दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को पिछले तीन चुनावों में लगातार सफलता मिल रही है. भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनावों में शत-प्रतिशत सीट जीतकर भी विधानसभा चुनावों में बुरी तरह हार जाती है. माना जाता है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल की फ्रीबीज वाली योजनाओं के चलते आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनावों में बढ़त हासिल होती रही है. शायद यही कारण है कि अब बीजेपी भी आम आदमी पार्टी सरकार की मुफ्त वाली योजनाओं को जारी रखने का दिल्ली की जनता से वादा किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोहिणी के जापानी पार्क में रविवार को एक परिवर्तन रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर दिल्ली में भाजपा सरकार बनती है तो सभी चल रही कल्याणकारी योजनाएं जैसे मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए सार्वजनिक बसों में मुफ्त यात्रा और स्वास्थ्य योजनाएं जारी रहेंगी. जाहिर है कि बीजेपी किसी भी कीमत पर दिल्ली विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए कमर कस चुकी है.इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी को हराने के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति भी बदल दी है.
1- जहां झुग्गी वहां मकान का वादा
दिल्ली विधानसभा चुनावों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग दिल्ली की करीब 20 सीटों का फैसला करते हैं. बीजेपी की चुनावी रणनीति में इस बार झुग्गी वालों को फोकस किया गया है. शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को 1675 फ्लैटों की चाबियां सौंपकर दिल्ली चुनावों का बिगुल फूंका है. ये फ्लैट डीडीए ने 'जहां झुग्गी वहीं मकान' योजना के तहत तैयार किए हैं. अब सवाल उठता है कि क्या 'जहां झुग्गी वहीं मकान' योजना के तहत घर की चाबी सौंपे जाने से बीजेपी के लिए दिल्ली में सत्ता का ताला खुलेगा?
दिल्ली की 750 झुग्गियों में 30 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से आधे पंजीकृत मतदाता हैं और आम आदमी पार्टी का सबसे अधिक मजबूत आधार यहीं है. जाहिर है कि बीजेपी को अगर दिल्ली में सरकार बनाना है तो आम आदमी पार्टी का यहां आधार तोड़ना होगा. सर्वे बताते हैं कि 2020 में 61% गरीबों ने AAP को वोट दिया पार्टी 62 सीट जीतने में सफल रही थी अनुमान बताते हैं कि दिल्ली की 750 झुग्गियों में रहने वाले पंजीकृत मतदाता शहर के लगभग 15 मिलियन कुल मतदाता आधार का दसवां हिस्सा हैं. नरेला, आदर्श नगर, वजीरपुर, मॉडल टाउन, राजेंद्र नगर, संगम विहार, बदरपुर, तुगलकाबाद, अंबेडकर नगर, सीमापुरी, बाबरपुर, त्रिलोकपुरी, कोंडली, ओखला, मोती नगर, मादीपुर, शालीमार बाग, मटियाला और किरारी हैं आदि झुग्गी मतदाताओं के बड़े आधार वाले विधानसभा क्षेत्र हैं.
मुंबई में बीजेपी सरकार ने ये स्कीम चलाई थी जो बहुत सफल रही. पार्ट मुंबई के अपने अनुभव को दिल्ली में दोहराने की सोच रही है.
2- शीशमहल के ख़िलाफ़ आक्रामक अभियान
बीजेपी का आरोप है कि केजरीवाल ने मरम्मत के नाम पर मुख्यमंत्री आवास को 7 स्टार रिसॉर्ट में बदल दिया. पार्टी कहती है कि ये वही केजरीवाल हैं जो अपनी राजनीति की शुरुआत में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति रहते हुए 300 से ज्यादा कमरे वाले मकान पर सवाल उठाते थे. बीजेपी कहती रही है कि आम आदमी पार्टी के मुखिया केवल कहने के लिए आम आदमी बनते हैं. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मांग की है कि केजरीवाल को दिल्ली के लोगों को बताना चाहिए कि उन्होंने किस अधिकार से अपने बंगले की सजावट पर करीब 45 करोड़ रुपए खर्च कर दिए. ये वो समय था जब कोविड में जनता के विकास कार्य बंद थे. भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर किस तरह गंभीर है.इसका क्रॉनोलॉजी देखिए.
4 दिसंबर को बीजेपी की दिल्ली यूनिट ने अरविंद केजरीवाल को ‘दिल्ली का राजा बाबू’ दिखाते हुए एक पोस्टर जारी किया. पोस्टर पर लिखा- AAP Presents करोड़ों का शीशमहल. इससे पहले भी बीजेपी ने तीन और पोस्टर जारी कर केजरीवाल पर निशाना साधा था.
9 दिसंबर 2024 को बीजेपी ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें दिल्ली के सीएम हाउस का आलीशान इंटीरियर दिखाया गया। बीजेपी ने केजरीवाल पर तंज कसा, 'वे कहते थे कि सरकारी घर नहीं लूंगा, लेकिन रहने के लिए 7 स्टार रिसॉर्ट बना डाला.'
3 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के अशोक विहार में एक कार्यक्रम में शीशमहल का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा, 'मैं भी कोई शीशमहल बना सकता था, लेकिन मेरा सपना था कि देशवासियों को पक्का घर मिले. देश जानता है कि मोदी ने कभी अपने लिए घर नहीं बनाया.
5 जनवरी को पीएम मोदी ने दिल्ली के जापानी पार्क में आयोजित सभा में फिर केजरीवाल पर शीशमहल को लेकर निशाना साधा. मोदी ने बिना नाम लिए कहा, जब दिल्ली कोविड -19 से जूझ रही थी, तब उनका ध्यान शीशमहल बनवाने पर था.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में केजरीवाल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा,केजरीवाल को जब दिल्ली के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम करने का मौका मिला, तब उन्होंने अपना भवन बनाने का काम किया. केजरीवाल ने 50 हजार गज में 45 करोड़ रुपए का शीशमहल बनाया.
पीएम ने रविवार को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, उनका शीश महल उनके झूठ को साबित करता है. आज एक बड़े अखबार ने शीश महल पर खर्च के बारे में लिखा है जो सीएजी रिपोर्ट के आधार पर है… उन्होंने इसके लिए भारी बजट बनाया. अखबार ने दिखाया है कि कैसे उस बजट से तीन गुना अधिक खर्च किया गया. मोदी ने कहा, यह जोड़ते हुए कि जब देश भर में लोग कोविड-19 महामारी से लड़ रहे थे, तब आप शीश महल बना रही थी.
3-आम आदमी पार्टी के सभी लोककल्याणकारी स्कीम चलाते रहने का वादा
मोदी ने बीते रविवार को आप पर हमला करते हुए कहा कि ये लोग अपनी हार सामने देखकर बौखला गए हैं. इसलिए वे झूठ फैला रहे हैं कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो सभी चल रही कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी. मोदी ने कहा कि मैं आपको वादा और आश्वासन देता हूं कि ये योजनाएं दिल्ली में जारी रहेंगी. पर बेइमानों का जो ठेका है उसे हटाया जाएगा… हम इन आपदा वालों को हटाएंगे, ईमानदार नेताओं को लाएंगे और सभी कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाएंगे.
मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने दिल्ली में 1,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें पेश की हैं और ई-मोबिलिटी को तेजी से बढ़ावा दिया है.इसके विपरीत, आप सरकार ने शहर में सार्वजनिक परिवहन का समर्थन करने के लिए बहुत कम किया है. वे बस रखरखाव की उपेक्षा कर रहे हैं, जिससे हर सड़क पर गड्ढे, बार-बार ट्रैफिक जाम और शहर में कचरे का ढेर लगा हुआ है.
4-बीजेपी ने राष्ट्रीय मुद्दों को छोड़ा, स्थानीय मुद्दों पर लड़ रही है
भारतीय जनता पार्टी इस बार के विधानसभा चुनावों में ऱाष्ट्रीय मुद्दों से किनारा कर लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपने भाषणों में स्थानीय समस्याओं की बात कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नालियों, जलभराव वाली सड़कों और डीटीसी बसों के बेड़े के बारे में बात करते नजर आ रहे हैं. यह भाजपा की ओर से अतीत में दिल्ली में चलाए गए ‘राष्ट्रीय’ मुद्दों पर आधारित चुनाव प्रचार से एकदम अलग है.
भारतीय जनता पार्टी का सारा फोकस आम आदमी पार्टी की कल्याणकारी योजनाओं- जिसमें मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए बस की सवारी, सब्सिडी वाली स्वास्थ्य सेवा आदि को ही मुद्दा बनाया जा रहै है.
5- आमने सामने की टक्कर वाले प्रत्याशी
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है.खास बात यह है कि बीजेपी इस बार आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं से आमने सामने की टक्कर चाहती है. मतलब साफ है कि खेल में अफेंसिव बने रहना है. लिस्ट में 29 नाम हैं. इनमें से 7 नेता हाल ही में AAP और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं.नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ प्रवेश वर्मा चुनाव लड़ रहे हैं. जब कि कालकाजी से CM आतिशी के खिलाफ रमेश बिधूड़ी को मैदान में उतारा गया है. इस सीट पर कांग्रेस ने अलका लांबा को टिकट दिया है. इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस ने भी ताकतवर उम्मीदवार उतारे हैं. आम तौर पर पंजाब और हरियाणा विधानसभा चुनावों के दौरान यह बात सामने आई थी कि आप और कांग्रेस का आपस में समझौता न होने के बावजूद यह ध्यान रखा गया था कि जीतने वाले प्रत्याशी के सामने दोनों ही पार्टियों ने कमजोर प्रत्याशी उतारकर मुचुवल अंडरस्टैंडिंग दिखाई थी. पर दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ संदीप दीक्षित को और आतिशी के खिलाफ अलका लांबा जैसे प्रत्याशी देकर कांग्रेस ने यह साबित कर दिया है कि वह भी मन से चुनाव लड़ रही है.