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'मुसलमानों का नया मसीहा कौन?' BMC चुनाव से पहले फडणवीस का उद्धव ठाकरे की कमजोर नस पर वार

उद्धव ठाकरे को हिंदुत्व के मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस ने नए सिरे से कठघरे में खड़ाकर दिया है. ऐन बीएमसी चुनाव के बीच देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि उद्धव ठाकरे मुसलमानों के कांग्रेस से भी बड़े मसीहा हैं. हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी के निशाने पर रहे उद्धव ठाकरे के लिए ये नया चैलेंज है.

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देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है. (Photo: PTI)
देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है. (Photo: PTI)

देवेंद्र फडणवीस ने बीएमसी चुनाव के बीच उद्धव ठाकरे की राजनीति को मुस्लिमपरस्त करार दिया है. 2019 में बीजेपी से अलग होने के बाद से ही महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हिंदुत्व के मुद्दे पर निशाने पर रहे हैं. गठबंधन तोड़कर कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के साथ हाथ मिला लेने को लेकर बीजेपी उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व की राजनीति पर सवाल उठाती रही है. 

आजतक के मुंबई मंथन 2026 कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीएमसी चुनाव में हाथ मिलाने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल पूछा गया था. जवाब में देवेंद्र फडणवीस ने दोनों भाइयों को मिलाने का क्रेडिट ले लिया. ये भी बोले कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे भी उनको इस काम के लिए आशीर्वाद दे रहे होंगे. ठाकरे बंधुओं के साथ आने का सवाल डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से भी पूछा गया था. ठाकरे बंधुओं के मुंबई के खतरे में होने की बात पर एकनाथ शिंदे ने कहा कि ऐसा कभी नहीं होगा. 

बीएमसी चुनाव कैंपेन में मेयर कौन होगा, बहस इस बात पर भी छिड़ी हुई है. और, हर कोई अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहा है. ठाकरे बंधु मराठी मेयर की बात कर चुके हैं, तो देवेंद्र फडणवीस हिंदू-मराठी मेयर बनने का दावा कर रहे हैं. ऐसे में AIMIM की तरफ से मुस्लिम मेयर का दावा भी किया जा चुका है, और देवेंद्र फडणवीस इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं - और उसी क्रम में उद्धव ठाकरे को मुस्लिमों का सबसे बड़ा मसीहा बता डाले हैं. 

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मुंबई में मुसलमानों का मसीहा कौन?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे को मुसलमानों का सबसे बड़ा मसीहा करार दिया है. देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, उद्धव ठाकरे कांग्रेस से भी कहीं बढ़कर मुसलमानों के मसीहा हैं.

उद्धव ठाकरे पर ये हमला नया नहीं है, बल्कि बीजेपी छोड़ने के साथ ही ये सब शुरू हो गया था. उद्धव ठाकरे के लिए ये सबसे बड़ी चुनौती रही है, और उनको इसकी भारी कीमत भी चुकानी पड़ी है. 

हिंदुत्व के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे लगातार सफाई देते रहे हैं, लेकिन बीजेपी का साथ छूटने के बाद एक बार उनके मुख्यमंत्री बनने को छोड़ दें, तो चुनावों में लगातार मात खानी पड़ी है. अव्वल तो उद्धव ठाकरे ने जब से कमान संभाली तभी से शिवसेना को बदलने की कोशिश शुरू कर दी थी, लेकिन कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिलाने के बाद खुलकर स्टैंड लेना पड़ा. और, धीरे धीरे वो मुस्लिम समुदाय के करीब जाने की कोशिश करने लगे. 2024 के लोकसभा चुनाव तक तो स्थिति संभल गई, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हुआ. 

और, अभी अभी स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे भी कोई अच्छी खबर नहीं लेकर आए हैं. अब बीएमसी चुनाव से ही आस है, जिसमें हुआ ये है कि कांग्रेस ने भी साथ छोड़ दिया है, क्योंकि उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे के साथ हाथ मिला लिया है. बीएमसी चुनाव में शरद पवार की एनसीपी उद्धव ठाकरे के साथ है. वैसे पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में तो शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार के साथ ही मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. 

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मुंबई के मुस्लिम मेयर के सवाल पर तो देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे को घेरा ही, कांग्रेस का साथ छोड़ने की वजह भी अपने तरीके से समझाई है. बीएमसी चुनाव कांग्रेस प्रकाश आंबेडकर की पार्टी वंचित विकास आघाड़ी के साथ मिलकर लड़ रही है. 

देवेंद्र फडणवीस का कहते हैं, कांग्रेस से गठबंधन करते तो उसे सीटें देनी पड़तीं... उद्धव ठाकरे को लगता है कि मुस्लिम वोटर मेरा वोट बैंक हो गया है... अभी उनको कॉन्फिडेंस है, और इसलिए कांग्रेस को दरकिनार कर अलग से लड़ रहे हैं... ऐसा नहीं होता तो... छत्रपति संभाजीनगर में रसीद मामू जैसे व्यक्ति को उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी में लिया. बालासाहेब होते, तो क्या वे उसे अपनी पार्टी में लेते? महाराष्ट्र में मुस्लिमों के मसीहा उद्धव जी बने हैं. 

मुंबई का मेयर कौन होगा?

बीएमसी चुनाव के बाद मुंबई के मराठी मेयर का प्रस्ताव उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की तरफ से ही आया था, जिसे हिंदू-मराठी बोलकर बीजेपी ने आगे बढ़ा दिया, और AIMIM नेता वारिस पठान ने मुस्लिम मेयर बोलकर काउंटर करने की कोशिश की है. रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में मुस्लिम आबादी करीब 22 फीसदी है.
 
देवेंद्र फडणवीस कहते हैं, हमारी पार्टी के एक नेता मीरा-भाएंदर गए थे. वहां उन्होंने कहा कि कोई उत्तर भारतीय मुंबई का मेयर बनेगा. उसको लेकर ही ये मुद्दा बना. देवेंद्र फडणवीस का कहना है, उत्तर भारतीय कोई बाहर के लोग तो नहीं हैं. वारिस पठान ने बुर्के वाली मेयर की बात की, तो इनका मुंह बंद हो गया... इसलिए हमने कहा कि यहां हिंदू और मराठी महापौर बनेगा. 

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और, इस तरह देवेंद्र फडणवीस बुर्के वाली मेयर को मुद्दा बनाकर उद्धव ठाकरे की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं.

शिवसेना यूबीटी के भीतर अलग ही बवाल चल रहा है. पुराने कार्यकर्ता बाहरी लोगों को टिकट देने पर नाराजगी जता रहे हैं. मामला चांदवली प्रभाग का है. वहां शिवसेना यूबीटी ने सैयद इमरान नबी को टिकट दिया है. विरोध की वजह है कि पिछला चुनाव वो हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के टिकट पर लड़ चुके हैं. 

आरोप है कि सैयद इमरान नबी को जिस दिन शिवसेना (यूबीटी) में शामिल कराया गया, उसी दिन उनको एबी फॉर्म देकर उम्मीदवार भी बना दिया गया - और बरसों से काम कर रहे पुराने और अनुभवी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है.

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