
मध्यप्रदेश पर्यटन निगम के बहुप्रचारित हनुवंतिया आईलेंड में आकर्षण का केंद्र यहां का क्रूज़ लापरवाहियों के थपेड़े खाकर किनारे पर ही डूब गया. इसके अलावा एक निजी हॉउस बोट भी तेज लहरों के थपेड़ो में डूबी है. यह दुर्घटना यहां के जलमहोत्सव के दो महीने पहले ही घटी है, जिसका असर यहां की पर्यटन की संभावनाओं पर भी पड़ेगा. अब तक नर्मदा के बेकवाटर में डूबे इस क्रूज़ को स्थानीय स्तर पर निकालने के प्रयास विफल रहे है, जिसके लिए अब विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है. यहां इसके तीन वर्ष पूर्व भी पर्यटन निगम की करोड़ों की हॉउस बोट इसी तरह किनारे पर डूबी थी. यह डूबने का सिलसिला बदस्तूर जारी है.
दरअसल, खण्डवा जिले में नर्मदा के बैकवॉटर में हनुवंतिया को वॉटर स्पोर्ट्स के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन निगम ने विकसित किया है. यहां आकर्षण के प्रमुख केंद्र एकमात्र 86 सीटर क्रूज़ रविवार 24 सितम्बर को नर्मदा की तेज़ लहरों के कारण किनारे पर ही डूब गया.
समुद्र की तरह भीषण लहरें उठती हैं: मैनेजर
मैनेजर सुभाष अग्रवाल ने बताया कि बैकवॉटर में जब तेज हवाएं चलती हैं तो समुद्र की तरह भीषण लहरें उठती हैं. इन्ही लहरों और तेज बारिश के चलते इस क्रूज़ में पहले पानी भरा और फिर पलट गया. इसे निकालने के स्थानीय तौर पर प्रयास भी किए गए, लेकिन क्रूज़ में इतना पानी भर चुका था कि इसे सीधा कर पाना संभव नहीं हुआ। इसके लिए हैदराबाद की एक टेक्निकल टीम को भी बुलाया गया जो इसे देखकर गई है, लेकिन अभी यथास्थिति बनी हुई है.

हुई थी सीएम शिवराज की कैबिनेट बैठक
यह करीब दो करोड़ रुपयों की लागत से बना क्रूज़ था, जिस पर कभी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी कैबिनेट की विशेष बैठक भी ले चुके हैं. इस बैठक का उद्देश्य हनुवंतिया को देश और दुनिया के पर्यटन के नक़्शे पर नई पहचान देना ही था. इसके बाद यहां शिवराज सरकार प्रतिवर्ष जल महोत्सव का आयोजन करती रही, जिसका व्यापक प्रचार -प्रसार भी किया गया.
दो महीने का पर्यटक स्थल बना हनुवंतिया
नतीजतन यहां सिर्फ जल महोत्सव के दौरान वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद लेने थोड़े बहुत पर्यटक आते, लेकिन बाकि वर्षभर सन्नाटा ही रहता है. गर्मी में यहां का जलस्तर कम होने से बैकवॉटर का पानी बदबू मारने लगता है. जलस्तर इतना कम हो जाता कि क्रूज़ या बोट चलाना संभव नहीं होता है.
गर्मी के दौरान यहां पर पर्यटक नहीं आते हैं और बारिश में तो यह पूरी तरह बंद ही रहता है. तेज हवाएं हमेशा यहां पर दुर्घटना का अंदेशा बनाए रखती है. इसलिए यह मात्र दो माह के पर्यटन पर सीमित रह गया है. पर्यटन निगम के लिए यह घाटे का सौदा होने से यहां मेंटेनेंस के लिए भी पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं है.
बरसात के पानी और लहरों ने डुबोया
सामान्य तौर पर इस वर्षाकाल में ओम्कारेश्वर में भी नाविक अपनी नावें पानी से निकालकर सुरक्षित रख लेते हैं, वैसे यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है. इस क्रूज़ को जेटी के पास रस्सों से बांध कर रखा गया था. इसमें बरसात का भी पानी भरता गया और रही सही कसर नर्मदा की लहरों ने इसमें पानी भरकर पूरी कर दी. इस तरह पानी भरने से ही यह डूबा अन्यथा इसके डूबने का कोई दूसरा कारण ही नहीं था और यही बात हुनवंतिया टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के मैनेजर सुभाष अग्रवाल भी स्वीकार कर रहे हैं.