लालू यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को मन से माफ कर दिया है. बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तो चुनावों में भी आशीर्वाद दे रही थीं, अब लालू यादव भी बरसाने लगे हैं. तेज प्रताप के दही चूड़ा भोज में लालू यादव सबसे पहले पहुंचे थे, लेकिन तेजस्वी यादव नहीं.
दही चूड़ा भोज में तेज प्रताप यादव के बुलावे पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा सहित बिहार सरकार के कई मंत्री भी पहुंचे थे. तेज प्रताप के दही चूड़ा के भोज के लिए बुलावे में पार्टी लाइन जैसी कोई सीमा नहीं दिखी थी, लेकिन जिनको बुलाया था, उनमें काफी लोग नहीं पहुंचे. लेकिन, सबसे महत्वपूर्ण बात थी - लालू यादव का पहुंचना.
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के न पहुंचने पर तेज प्रताप यादव ने कहा, हमने निमंत्रण पत्र दे दिया है. हमारे छोटे भाई हैं, वो थोड़ा लेट सोकर उठते हैं. वो भी आएंगे.
भोज के दौरान लालू यादव और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अगल बगल ही बैठे थे, और तेज प्रताप यादव ने खूब बातें की. बातचीत के बाद तेज प्रताप ने कहा कि बड़े बुजर्गों से आशीर्वाद लेते हुए कुछ बड़ा काम करना है. तेज प्रताप ने भोज के बाद पूरे बिहार में यात्रा निकलने का ऐलान किया है.
आखिरकार मिला पिता का आशीर्वाद
बीता साल तेज प्रताप यादव के लिए बहुत दुखदाई रहा. 2025 के मुकाबले 2026 की शुरुआत तेज प्रताप यादव के लिए बेहतरीन कही जाएगी. तेज प्रताप यादव को सब कुछ वापस मिले न मिले, पिता का आशीर्वाद तो मिल ही गया है.
तेज प्रताप यादव के दही चूड़ा भोज के दौरान मीडिया से बातचीत में लालू यादव ने कहा, परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन इसका मतलब दूरी नहीं होती. और, सबसे महत्वपूर्ण बात भी लालू यादव ने बोल दी, तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेगा.
पिछले साल सोशल मीडिया पर तेज प्रताप यादव और उनकी दोस्त की कुछ निजी तस्वीरें आ गई थीं. तस्वीरों के साथ ये भी बताया गया था कि वो पिछले 12 साल से रिलेशनशिप में हैं. ये वो पीरियड है जिसके बीच में ही उनकी शादी हुई थी, और फिलहाल अदालत में तलाक का मामला चल रहा है.
ये सब होने के बाद ही लालू यादव ने तेज प्रताप यादव को पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से निकाल दिया था. और, उसके साथ ही परिवार से भी. अपने खिलाफ ऐक्शन होने के बाद भी तेज प्रताप यादव ने कुछ दिन तक तो नरम रुख दिखाया, लेकिन बाद में वो खुलकर सामने आ गए.
बिहार चुनाव के लिए अपनी अलग पार्टी भी बनाई. जनशक्ति जनता दल. महुआ विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़े, लेकिन बुरी तरह हार गए. लड़ाई भी खुलकर हुई. दोनों भाई पूरे चुनाव में आमने सामने देखे गए. तेजस्वी यादव ने महुआ जाकर भाई के खिलाफ वोट मांगे, तो तेज प्रताप ने भी तेजस्वी यादव के खिलाफ उनकी राघोपुर सीट पर जाकर अपने उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार किया.
राबड़ी देवी राघोपुर जाकर तेजस्वी यादव के लिए तो वोट मांगती रहीं, लेकिन तेज प्रताप को दूर से ही सफल होने का आशीर्वाद दिया. मीसा भारती ने भी ऐसा ही किया था. लालू यादव ने भी एक उम्मीदवार के लिए रोड शो किया, लेकिन चुनावों के दौरान तेज प्रताप को लेकर कोई बयान नहीं दिया.
लालू यादव के भोज में पहुंचने को कुछ लोग तेज प्रताप की घर वापसी के रूप में देख रहे हैं. घर वापसी तो नहीं, लेकिन उसके संकेत तो मिल ही रहे हैं. लालू यादव ने ही एक्शन लिया था, और भोज में वही सबसे पहले पहुंचे भी - लेकिन राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का भोज में शामिल न होना (ये रिपोर्ट लिखे जाने तक.) भी तो मायने रखता ही है.
दही चूड़ा भोज हिट या फ्लॉप?
तेज प्रताप ने दिल खोलकर न्योता बांटे थे. बगैर राजनीतिक और वैचारिक भेदभाव का अंतर किए. भले ही वो संघ की विचारधारा की आलोचना करते रहे हों, लेकिन दही चूड़ा भोज के न्योता में ऐसा बिल्कुल नहीं दिखा. और, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने तेज प्रताप यादव को निराश भी नहीं होने दिया है.
जो नेता तेज प्रताप यादव के दही चूड़ा भोज में नहीं पहुंचे -
प्रेम कुमार, बिहार विधानसभा स्पीकर
अवधेश नारायण सिंह, बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष
मदन सहनी, जेडीयू
लेसी सिंह, जेडीयू
रीता निषाद, जेडीयू
मुकेश सहनी, विकासशील इंसान पार्टी
रामकृपाल यादव, बीजेपी
लखींद्र पासवान, बीजेपी
दिलीप जायसवाल, बीजेपी
दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय लोक मोर्चा
संतोष सुमन, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा
मंगनी लाल मंडल, आरजेडी
हिट और फ्लॉप के पैमाने पर तेज प्रताप यादव के लिए तराजू की एक तरफ लालू यादव हैं, और दूसरी तरफ बाकी सभी. बाकियों में तेजस्वी यादव भी हैं, और राबड़ी देवी भी.
जिन बड़े चेहरों को, खासकर जिन बड़े एनडीए नेताओं को, तेज प्रताप ने न्योता दिया था उनमें से ज्यादातर नहीं पहुंचे - लेकिन लालू यादव और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पूरी भरपाई कर दी.