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मैदानों में ही नहीं अदालतों में भी लड़ी गई आजादी की जंग, किताब Freedom on Trial में दर्ज है कहानी

आकाश वाजपेयी की किताब 'Freedom on Trial' भारत की आजादी की लड़ाई के उन अनदेखे पहलुओं को उजागर करती है जो अदालतों में लड़े गए मुकदमों से जुड़े हैं. महात्मा गांधी, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक जैसे क्रांतिकारियों के मुकदमों के जरिए यह किताब स्वतंत्रता संग्राम के कानूनी संघर्ष को रोचक और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है.

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बुक Freedom on Trail में आजादी के पहले 12 ऐतिहासिक मुकदमों का खास जिक्र है
बुक Freedom on Trail में आजादी के पहले 12 ऐतिहासिक मुकदमों का खास जिक्र है

अंग्रेजों के अत्याचार, गुलामी की दास्तां और क्रांति की गाथाएं... इन सभी को जब आप एक साथ सुनते-देखते और पढ़ते हैं तो आजादी की लड़ाई किसी बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शन या फिर मैदाने-ए-जंग जैसी उभरती है. असल में उस दौर की हकीकत को जब आप जानने-समझने की कोशिश करते हैं तो पता चलता है कि कहानी इतनी भर ही नहीं है. आजादी की लड़ाई एक बड़ा कानूनी मसला भी था. ये लड़ाई कोर्टरूम में भी उतने ही दांव-पेचों और पैने पैंतरों से लड़ी गई जितनी की मैदान-ए-जंग में.

भारत की आज़ादी की कहानी हम अक्सर आंदोलनों, क्रांतिकारियों और जनसंघर्षों के जरिए पढ़ते हैं, लेकिन एक सच यह भी है कि इस लड़ाई का एक बड़ा हिस्सा अदालतों में लड़ा गया था.  इसी अनदेखे पहलू को सामने लाने वाली एक बेहद रोचक और प्रभावशाली किताब है. इस किताब की भूमिका पूर्व सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने लिखी है.

आज़ादी से पहले के ऐसे ही 12 ऐतिहासिक मुकदमों को एक किस्से के शक्ल में पिरो कर सामने लाए हैं लेखक आकाश वाजपेयी. जिस माला में शब्दों के ये मोती पिरोए गए हैं उसका नाम है 'Freedom on Trial'. आजादी की संघर्ष गाथा से जुड़े ये किस्से न सिर्फ रोचक हैं बल्कि हमारे अदालती इतिहास का सच हैं, उसकी नींव भी हैं.

इस किताब में महात्मा गांधी, भगत सिंह, बाल गंगाधर तिलक, अरविंद घोष, उधम सिंह और मदन लाल ढींगरा जैसे महान सेनानियों के मुकदमों को शामिल किया गया है. साथ ही आईएनए ट्रायल्स (आजाद हिंद फौज पर हुए ट्रायल) का भी जिक्र है, जिसने पूरे देश में देशभक्ति की लहर पैदा कर दी थी. ये सभी मुकदमे सिर्फ कानूनी मामले नहीं थे, बल्कि इन्होंने देश की सोच और दिशा बदलने का काम किया.

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Freedom on Trial

किताब की सबसे खास बात यह है कि यह हमें उस दौर में ले जाती है, जब अंग्रेजों का कानून भी उनके ही हित में काम करता था. अदालतें भी कहीं न कहीं अंग्रेजी शासन का हिस्सा थीं, लेकिन इसके बावजूद हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इन मंचों को अपने विचार रखने और जनता को जागरूक करने का जरिया बना लिया. उन्होंने अदालतों को सिर्फ सजा सुनाने की जगह नहीं रहने दिया, बल्कि उसे संघर्ष और प्रेरणा का केंद्र बना दिया.

लेखक आकाश वाजपेयी किताब में एक के बाद एक कई ऐसे दिलचस्प किस्से लेकर आते हैं जो पाठकों को बांधे रखते हैं. उदाहरण दूं तो महात्मा गांधी से जुड़ा मामला जो अपने जमाने का चर्चित केस भी था. हुआ यूं कि महात्मा गांधी को जब देशद्रोह के आरोप में सजा सुनाई गई थी, तो जज ने उनके प्रति सम्मान जताते हुए सिर झुका दिया था. यह घटना दिखाती है कि गांधीजी का नैतिक प्रभाव कितना बड़ा था.

इसी तरह भगत सिंह से जुड़ा किस्सा भी ध्यान खींचता है. वे एक बार गुप्त रूप से राम प्रसाद बिस्मिल के मुकदमे की सुनवाई देखने अदालत पहुंचे थे. यह बताता है कि क्रांतिकारियों के बीच कितना गहरा जुड़ाव और सीखने की भावना थी. आईएनए ट्रायल्स का जिक्र भी किताब में बहुत असरदार तरीके से किया गया है. लाल किले में चले इन मुकदमों ने पूरे देश में गुस्सा और जोश पैदा किया. 

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यही माहौल आगे चलकर नौसेना विद्रोह का कारण बना, जिसने अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया. किताब उन कहानियों को भी सामने लाती है, जो ज्यादा चर्चा में नहीं रहीं. जैसे मदन लाल ढींगरा का मुकदमा, जहां उन्हें अपने ही परिवार ने ठुकरा दिया, फिर भी वे अपने फैसले पर अडिग रहे. वहीं उधम सिंह ने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए 20 साल तक इंतजार किया. ये उदाहरण बताते हैं कि आज़ादी की लड़ाई कितनी लंबी और कठिन थी.

इस किताब की भाषा इसकी सबसे बड़ी ताकत है. आमतौर पर कानूनी विषयों पर लिखी किताबें कठिन और भारी लगती हैं, लेकिन Freedom on Trial को बहुत आसान और कहानी की तरह लिखा गया है. इसलिए इसे कोई भी पाठक, चाहे उसे कानून की जानकारी हो या नहीं, आसानी से समझ सकता है.
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यह किताब उन मुकदमों को फिर से सामने लाती है, जिन्हें आज की पढ़ाई या चर्चा में ज्यादा जगह नहीं मिलती. जबकि इनका भारत के 

इतिहास और संविधान बनाने में बड़ा योगदान रहा है. इन मुकदमों ने सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि आने वाले भारत की सोच को भी आकार दिया.
कुल मिलाकर, Freedom on Trial सिर्फ एक किताब नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाती है कि आजादी कितनी बड़ी कुर्बानियों के बाद मिली है. यह किताब उन अनगिनत नायकों को भी श्रद्धांजलि देती है, जिनका नाम इतिहास में ज्यादा नहीं लिया जाता, लेकिन जिनका योगदान बहुत बड़ा है.

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आकाश वाजपेयी पेशेवर वकील हैं वह भारत के सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं. वर्तमान में वे भारत सरकार के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसल के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की है और वर्ष 2013 से बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में नॉमिनेटेड हैं अपनी कानूनी प्रैक्टिस के साथ-साथ वे आधुनिक भारतीय इतिहास में गहरी शैक्षणिक रुचि भी रखते हैं.

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