हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मामले में जांच अब तकनीक के नए स्तर पर पहुंच गई है. सीबीआई ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह के घर की हाईटेक मशीनों से जांच शुरू कर दी है. एजेंसी Faro Focus नाम की हाई-स्पीड 3D लेजर स्कैनर मशीन का उपयोग कर रही है, जिससे पूरे घर और उसके आसपास का डिजिटल नक्शा तैयार किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार यह मशीन घटनास्थल को पूरी तरह से डिजिटल रूप में स्कैन करती है और एक सटीक 3D मॉडल तैयार करती है. इससे जांच एजेंसियों को यह समझने में मदद मिलती है कि घटना के समय स्थिति कैसी थी और किन-किन जगहों पर गतिविधियां हुई थीं. सीबीआई इस तकनीक के जरिए पूरे क्राइम सीन का पुनर्निर्माण कर रही है.
सीबीआई ने सिर्फ घर की मैपिंग ही नहीं की है, बल्कि अंदर और आसपास के क्षेत्र में क्राइम सीन री-क्रिएशन भी किया है. इसका उद्देश्य घटनाक्रम को वैज्ञानिक तरीके से समझना और सबूतों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है. इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच सीबीआई कर रही है. एजेंसी ने हाईकोर्ट को बताया है कि उसे आरोपी सास गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता है. इसी आधार पर जांच एजेंसी ने उनकी जमानत रद्द करने की भी मांग की है.
CBI ने गिरिबाला के घर की हाईटेक जांच शुरू की
इधर राज्य सरकार ने भी हाईकोर्ट में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और चोटों को लेकर अहम जानकारी पेश की है. सरकारी वकील ने बताया कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कलाई, कोहनी और सिर समेत कई जगह चोटों के निशान मिले थे. कोर्ट ने इस पर सवाल किया कि क्या ये चोटें मौत से पहले लगी थीं. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार कुछ चोटें एंटी-मॉर्टम यानी मौत से पहले की थीं. सरकार ने कहा कि ये चोटें न तो मौत के बाद लग सकती थीं और न ही शव को नीचे उतारते समय बनी थीं. संभावना है कि ये चोटें किसी हाथापाई या संघर्ष के दौरान लगी होंगी.
सरकार ने अदालत में ट्विशा शर्मा की बहन का बयान भी पढ़कर सुनाया. बयान के अनुसार, ट्विशा की सास ने उसे घर बुलाकर 2 लाख रुपये की मांग की थी. साथ ही यह भी कहा गया कि शादी में खर्च की गई रकम पर्याप्त नहीं थी. इस मामले में दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) के तहत और दहेज निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है. इस एफआईआर में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है.
हाईकोर्ट में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और चोटों पर अहम खुलासा
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि ट्विशा को फंदे से लटकने के 20 मिनट के भीतर ही AIIMS भोपाल पहुंचाया गया था. वकील ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने 13 मई से ही पूरे परिसर को सील कर दिया था. बचाव पक्ष ने कहा कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग किया था और उन्होंने जब्ती मेमो पर हस्ताक्षर भी किए थे. वहीं राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि दो नोटिस मिलने के बावजूद उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया और पुलिस के पहुंचने पर वह घर पर मौजूद नहीं थीं. फिलहाल अदालत में मामले की सुनवाई जारी है और सीबीआई की हाईटेक जांच ने केस को और तकनीकी व वैज्ञानिक दिशा में मोड़ दिया है.