख्या में सवर्ण जातियों को टिकट दिया है.भारतीय जनता पार्टी भी पिछड़ों का सबसे बड़ा हितैशी होने का दावा करती है. बीजेपी का कहना है कि मध्यप्रदेश में उमा भारती, सुंदर लाल पटवा, बाबू लाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के रूप में उसने 4 मुख्यमंत्री ओबीसी समुदाय से बनाएं हैं. पर दोनों पार्टियों ने अभी तक जो टिकट बांटे हैं उसके आधार पर कांग्रेस   बीजेपी से पिछड़ती नजर आ रही है. बीजेपी ने 136 टिकटों में से 40 प्रत्याशी ओबीसी समुदाय से आने वाले प्रत्या्शियों को टिकट दिए हैं तो कांग्रेस ने 144 सीटों में से 39 ओबीसी प्रत्याशी उतारे हैं.
 

---- समाप्त ----

Advertisement
Advertisement