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MP: ग्वालियर में लैंडिंग, चिनूक हेलिकॉप्टर से उड़ान, चीता रिटर्न्स की देखें ताजा तस्वीरें

नामीबिया से लाए गए चीते ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं. अब चीतों को विशेष हेलिकॉप्टरों को जरिए श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क ले जाया जाएगा. नामीबिया से पांच मादा चीते और तीन नर चीते लाए गए हैं. पीएम मोदी के मंच के लिए इन चीतों के पिजरों के रखा जाएगा जिन्हें पीएम मोदी कूनों में छोड़ेंगे.

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ग्वालियर लाए गए चीते चिनूक से कूनो के लिए रवाना.
ग्वालियर लाए गए चीते चिनूक से कूनो के लिए रवाना.

नामीबिया (Namibia) से लाए गए 8 चीते शनिवार सुबह विशेष विमान TVR4724 बोइंग-747 से मध्य प्रदेश के ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचे. चीतों की ग्वालियर एयरपोर्ट पर पहुंचने की लेटेस्ट तस्वीरें और वीडियो सामने आई हैं. अब उन आठ चीतों को दो विशेष हेलिकॉप्टर के जरिए श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क ले जाया गया. इस दौरान उनकी देखरेख कर रही स्पेशल टीम भी साथ ही मौजूद रहेगी. बता दें कि नामीबिया से 5 फीमेल और 3 मेल चीते लाए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने जन्मदिन पर आज सुबह करीब 10:45 बजे कूनो नेशनल पार्क  में चीतों को रहने के लिए मुक्त करेंगे. 

मध्य प्रदेश के प्रमुख मुख्य संरक्षक वन (वन्यजीव) जे एस चौहान का कहना है कि कागजी कार्रवाई और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चीतों को दो हेलीकॉप्टरों, एक चिनूक और एक एमआई श्रेणी के हेलिकॉप्टर से ग्वालियर से लगभग 165 किलोमीटर दूर पालपुर गांव भेजा जाएगा. विमान से निकाले गए चीते, देखें Video:-

तारफेंसिंग कर तैयार किया गया बाड़ा

चीतों को प्रीडेटर प्रूफ फेंस वाले बाड़ों में छोड़ा जाएगा. यानी ऐसे खुले हुए बाड़े जिनमें कोई ऐसा जंगली जानवर न आए जो चीतों के लिए खतरनाक हो. फिलहाल 6 वर्ग किलोमीटर के इलाके को सात अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है. जो पूरी तरह से सुरक्षित है. चारों तरफ फेंसिंग की गई है. ये हिस्से 0.7 वर्ग मीटर से लेकर 1.1 वर्ग किलोमीटर आकार के हैं. सभी आपस में जुड़े हुए हैं.

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नर और मादा चीतों को अलग-अलग बाड़ों में रखा जाएगा. लेकिन उनपर लगातार नजर रखी जाएगी. ताकि चीते आसपास के वातावरण को समझ सकें. शिकार खोज सकें. उन्हें खुले जंगल में छोड़ने से पहले भारतीय जानवरों का शिकार करने की आदत हो जाए.

750 वर्ग किलोमीटर में फैला है कूनो

कूनो नेशनल पार्क भारत के मध्य प्रदेश में स्थित एक नेशनल पार्क है. साल 1981 में इसका निर्माण किया गया था. यह नेशनल पार्क 750 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. वाइल्ड लाइफ लवर्स के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है. यहां पर घास के विशाल मैदान हैं जो कान्हा या बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भी बड़े हैं. साल 2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान यानी नेशनल पार्क का दर्जा दिया गया था.

चिनूक के जरिए ग्वालियर एयरपोर्ट से कूना ले जाए गए चीते.

PM मिलेंगे 'चीता मित्र' से

नेशनल पार्क के आसपास रहने वाले लोग चीतों से डरकर उन्हें नुकसान न पहुंचाएं, इसके लिए सरकार ने 'चीता मित्र' भी बनाए हैं. अपने कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी इन चीता मित्रों से मुलाकात करेंगे. सरकार ने कुल 90 गांवों के 457 लोगों को चीता मित्र बनाया है. इनमें सबसे बड़ा नाम रमेश सिकरवार का है, जो कि पहले डकैत थे और अब उन्होंने चीतों की रक्षा करने की कसम खाई है.

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चीतों को लेकर याचिका दायर

चीतों के कूनो पालपुर अभ्यारण में लाए जाने पर पालपुर पूर्व राजघराने ने एक याचिका दायर की है. जिस पर 19 सितंबर को कोर्ट में सुनवाई होनी है. राज परिवार की तरफ से दायर याचिका में कूनो नेशनल पार्क के अंदर प्रशासन द्वारा अधिग्रहित राज परिवार के किले और जमीन पर कब्जा वापस करने की मांग की गई है.

पालपुर राजघराने का दावा है कि उन्होंने अपना किला और जमीन शेरों के लिए दी थी, न कि चीतों के लिए. शेर आते तो जंगल बचता, लेकिन अब चीतों के लिए मैदान बनाए जा रहे हैं और पेड़ काटे जा रहे हैं. राज परिवार की तरफ से कहा गया है कि जब कूनो को गिर शेरों को लाने के लिए अभयारण्य घोषित किया गया तो उन्हें अपना किला और 260 बीघा भूमि खाली करनी पड़ी. पालपुर राजघराने के वंशजों ने अपनी पुश्तैनी संपत्ति वापस पाने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

 

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