scorecardresearch
 

'किले से रिहायशी इलाके की ओर दागी तोप...', ईरान के समर्थन में लगाए भड़काऊ नारे, रायसेन के वीडियो पर बड़ा बवाल

MP के रायसेन जिले में ऐतिहासिक किले की प्राचीर से तोप चलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है. ईरान-इजरायल युद्ध के तनावपूर्ण माहौल के बीच इस वीडियो को जिस कैप्शन और नारों के साथ पोस्ट किया गया, उसने सुरक्षा और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है.

Advertisement
X
MP के रायसेन किले की प्राचीर से देसी तोप चलाने का दृश्य.(Photo:Screengrab)
MP के रायसेन किले की प्राचीर से देसी तोप चलाने का दृश्य.(Photo:Screengrab)

मध्य प्रदेश के रायसेन किले का एक बेहद संवेदनशील वीडियो वायरल हुआ है. वीडियो में 4 युवक किले की प्राचीर पर खड़े होकर 'अल्लाह-हू-अकबर' के नारे लगा रहे हैं और माचिस से एक देसी तोप में आग लगाते दिख रहे हैं. तोप चलते ही पूरा इलाका धुएं से भर जाता है.

यह वीडियो 'दानिश स्टार' नाम की सोशल मीडिया आईडी से पोस्ट किया गया है. वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, "भारत के मुसलमान न कल डरे थे, न आज डरेंगे." साथ ही इसमें ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का संदर्भ देते हुए ईरान का साथ देने की बात कही गई है.  

प्रियंक कानूनगो का तीखा हमला
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस वीडियो पर कड़ी नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर लिखा, "मध्य प्रदेश के रायसेन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित किले से रिहायशी बस्ती के ऊपर देसी अवैध तोप चलाई गई है. लफंगों के खिलाफ गैर-कानूनी हथियार बनाने, गोला बारूद चलाने और दहशत फैलाने के लिए केस दर्ज होना चाहिए. एएसआई और स्थानीय प्रशासन हिंदुओं को महादेव मंदिर जाने से रोकने में ऊर्जा लगाते हैं, लेकिन ऐसी हरकतों पर चुप हैं." देखें VIDEO:- 

Advertisement

उन्होंने आगे चेतावनी दी कि वे इस मामले में अधिकारियों को नोटिस भेज रहे हैं और उन्हें कर्तव्य पालन न करने का हिसाब देना होगा.

प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी
वीडियो वायरल होने के बाद रायसेन का प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है. तहसीलदार भरत मांडरे ने पुष्टि की है कि वीडियो की जानकारी मिली है और पुलिस को सूचित कर दिया गया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह वीडियो कब का है और इसे पोस्ट करने वाले युवाओं का उद्देश्य क्या था.

हालांकि, स्थानीय सूत्रों का कहना है कि रायसेन में रमजान के दौरान रोजा खोलने (इफ्तार) की सूचना देने के लिए तोप चलाने की पुरानी परंपरा है, लेकिन इसे जिस तरह से पेश किया गया, उसने विवाद खड़ा कर दिया है. 

यह भी पढ़ें: 305 साल से तोप की गूंज पर खुलता है यहां रोजा, मस्जिद से लाल बल्ब जलाकर दिया जाता है सिग्नल

किले जैसी संरक्षित धरोहर पर बारूद का इस्तेमाल करना कानूनन अपराध है. ऐसे में 'परंपरा' के नाम पर कानून और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement