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साहित्य 2021: किताबों की मांग और पुनर्मुद्रण, नई हिंदी की गति

प्रकाशकों ने कोरोना, जीएसटी और प्रसार संबंधी मुश्किलों और मौजूदा संकट को देखते हुए वही पुस्तकें पुन: छापी हैं जिनकी मांग आज भी है या जिनके पुनर्मुद्रित संस्करण के निकल जाने की आशा है. हिंदी के बाजार पर साहित्य आजतक की एक नजर

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साल 2021 में फिर से छपी इन किताबों से समृद्ध हुआ साहित्य जगत साल 2021 में फिर से छपी इन किताबों से समृद्ध हुआ साहित्य जगत

कोरोना के विश्वव्यापी प्रभाव ने न केवल मनुष्य की चहुतरफा गति-प्रगति का चक्का बाधित किया बल्कि इसका प्रभाव साहित्य पर भी पड़ा है. नई पुस्तकों के प्रकाशन के साथ पुनर्मुद्रण पर भी इसका खासा असर पड़ा है. भारतीय भाषाओं के प्रकाशक भारतीय ज्ञानपीठ सहित अनेक प्रकाशकों के यहां उतनी संख्या में पुस्तकों के पुनर्प्रकाशन नहीं हुए जितनी संख्या में सामान्यत: हर साल पुस्तुकें पुनर्मुद्रण में आती रही हैं. अनेक डिलीवरी चैनलों और प्रकाशकों के कोरोनोपरांत सक्रिय होने की दशा में भी प्रकाशन की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है जिसकी वजह कागज की कीमत तथा उस पर जीएसटी की दर का बढ़ना भी है. लिहाजा अनेक प्रकाशकों ने मौजूदा संकट को देखते हुए वही पुस्तकें पुन: छापी हैं जिनकी मांग आज भी है या जिनके पुनर्मुद्रित संस्करण के निकल जाने की आशा है. इस संबंध में अनेक प्रकाशनगृहों का जायजा लिया गया. तथापि, नई हिंदी वाले लेखक बाजार पर छाये रहे जिनमें से कइयों के नए संस्करण प्रकाशित हुए हैं.  

वाणी प्रकाशन के यहां से पाठकों की मांग और पुस्तकों की लोकप्रियता की दृष्टि से निम्न पुस्तकें पुन:प्रकाशित हुई हैं. यहां से कई आत्मकथाओं के नए संस्क‍रण आए हैं. मोहनदास नैमिषराय की आत्मकथा 'अपने अपने पिंजरे', लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी की आत्मकथा 'मैं हिजड़ा मैं लक्ष्मी', 'दिलीप कुमार: वजूद और परछाईं' पुन: प्रकाशित हुईं तो जॉन एलिया, मनोज मुतशिर, बशीर बद्र व वसीम बरेलवी के संग्रहों के नए संस्करण आए. उपन्यासों में नागार्जुन, गोविंद मिश्र, ममता कालिया, शिवप्रसाद सिंह, विनोद कुमार शुक्ल, नरेंद्र कोहली, निर्मल वर्मा, मनोहरश्याम जोशी, प्रेमचंद आदि के उपन्यासों की मांग बनी रही और इनके उपन्यासों के नए संस्करण प्रकाशित हुए हैं. कम पढ़ी जाने वाली कविता विधा में भी अरुण कमल की 'सबूत', विनोद कुमार शुक्ल की 'अतिरिक्त नहीं', धूमिल की 'कल सुनना मुझे' व उदय प्रकाश की काव्य कृति 'सुनो कारीगर' के नए संस्करण प्रकाशित हुए हैं. कथेतर पुस्तकों में वरिष्ठ पत्रकार और 'अमेठी संग्राम' से चर्चित अनंत विजय की राजनीतिक विमर्श की पुस्तक 'मार्क्सवाद का अर्धसत्य' का इस साल दूसरा संस्करण तो छप कर आया ही, इस पुस्तक का पेपरबैक संस्करण भी प्रकाशित हुआ है.

राजपाल एंड संस जो हरिवंश राय बच्चन, रांगेय राघव व अमृत लाल नागर आदि की पुस्तकों के प्रकाशक हैं के यहां से लोकप्रिय साहित्यिक लेखकों की पुस्तकों के नए संस्करण आते रहते हैं, इस साल भी अनेक के नए संस्करण छपे हैं. हालांकि बाजार की स्थिति व पाठकों की मांग को देखते हुए राजपाल ने इस साल नई पुस्तकें भी सीमित संख्या में छापी हैं तथापि हिंदी पुस्तकों का यह नामचीन प्रकाशन अभी भी जैसे वेट एंड वाच की स्थिति में है. 2022 में नई पुस्तकों की आमद से ही यह पता चल सकेगा कि इस प्रकाशन ने क्या कुछ नया किया है.

नई वाली हिंदी मुहिम से जुड़ा हिंदयुग्म प्रकाशन नए लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन में अग्रणी रहा है. प्रबंधन से जुड़े और गैर पेशेवर लेखकों की कृतियों के प्रकाशन में जोखिम उठाने वाले इस प्रकाशन ने इस साल काफी नई पुस्तकें छापी हैं और अनेक पुस्तकों का पुनर्मुद्रण किया है. प्राय: आनलाइन विक्रय के प्लेतटफार्म पर हिंदयुग्म की रणनीति के फायदे भी उसे मिले हैं तथा कुछ ही सालों में इसने पुस्तक प्रकाशन को मिशन से अंतरित कर मुनाफा हासिल करने वाले व्यावसायिक प्लेटफार्म में बदल दिया है. साल 2021 में यहां से कई पुस्तकें पुन: प्रकाशित हुई हैं. नीलोत्पल मृणाल की आईएएस एस्पिरेंट्स पर लिखी 'डार्क हार्स' उपन्यासिका का 20वां संस्कररण आया तो सत्य‍ व्यास के 'बनारस टाकीज' का 17वां संस्करण, मसाला चाय का 14वां संस्करण छपा है तो निखिल सचान के 'नमक स्वादानुसार' का भी 11वां संस्करण. नीलोत्पल मृणाल की एक अन्य औपन्यसिक कृति 'औघड़' का पांचवा संस्‍करण आ चुका है तो दिव्यप्रकाश दुबे के उपन्यास 'शर्ते लागू' का नवां संस्करण आ चुका है व जान एलिया पर केंद्रित पुस्तक का चौथा संस्करण बाजार में है. इसके साथ ऐसी कई पुस्तकें हैं जिनके तीसरे चौथे संस्करण इसी साल आए हैं जैसे 'अक्तूबर जंक्शन', 'मुसाफिर कैफे', 'इब्ने बतूती', 'दिल्ली दरबार', 'चौरासी' आदि. कहानियों में मानव कौल के संग्रह 'ठीक तुम्हारे पीछे' का 11वां संस्करण बाजार में है तो 'प्रेम कबूतर' का दूसरा संस्करण और 'तुम्हारे बारे में' का तीसरा संस्करण आ चुका है. यहीं से प्रेरणापरक पुस्तकों की श्रेणी में निशांत जैन की पुस्‍तक 'रुक जाना नहीं' का सातवां संस्करण अभी हाल ही में आया है. इसी के साथ अनुसिंह चौधरी की 'ममा की डायरी' व सुशोभित की वैचारिक पुस्तक 'गांधी की सुंदरता' के नए संस्करण भी आ चुके हैं.

शिवना प्रकाशन से इस साल आये रिप्रिंट्स में कथाकार पंकज सुबीर के उपन्यास 'अकाल में उत्सव' का ग्यारहवां संस्करण आया है तो उन्हीं  के एक अन्य उपन्यास 'जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था' 2021 में सातवां संस्करण आया है. कथाकार हरि भटनागर के उपन्यास 'एक थी मैना एक था कुम्हार' का इस साल द्वितीय संस्करण आ चुका है. नई किताब ने इस साल पाथेर पांचाली का पुनर्प्रकाशन किया है तो विस्मृत रचनाकार शिवरानी देवी पर क्षमाशंकर पांडेय की पुस्तक का भी. यहां से आचार्य चतुरसेन के उपन्यास 'गोली', 'धर्मपुत्र', 'सोना और खून', 'सोने की पत्नी', 'चिट्ठी की दोस्ती', 'रूठी रानी', 'मंदिर का रखवाला' तथा रवींद्रनाथ टैगोर की 'चोखेर बाली' व 'नाव दुर्घटना' के नए संस्करण यहां से छपे हैं. कुछ ही सालों से प्रकाशन की दुनिया में सक्रिय वाग्देवी प्रकाशन ने साल 2021 में कई पुस्तकें पुन: प्रकाशित की हैं. सेतु द्वारा अधिग्रहीत वाग्देवी प्रकाशन से कृष्णनाथ की यायावरी की कई पुस्तकों- 'लद्दाख में राग विराग', 'स्पीति में बारिश' व 'किन्नर धर्मलोक' के नए संस्करण प्रकाशित किए हैं तो सुशोभित की रम्य रचनाओं की कृति 'कल्पतरु' का भी नया संस्करण छप कर आ गया है. यहां से नवलकिशोर व्यास की 'सिनेमागोई', मालचंद तिवाडी की 'ज़ेन कहानियां', मुंशी प्रेमचंद की 'शतरंज के खिलाड़ी', नंदकिशोर आचार्य संपादित 'दीवाने मीर' व एमएन राय की हमारा सांस्कृतिक दर्प के नए संस्करण छापे गए हैं.

किताबघर प्रकाशन से अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं की पुस्तक 'मेरी इक्यावन कविताएं' के कितने ही संस्कंरण छप चुके हैं और आज भी इस पुस्तक की काफी मांग है. इसके अलावा विष्णु  प्रभाकर के उपन्यास 'अर्धनारीश्वर', नरेंद्र कोहली के यहां से प्रकाशित 'तोड़ो कारा तोड़ो' के सभी खंडों के इस साल पुनर्प्रकाशन हुए हैं. रामविलास शर्मा की 'भाषा साहित्य और जातीयता' का नया संस्करण आया है तो ममता कालिया के तीन लघु उपन्यास, खुशवंत सिंह की पुस्तक 'दिल्ली', लक्ष्मीशंकर वाजपेयी की ग़ज़ल कृति 'खुशबू तो बचा ली जाए' के रिप्रिंट संस्करण भी इस साल आए हैं. हिंदी और भारतीय भाषाओं के अग्रणी प्रकाशक भारतीय ज्ञानपीठ ने संकट में रहते हुए भी कुछ पुस्तकों का प्रकाशन और पुनर्मुद्रण किया है.

भारतीय साहित्य की देश की प्रतिष्ठित संस्था साहित्य अकादेमी ने इस साल कई लोकप्रिय पुस्तकों के रिप्रिंट छापे हैं जिसमें 'प्रेमचंद रचना संचयन' -संपादक: निर्मल वर्मा/विष्णु प्रभाकर, 'हिंदी कहानी संग्रह'- संपादकः भीष्म साहनी; 'रवींद्र नाथ की कहानियां' -अनुवादक: रामसिंह तोमर/कणिका तोमर, 'प्रेमचंद की चुनिंदा कहानियां' -संपादक: अमृतराय एवं 'बाबरनामा' -अनुवादक युगजीत नवलपुरी प्रमुख हैं.

राजकमल प्रकाशन समूह हिंदी में हर साल बड़ी संख्या में पुस्तकों का प्रकाशन एवं पुनर्मुद्रण करता है. राजकमल प्रकाशन से राही मासूम रजा के उपन्यास 'ओस की बूंद', गोविंद मिश्र के उपन्‍यास 'लाल पीली ज़मीन' और 'उतरती हुई धूप' के रिप्रिंट सामने आए हैं तो शानी के उपन्‍यास 'काला जल', शरद जोशी की व्यंग्य कृति 'नदी में खड़ा कवि', कृष्णचंदर के उपन्यास 'कागज की नाव' के नए संस्करण प्रकाशित हुए हैं. राधाकृष्ण प्रकाशन से मोहन राकेश की 'रात बीतने तक' तथा 'अन्‍य ध्वानि नाटक' और 'अंडे के छिलके नाटक' के नए संस्करण छापे गए हैं. लोकभारती से आचार्य चतुरसेन शास्त्री का उपन्यास 'वयम् रक्षाम:' का नया संस्करण आया है तो विष्णुकांत शास्त्री के निबंधों के चयन 'सुधियां उस चंदन के वन की' व बलवंत सिंह के उपन्यास 'रावी पार' का नया संस्करण भी इस साल आया है. अमृतराय कृत 'प्रेमचंद: कलम का सिपाही' का पेपरबैक नया संस्करण भी लोकभारती से आया है. नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत से कई पुस्तकों के रिप्रिंट आए हैं तथा कई नई पुस्तकों का प्रकाशन साल 2021 में हुआ है.

प्रकाशन की दुनिया में इन प्रकाशनों के अलावा कई छोटे बड़े -सामयिक बुक्स, शिल्‍पायन, आत्माराम एंड संस, साहित्य भंडार, यश पब्लिकेशन्स, विश्वविद्यालय प्रकाशन वाराणसी, आपस पब्लिशर्स, सर्वभाषा ट्रस्ट प्रकाशन, मंजुल प्रकाशन, सूर्य प्रकाशन मंदिर बीकानेर, संभावना प्रकाशन हापुड़ हिंदी पुस्तकों के प्रकाशन में योगदान कर रहे हैं जहां से अनेक महत्वपूर्ण कृतियों का प्रकाशन हुआ है. इसके अलावा रज़ा फाउंडेशन, जिसका मिशन हिंदी में अनुपलब्ध अच्छी और स्‍तरीय पुस्तकों का प्रकाशन भी है, द्वारा साल 2021 में अनेक प्रकाशनों के सहयोग से कई अच्छी कृतियों के दुर्लभ संस्करण प्रकाशित हुए हैं. आशा की जाती है आने वाले साल में पुस्तक प्रकाशन व्यवसाय में फिर वही गति आ सकेगी जो कोरोना काल से पहले थी.
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# डॉ ओम निश्चल हिंदी के सुधी आलोचक कवि एवं भाषाविद हैं. आपकी शब्दों से गपशप, भाषा की खादी, शब्द सक्रिय हैं, खुली हथेली और तुलसीगंध, कविता के वरिष्ठ नागरिक, कुंवर नारायण: कविता की सगुण इकाई, समकालीन हिंदी कविता: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य व कुंवर नारायण पर संपादित कृतियों 'अन्वय' एवं 'अन्विति' सहित अनेक आलोचनात्मक कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं. आप हिंदी अकादेमी के युवा कविता पुरस्कार एवं आलोचना के लिए उप्र हिंदी संस्थान के आचार्य रामचंद शुक्ल आलोचना पुरस्कार, जश्ने अदब द्वारा शाने हिंदी खिताब व कोलकाता के विचार मंच द्वारा प्रोफेसर कल्या‍णमल लोढ़ा साहित्य सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं.  संपर्कः जी-1/506 ए, उत्तम नगर, नई दिल्ली- 110059, मेल dromnishchal@gmail.com

 

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