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कॉलेज छात्रा संग सैर सपाटे पर निकला 108 एंबुलेंस ड्राइवर, रोका तो कहने लगा- बहन है... चली गई नौकरी

सड़क पर तेज रफ्तार से एक 108 एंबुलेंस दौड़ रही थी. सायरन बज रहा था. लोग रास्ता छोड़ते जा रहे थे, क्योंकि सभी को लग रहा था कि अंदर कोई गंभीर मरीज होगा, जिसकी जिंदगी हर सेकंड पर टिकी है. लेकिन जब लोगों ने उस एंबुलेंस को रोका, तो अंदर का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया. अंदर एक युवती थी. ड्राइवर साहब उसके साथ घूम रहे थे.

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सीएमएचओ ने एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों से मांगा जवाब. (Photo: Representational)
सीएमएचओ ने एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों से मांगा जवाब. (Photo: Representational)

मध्य प्रदेश के छतरपुर में 108 इमरजेंसी एंबुलेंस का एक ड्राइवर युवती लेकर घूमने निकल पड़ा. वह सायरन बजाते हुए जा रहा था. लोगों की नजर पड़ी तो वीडियो बना लिया. वीडियो वायरल हुआ तो 108 इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा चलाने वाली कंपनी ने ड्राइवर को नौकरी से निकाल दिया. अधिकारियों ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं.

एजेंसी के अनुसार, मामला मंगलवार देर शाम का है. स्थानीय लोगों ने देखा कि एक एंबुलेंस तेज रफ्तार से सड़क पर दौड़ रही है. सायरन लगातार बज रहा था, लेकिन वाहन की गतिविधियां कुछ लोगों को संदिग्ध लगीं. लोगों ने एंबुलेंस का पीछा किया और आखिरकार उसे रोक लिया.

जब दरवाजा खुला, तो अंदर कोई मरीज नहीं था. स्ट्रेचर खाली था, ऑक्सीजन सिलेंडर अपनी जगह पर रखा था, लेकिन वहां एक युवती मौजूद थी. यह देखकर मौके पर मौजूद लोग चौंक गए. सवाल उठने लगे कि आखिर इमरजेंसी सेवा के लिए बनी एंबुलेंस में यह सब क्या हो रहा है?

लोगों ने ड्राइवर से पूछताछ शुरू की. पहले तो उसने मामले को संभालने की कोशिश की. उसने दावा किया कि युवती उसकी बहन है. लेकिन जब लोगों ने उसका नाम पूछा, तो वह जवाब नहीं दे सका. बस, यहीं उसकी कहानी धराशायी हो गई.

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मौके पर मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. लोग ड्राइवर से सवाल कर रहे थे और वह गोलमोल जवाब देने की कोशिश कर रहा था.

वीडियो वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आ गया. 108 एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी ने तत्काल प्रभाव से ड्राइवर भगत सिंह यादव को नौकरी से हटा दिया. वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरपी गुप्ता ने एंबुलेंस सेवा संचालकों से जवाब मांगा है. अधिकारियों का कहना है कि इमरजेंसी सेवाओं का इस तरह दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

108 एंबुलेंस सेवा आम लोगों के लिए जीवन रक्षक मानी जाती है. सड़क पर सायरन बजते ही लोग बिना देर किए रास्ता दे देते हैं, ताकि मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके. लेकिन जब इसी सेवा का निजी इस्तेमाल होने लगे, तो सवाल उठना लाजिमी है. फिलहाल ड्राइवर की नौकरी जा चुकी है और जांच जारी है. सायरन की आवाज सिर्फ इमरजेंसी के लिए होती है, निजी सैर-सपाटे के लिए नहीं.

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