scorecardresearch
 

प्रख्यात रंगकर्मी रणबीर सिंह का 93 साल की उम्र में निधन, जयपुर में ली अंतिम सांस

'इप्टा' के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणवीर सिंह का जयपुर में निधन हो गया. वह 93 वर्ष के थे. देश में उन्हें रंगकर्मी ही नहीं बल्कि निर्देशक, अभिनेता, लेखक और इतिहासकार के तौर पर भी जाना जाता है. उनके निधन पर देशभर के रंगकर्मियों, कलाकारों और साहित्यकारों ने शोक जताया है.

X
साल 2012 से ही रणवीर सिंह इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे साल 2012 से ही रणवीर सिंह इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे

प्रख्यात रंगकर्मी और भारतीय जन नाट्य संघ 'इप्टा' के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह का जयपुर में निधन हो गया. वह 93 वर्ष के थे. देश में उन्हें रंगकर्मी ही नहीं बल्कि निर्देशक, अभिनेता, लेखक और इतिहासकार के तौर पर भी जाना जाता है. उनके निधन पर देशभर के रंगकर्मियों, कलाकारों और साहित्यकारों ने शोक जताया है. रणबीर सिंह का पूरा जीवन अभिनय और कला को समर्पित था.

उत्तराखंड के अध्यक्ष वीके डोभाल ने aajtak.in को फोन पर जानकारी देते हुए बताया कि जयपुर के एक अस्पताल में 4 दिन पहले ही उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी. उन्होंने बताया कि वे मूलरूप से राजस्थान के ही निवासी थे. उनका जन्म 7 जुलाई 1929 को राजस्थान के डुंडलाड में एक राजघराने में हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा मेयो कॉलेज से हुई थी. 1945 में उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री ली थी. 

वीके डोभाल बताते हैं कि बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की तरफ था. लिहाजा, 1949 में राजघराने के सुख सविधा छोड़कर वह बॉम्बे जा पहुंचे. जहां उन्हें बीआर चोपड़ा की फिल्म शोले में अशोक कुमार और बीना के साथ काम करने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने फिल्म चांदनी चौक में मीना कुमारी और शेखर के साथ भी अभिनय किया था. 4 साल बाद वे जयपुर लौट आए और वहां जयपुर थिएटर ग्रुप की स्थापना की और वहीं रंगमंच को आगे बढ़ाने का काम किया.

साल 1959 में रणबीर सिंह ने दिल्ली का रुख किया. वहां उन्होंने कमला देवी चट्टोपाध्याय के दिशा निर्देशन में भारतीय नाट्य संघ की स्थापना की. साथ ही वेयात्रिक थिएटर ग्रुप के साथ मिलकर नाटक खेलने लगे. टीवी का जमाना आया तो उन्होंने कई धारावाहिकों में अभिनय किया. जिनमे अमाल अल्लाना के निर्देशन में 'मुल्ला नसरुद्दीन' और संजय खान के निर्देशन में 'टीपू सुल्तान' के अलावा अनुराग कश्यप के निर्देशन में बना 'गुलाल' खास थे.

रंगकर्मी वीके डोभाल ने बताया कि 1984 में वह इप्टा के में शामिल हुए थे. साल 1986 में उन्हें हैदराबाद में आयोजित इप्टा के राष्ट्रीय सम्मेलन में उपाध्यक्ष चुना गया. वर्ष 2012 में प्रख्यात अभिनेता रंगकर्मी एके हंगल के निधन के बाद उन्हें इप्टा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया था. तभी से वह इस पद पर रहकर इप्टा में नई उर्जा का संचार करते रहे. अभिनय और निर्देशन के अलावा उन्होंने खुद कई नाटक लिखे हैं, जिनका मंचन हज़ारों बार किया गया है. जिनमें सराय की मालकिन, गुलफाम, पासे, मुखौटों की ज़िंदगी, मिर्ज़ा साहब, हाय मेरा दिल, तन्हाई की रात और अमृतजल काफी चर्चित रहे हैं.

रणबीर सिंह ने इंदर सभा, वाजिद अली शाह, संस्कृत नाटक का इतिहास और पारसी रंगमंच का इतिहास जैसी किताबें लिखी. राजस्थान संगीत अकादमी के उपाध्यक्ष रहने के साथ-साथ वह एक समय मॉरीशस में सांस्कृतिक सलाहकार भी रहे. उन्होंने रंगमंच के प्रचार-प्रसाल के लिए दुनिया के कई देशों का दौरा भी किया.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें