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जेल की ड्यूटी करते-करते कैदी से हुआ महिला अफसर को इश्क, शादी तक पहुंची दोनों की लव स्टोरी

जेल अफसर फिरोजा खातून और उम्रकैद की सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह की अनोखी प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बन गई है. सतना सेंट्रल जेल में मुलाकात के बाद दोनों करीब आए और धर्मेंद्र की रिहाई के चार साल बाद शादी कर ली. हत्या के मामले में सजा काट चुके धर्मेंद्र को अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किया गया था.

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जेल अधिकारी फिरोजा खातून और सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह की शादी की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है (Photo: ITG)
जेल अधिकारी फिरोजा खातून और सजा काट चुके धर्मेंद्र सिंह की शादी की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है (Photo: ITG)

जेल… जहां लोग अपने किए की सजा काटते हैं. जहां हर सुबह गिनती से शुरू होती है और हर रात भारी सन्नाटे में खत्म. लेकिन मध्य प्रदेश के सतना की सेंट्रल जेल में एक ऐसी कहानी जन्म ले रही थी, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है. एक तरफ हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी धर्मेंद्र सिंह और दूसरी तरफ उसी जेल की महिला अफसर फिरोजा खातून. दोनों की दुनिया बिल्कुल अलग थी, लेकिन वक्त के साथ दोनों के बीच ऐसा रिश्ता बना जिसने धर्म, समाज और जेल की ऊंची दीवारों तक को पीछे छोड़ दिया. अब यह प्रेम कहानी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है.

इस कहानी का दूसरा किरदार है धर्मेंद्र सिंह. छतरपुर जिले के चंदला इलाके का रहने वाला धर्मेंद्र साल 2007 में एक पार्षद की हत्या और शव दफनाने के मामले में गिरफ्तार हुआ था. अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई और फिर उसकी जिंदगी जेल की चारदीवारी में कैद होकर रह गई. शुरुआती साल मुश्किलों में बीते. लेकिन वक्त के साथ धर्मेंद्र का व्यवहार बदलने लगा. जेल प्रशासन के मुताबिक वह अनुशासित रहने लगा था. अच्छे आचरण की वजह से उसे जेल के अंदर कुछ जिम्मेदारियां भी दी गईं. वह वारंट से जुड़े कामों में अधिकारियों की मदद करता था. यहीं से उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी शायद उसने भी कल्पना नहीं की थी.

जेल अफसर से हुई पहली मुलाकात

फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के तौर पर तैनात थीं. सख्त अनुशासन और जिम्मेदार कार्यशैली के लिए उन्हें जाना जाता था. वारंट से जुड़े कामों के दौरान धर्मेंद्र और फिरोजा की मुलाकातें बढ़ने लगीं. शुरुआत में रिश्ता केवल अधिकारी और कैदी तक सीमित था. लेकिन धीरे-धीरे बातचीत बढ़ती गई. बताया जाता है कि फिरोजा ने धर्मेंद्र के भीतर उस इंसान को देखा, जो अपने अतीत से निकलकर नई जिंदगी शुरू करना चाहता था. वहीं धर्मेंद्र को पहली बार महसूस हुआ कि कोई उसे अपराधी नहीं, बल्कि इंसान की तरह समझ रहा है.

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जेल की दीवारों के बीच पनपता रहा रिश्ता

जेल के भीतर हर किसी की नजरें होती हैं. वहां कोई रिश्ता आसानी से छिप नहीं सकता. लेकिन दोनों ने हमेशा अपने रिश्ते को बेहद निजी रखा. सूत्र बताते हैं कि दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला लगातार बढ़ता गया. धीरे-धीरे दोस्ती भरोसे में बदली और फिर यह रिश्ता प्यार तक पहुंच गया. जेल के कई कर्मचारियों को इस बढ़ती नजदीकी का अंदाजा था, लेकिन किसी ने शायद यह नहीं सोचा था कि यह रिश्ता एक दिन शादी तक पहुंच जाएगा.

14 साल बाद जेल से बाहर आया धर्मेंद्र

करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद धर्मेंद्र सिंह को अच्छे आचरण के आधार पर रिहा कर दिया गया. जेल से बाहर निकलते वक्त शायद उसके मन में भी यह सवाल रहा होगा कि क्या जेल की सलाखों के बीच शुरू हुआ रिश्ता बाहर की दुनिया में टिक पाएगा? लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जेल से रिहा होने के बाद भी दोनों लगातार संपर्क में रहे. वक्त बीतता गया, लेकिन दोनों का रिश्ता कमजोर नहीं पड़ा. करीब चार साल बाद दोनों ने फैसला लिया कि अब इस रिश्ते को एक नाम दिया जाए.

समाज से बचने के लिए बदला नाम

इस शादी की सबसे रोचक बात यह रही कि धर्मेंद्र ने शादी के कार्ड में अपना नाम बदलवा दिया. बताया जा रहा है कि वह नहीं चाहता था कि शादी से पहले लोगों को उसकी असली पहचान का पता चले. 5 मई को लवकुश नगर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए. जब लोगों को पता चला कि दूल्हा वही शख्स है जो कभी हत्या के मामले में उम्रकैद काट चुका है और दुल्हन जेल विभाग की अधिकारी हैं, तो यह खबर आग की तरह फैल गई. यह शादी केवल एक प्रेम कहानी नहीं रही. इसमें धर्म और समाज की बहस भी जुड़ गई. बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था. परिवार के लोगों ने शादी में हिस्सा नहीं लिया. लेकिन फिरोजा अपने फैसले पर अडिग रहीं. शादी में सबसे भावुक पल तब आया, जब विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने फिरोजा का कन्यादान किया. उन्होंने फिरोजा को अपनी बेटी मानते हुए यह रस्म निभाई. इस दौरान बजरंग दल से जुड़े लोग भी मौजूद रहे. यही वजह है कि यह शादी अब केवल एक निजी रिश्ता नहीं, बल्कि सामाजिक चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है.

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सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी

जैसे ही यह कहानी सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कोई इसे रीयल लाइफ जेल लव स्टोरी बता रहा है तो कोई इसे इंसान के बदलने की मिसाल कह रहा है. कई लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर कोई व्यक्ति अपनी गलती के बाद बदल जाता है, तो उसे जिंदगी में दूसरा मौका मिलना चाहिए. वहीं कुछ लोग इस रिश्ते को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच फिरोजा और धर्मेंद्र ने साफ कर दिया है कि उन्होंने यह फैसला पूरी समझदारी और अपनी मर्जी से लिया है.

जेल के अंदर भी थी चर्चा

बताया जाता है कि सतना सेंट्रल जेल में यह रिश्ता लंबे समय से चर्चा में था. हालांकि दोनों ने कभी खुलकर अपने रिश्ते को स्वीकार नहीं किया. धर्मेंद्र का व्यवहार जेल प्रशासन के लिए हमेशा चर्चा का विषय रहा. जेल अधिकारियों का कहना है कि उसने अनुशासन का पालन किया और अपने व्यवहार में काफी बदलाव दिखाया. यही कारण रहा कि उसे अच्छे आचरण का लाभ मिला. आज धर्मेंद्र और फिरोजा पति-पत्नी हैं. दोनों ने समाज की तमाम बंदिशों को पीछे छोड़ते हुए अपने रिश्ते को मंजिल दी. यह कहानी इसलिए भी खास बन गई क्योंकि इसमें अपराध, जेल, धर्म, समाज और प्यार सब एक साथ दिखाई देते हैं. सतना की यह अनोखी प्रेम कहानी अब दूर-दूर तक सुर्खियां बटोर रही है. लोग हैरान भी हैं और भावुक भी. क्योंकि जेल की ऊंची दीवारों के पीछे शुरू हुई यह मोहब्बत आखिरकार सात फेरों तक पहुंच ही गई.

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