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भगवंत मान को अकाल तख्त का समन, पंजाब में AAP के लिए अग्निपरीक्षा का समय

AAP ने 2022 के विधानसभा चुनावों में सिख वोट बैंक को मजबूत करके जीत हासिल की थी, लेकिन अब यह समन उसकी धार्मिक संवेदनशीलता पर सवाल उठा सकता है. राजनीतिक रूप से, यह शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस के लिए AAP को सिख-विरोधी करार देने का मौका देता है.

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान 15 जनवरी को अकाल तख्त के सामने उपस्थित होंगे.
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान 15 जनवरी को अकाल तख्त के सामने उपस्थित होंगे.

पंजाब की राजनीति में धार्मिक और राजनीतिक शक्तियों का अंतर्संबंध हमेशा से एक जटिल मुद्दा रहा है. अब राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार भी उसकी जद में है. हाल ही में, श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज द्वारा पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 15 जनवरी 2026 को पेश होने का समन जारी किया गया है, जो आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है. यह समन मान के कथित सिख-विरोधी बयानों, गुरु की गोलक और दसवंध जैसे सिख सिद्धांतों पर विवादास्पद टिप्पणियों, तथा संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले (ऑपरेशन ब्लू स्टार के विलेन)  की तस्वीरों के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार वाले वीडियो पर आधारित है. 

 यह घटना AAP की धार्मिक संवेदनशीलता और राजनीतिक रणनीति की परीक्षा है, क्योंकि पंजाब में सिख बहुमत में है और धार्मिक संस्थाएं राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करती हैं. AAP, जो खुद को धर्मनिरपेक्ष और सुशासन पर आधारित पार्टी मानती है, अब इस अग्नि परीक्षा से गुजर रही है जहां एक गलत कदम उसकी साख को नुकसान पहुंचा सकता है. इस नोटिस का जवाब AAP के लिए क्यों अग्नि परीक्षा है? क्योंकि यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर मान की छवि को प्रभावित करता है, बल्कि पार्टी की समग्र रणनीति को भी.

 AAP के लिए नया संकट है मान पर लगे आरोप

श्री अकाल तख्त साहिब की स्‍थापना गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी. अब अकाल तख्‍त धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर फैसले सुनाता है, और उसके आदेश सिख समुदाय के लिए बाध्यकारी होते हैं. इतिहास में कई प्रमुख नेता जैसे सुरजीत सिंह बरनाला, सुखबीर सिंह बादल आदि को अकाल तख्त ने समन किया है, और कई के खिलाफ फैसले भी सुनाए गए. 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद ज्ञानी जैल सिंह और बूटा सिंह जैसे नेताओं को भी तनखैय्या (विधर्मी) घोषित किया था. इसी तरह भगवंत मान को भी अकाल तख्त ने समन भेजा है. 

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अकाल तख्त का आरोप है कि मान के बयान जो सिख मर्यादा (आचार संहिता) के खिलाफ माने गए हैं. उदाहरणस्वरूप, जसबीर जस्सी के गुरु ग्रंथ साहिब वाले मंच पर गाने के विवाद में मान ने जत्थेदार की भूमिका पर सवाल उठाया था. दूसरा, दसवंध और गुरु की गोलक पर टिप्पणियां, जो सिख दान की परंपरा को प्रभावित करती हैं. जत्थेदार ने इन्हें सिख भावनाओं को गहरी चोट बताया. तीसरा, एक वायरल वीडियो जहां मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति सिख गुरुओं और भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करता है, हालांकि यह AI-जनरेटेड हो सकता है. 

जत्थेदार ने इसे राजनीतिक अहंकार का उदाहरण माना और मान को पतित सिख (केश कटवाने वाला) बताते हुए सचिवालय में पेश होने को कहा, क्योंकि पतित व्यक्ति को अकाल तख्त की रेलिंग के सामने नहीं लाया जा सकता. यह समन 2023 के गुरबानी प्रसारण विवाद के बाद दूसरा है, लेकिन अधिक गंभीर है क्योंकि यह सीधे सिख संस्थानों पर हमला माना गया. 

गुरु ग्रंथ साहब की प्रतियां गायब होने पर AAP सरकार की एफआईआर से SGPC कठघरे में

पंजाब में AAP सरकार और SGPC के बीच टकराव का एक कारण श्री गुरुग्रंथ साहब की पवित्र प्रतियों के गायब होने की एफआईआर भी है. जिस पर कार्रवाई तेज हो गई है. मामला श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पूर्ण प्रतियों के गायब होने या नष्ट होने का है, जिसकी जांच पिछले पांच साल से चल रही थी. 

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शनिवार को SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने AAP सरकार पर 328 बिरों के मामले में FIR दर्ज करने के लिए निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह शीर्ष गुरुद्वारा संस्था के प्रशासनिक अधिकारों में हस्तक्षेप कर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है. वहीं AAP ने SGPC पर पंजाब पुलिस की जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया. FIR में 16 लोगों के नाम शामिल हैं, जिनमें SGPC के पूर्व मुख्य सचिव और चार्टर्ड अकाउंटेंट सतिंदर सिंह कोहली शामिल हैं, जिन्हें गुरुवार को गिरफ्तार किया गया. 

शनिवार को विशेष जांच टीम (SIT) ने 15 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें कोहली से जुड़े परिसर भी शामिल थे. शनिवार को अपने बयान में धामी ने FIR में नामित 16 लोगों से किसी भी संबंध से इनकार किया.उन्होंने पुलिस द्वारा SGPC कर्मचारियों को तलब करने और रिकॉर्ड मांगने पर सवाल उठाया.

 AAP बनाम SGPC

AAP और SGPC के बीच यह टकराव पहली बार नहीं है, राज्य में राजनीतिक बदलावों और SAD के घटते प्रभाव के बीच. उनके रिश्ते की शुरुआत 2023 में पंजाब विधानसभा द्वारा सिख गुरुद्वारों (संशोधन) बिल पारित करने से हुई थी . AAP के सत्ता में आने के एक साल बाद ताकि स्वर्ण मंदिर से गुरबानी का ‘मुफ्त प्रसारण’ सुनिश्चित हो.

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इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर की मानें तो मान ने इसे बादल परिवार से जुड़े निजी चैनल पर गुरबानी प्रसारण के एकाधिकार को खत्म करने के रूप में पेश किया. इसके तुरंत बाद, मान ने बादल पर बाढ़ राहत कार्य के लिए दान मांगने के लिए SGPC बैंक खाते का विवरण साझा करने पर हमला किया. उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि SAD नेता ऐसा कर रहा है न कि अधिकृत SGPC प्रतिनिधि, और कहा कि इससे AAP का रुख सही साबित होता है कि एक परिवार SGPC को नियंत्रित कर रहा है.

मान ने SGPC पर सीधे हमला भी किया, कई बार कहा कि अगर गुरुद्वारों से गोलक (दान बॉक्स) हटा दिए जाएं, तो इसके सदस्य समुदाय की सेवा में रुचि खो देंगे. बादल परिवार पिछले तीन दशकों से एसजीपीसी पर पकड़ से अपनी शक्ति और प्रभाव प्राप्त करता रहा है. अब अस्तित्व संकट में होने के कारण SAD SGPC के निर्वाचित सदन में बहुमत बनाए रखना पार्टी के सर्वाइवल के जरूरी हो गया है. जिसका कार्यकाल कुछ समय पहले समाप्त हो चुका है. 

वर्तमान विवाद ने कई सिख समूहों को SGPC पर कब्जा करने की उम्मीद दी है, जिसमें मांग बढ़ रही है कि SGPC चुनाव, जो आखिरी बार 2011 में हुए थे, जल्द से जल्द कराए जाएं.

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AAP की धार्मिक संवेदनशीलता,  चुनौतियां और रणनीति

AAP की स्थापना से ही पार्टी खुद को धर्मनिरपेक्ष बताती रही है, लेकिन पंजाब जैसे राज्य में जहां सिख धार्मिक भावनाएं प्रमुख हैं, यह दृष्टिकोण चुनौतीपूर्ण है. भगवंत मान, जो खुद को समर्पित सिख कहते हैं, ने X पर पोस्ट कर कहा कि वे मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि विनम्र सिख के रूप में नंगे पैर पेश होंगे.

 उन्होंने अकाल तख्त को सर्वोच्च माना और राष्ट्रपति के कार्यक्रम के मुकाबले इसे प्राथमिकता देने की बात की है. यह प्रतिक्रिया AAP की संवेदनशीलता दिखाती है, लेकिन क्या यह पर्याप्त है? पंजाब में AAP ने 2022 में 92 सीटें जीतीं, जिसमें सिख वोटर्स का बड़ा हिस्सा था. पार्टी ने सुशासन, स्वास्थ्य और शिक्षा पर फोकस किया, लेकिन धार्मिक मुद्दों पर कभी-कभी आक्रामक रुख अपनाया. उदाहरणस्वरूप, गुरु ग्रंथ साहिब के गायब स्वरूपों पर FIR दर्ज करना सकारात्मक कदम था, लेकिन SGPC ने इसे धार्मिक हस्तक्षेप बताया.

 जत्थेदार ने चेतावनी दी कि सिख संस्थाओं में दखल से पंथिक कार्रवाई होगी. यह दिखाता है कि AAP की नैतिक जिम्मेदारी वाली रणनीति धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुंचा सकती है.  सोशल मीडिया पर सिख समुदाय में विभाजन स्पष्ट दिखता है. बहुत से लोग इसे राजनीतिक साजिश भी मानते हैं. जबकि बहुत से लोग इसके लिए मान की आलोचना भी करते हैं. 

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 BJP नेता RP सिंह ने मान का इस्तीफा मांगा, कहते हुए कि यह सिख संस्थानों का अपमान है. AAP विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि मान स्पष्टीकरण देंगे. लेकिन अगर अकाल तख्त से कड़ा फैसला आया, तो AAP की सिख समर्थक छवि कमजोर हो सकती है. पार्टी को अब सिख परंपराओं का सम्मान करते हुए राजनीतिक फैसले लेने होंगे, जैसे SGPC से सहयोग बढ़ाना. यह अग्नि परीक्षा AAP की संवेदनशीलता को मजबूत कर सकती है अगर वे इसे सकारात्मक रूप से संभालें, अन्यथा सिख वोट बैंक खो सकता है.

राजनीतिक रणनीति: AAP की चुनौतियां और अवसर

राजनीतिक रूप से, यह समन AAP की रणनीति की परीक्षा है. पंजाब में AAP की सरकार 2022 से चल रही है, लेकिन विपक्ष SAD और कांग्रेस इसे सिख-विरोधी बताकर हमला कर रहे हैं. SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने FIR को जल्दबाजी बताया, जबकि SAD इसे AAP की अहंकारी नीति कह रहा है. 

 2027 चुनावों से पहले यह मुद्दा AAP के लिए जोखिम भरा है, क्योंकि सिख मुद्दे वोटर्स को प्रभावित करते हैं. AAP की रणनीति अब तक सुशासन पर केंद्रित रही, लेकिन अब इसे धार्मिक मुद्दों से जोड़ना होगा. मान की विनम्र प्रतिक्रिया एक स्मार्ट कदम है, जो दिखाता है कि पार्टी धार्मिक संस्थानों का सम्मान करती है. 

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 पार्टी इसे राजनीतिक साजिश बताकर विपक्ष पर पलटवार कर सकती है, जैसा कि मान ने SGPC पर आरोप लगाया कि वे अकाल तख्त को ढाल बना रहे हैं. यह घटना AAP को राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि अरविंद केजरीवाल की पार्टी पंजाब को अपनी सफलता का मॉडल मानती है. अगर मान को दंड मिला, तो यह AAP की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, लेकिन अगर वे इसे कुशलता से संभालें, तो यह समर्पित सिख वाली इमेज को मजबूत कर सकता है.

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