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'थोड़ा-सा उजाला' का आवरण और अशोक वाजपेयी

जन्मतिथि विशेषः उजाले की इबारत और 81 के अशोक वाजपेयी

16 जनवरी 2022

रचना और आलोचना की लंबी पारी खेलने वाले अशोक वाजपेयी ने कविता को जीवन और मनुष्यता की रागात्मकता से जोड़ा है. उनके जन्मदिन पर 'थोड़ा-सा उजाला' पर चर्चा के बहाने उनके लेखन और कवि दृष्‍टि पर एक नज़र

कैलाश सत्‍यार्थीः कवि और पुस्तकप्रेमी समाजसेवी

सुरक्षित बचपन दिवस: मुक्ति के गायक हैं कैलाश सत्‍यार्थी

11 जनवरी 2022

नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्‍यार्थी एक ओजस्‍वी कवि हैं. वे कविताओं और क्रांति गीतों के माध्यम से बाल मजदूरों में आजादी का ओज भरते हैं. आज उनके जन्मदिन पर विशेष

मन्नू भंडारीः नहीं रही स्त्री दुख की चितेरी

जाना मन्नू भंडारी का, अब कौन लिखेगा बंटी का दुख

15 नवंबर 2021

हिंदी की जानीमानी कथाकार मन्नू भंडारी हालांकि एक लंबी उम्र जी कर गईं, पर उन्होंने अपनी रचनाओं से मानवीय रिश्तों के जो किरदार रचे थे, वे हमेशा अमर रहेंगे

कवि कैलाश वाजपेयी [फाइल फोटो]

जयंती विशेषः ये सदी और कैलाश वाजपेयी की कविताएं

11 नवंबर 2021

भारत या विश्व के स्तर पर इन दिनों जो घट रहा था, वह कैलाश वाजपेयी की कविताओं में छन कर आ रहा था.

जौन एलियाः दर्द और मोहब्बत की आवाज [ स्रोतः Social Media ]

पुण्यतिथि विशेष: अदब के आईने से जौन‌ एलिया

08 नवंबर 2021

जौन साहब का मंच पर किरदार एक जोकर की तरह था, हर बार जब वह रोते थे, तो लोग हंसते थे. वह ऐसे कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने मंचीय प्रस्तुति के ढर्रों को ध्वस्त किया. ऐसा शायर जो अपनी शायरी में खो जाता.

असग़र वजाहतः कथाकार जिनकी कहानियां हमेशा झकझोरती हैं

देश में लोकतंत्र को हाइजैक कर लिया गया: असग़र वजाहत

29 अक्टूबर 2021

असग़र वजाहत से यह बेबाक गुफ़्तगू यह बताती है कि तरक्की के नाम पर आज भले ही समाज, देश और दुनिया चाहे जो दावा करें, इनसानियत से हमारा नाता धीरे-धीरे कम हुआ है, जो चिंतनीय भी है और विचारणीय भी

शैलेश मटियानी और उनकी चंद किताबें

संस्मरणः याद आते हैं बड़े कद के कथाकार शैलेश मटियानी

14 अक्टूबर 2021

प्रेमचंद के बाद हिंदी को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कहानियां देने वाले कथाकार शैलेश मटियानी ही हैं. इस मामले में न कमलेश्वर और राजेंद्र यादव जैसे कहानी के दिग्गज उनके आगे ठहर सकते हैं और न फणीश्वरनाथ रेणु जैसे बड़े लेखक.

प्रोफेसर रामविलास शर्मा [फाइल फोटो]

संस्मरण: रामविलास शर्मा के शब्द मेरे लिए राह बन गए

10 अक्टूबर 2021

हिंदी साहित्य और आलोचना का विशाल हिमालय मेरे सामने खड़ा था. मैंने उनके पैर छुए, तो उनके मुंह से निकला, 'लिखो, खूब लिखो...खूब अच्छा लिखो'...हिंदी के सर्वाधिक प्रतिष्ठित आलोचकों में से एक, संस्कृति चिंतक और सभ्यता विचारक, डॉ रामविलास शर्मा की जयंती पर प्रकाश मनु की यादें

'कलम का सिपाही' का आवरण चित्र [सौजन्यः राजकमल प्रकाशन]

पुण्यतिथि विशेषः सूनी दुनिया में बराबर कौन रह सकता है

08 अक्टूबर 2021

1962 में प्रकाशित 'कलम का सिपाही' को हिंदी समाज द्वारा व्यापक रूप में मुंशी प्रेमचन्द की पहली और अपने आप में सम्पूर्ण जीवनी का दर्जा प्राप्त है. आज उनकी पुण्यतिथि पर पढ़िए अमृतराय द्वारा लिखी इस जीवनी के अंश

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी [फाइल फोटो]

वे बातें जिनसे गांधी जी बने हम सबके प्यारे बापू

02 अक्टूबर 2021

गांधी जी ने सिखाया कि बड़ी-बड़ी बातें कहने के बजाय, हम छोटी-छोटी बातें अपनाएं, छोटे-छोटे संकल्पों को पूरा करें तो हम बड़े हो सकते हैं. खुद गांधी का जीवन बताता है कि वे इसी तरह बड़े हुए. और देश के सारे बच्चों के बापू कहलाए, बड़ों के भी.

महात्मा गांधी [ फाइल चित्र ]

गांधी-जीवन: एक अकिंचन इच्छा की विराट फलश्रुति

02 अक्टूबर 2021

ऐसा क्या है कि एक राष्ट्र के निर्माण के पीछे, उसकी आजादी के पीछे, उसके आत्मगौरव के पीछे एक ऐसे शख्स का संघर्ष तरोताज़ा है जिसने अफ्रीका जाकर भारतीयों को उनके आत्म गौरव का बोध कराया

महात्मा गांधी [फाइल फोटो ]

गांधी जयंती विशेषः बापू ने कहा- मैं विभाजन कब चाहता था?

02 अक्टूबर 2021

विश्व में जहां महात्मा गांधी के विचार उत्तरोत्तर सम्मान पा रहे हैं, वहीं राष्ट्रपिता के रूप में समादृत इस महानतम शख्सियत के चरित्र और फैसलों पर कई अधकचरे लोग सवाल उठाते हैं.

शहीद-ए-आजम की याद में जारी डाक टिकट

जयंती विशेषः ऐसे थे शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह

27 सितंबर 2021

मेरी जिंदगी मकसदे आला यानी आजादी-ए-हिंद के असूल के लिए वक्फ हो चुकी है. इसलिए मेरी जिंदगी में आराम और बुनियादी खाहशात बायसे कशिश नहीं है.

रामधारी सिंह दिनकर [फाइल फोटो]

जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा...राष्ट्रकवि दिनकर जयंती विशेष

23 सितंबर 2021

दिनकर एक तरफ 'रसवंती' जैसी सरस स्‍नेहिल कविताओं और 'उर्वशी' की श्रृंगारिक सघनता के कवि थे तो दूसरी तरफ 'कुरुक्षेत्र' व 'रश्‍मिरथी' जैसे ओजरस से भरे काव्‍य के प्रणेता भी.

रामधारी सिंह दिनकर [फाइल फोटो]

जयंती विशेषः हटो व्योम के मेघ...दिनकर बहुत याद आते हैं

23 सितंबर 2021

दिनकर राष्ट्र के, अध्यात्म के, जन के, पुराण के कवि हैं. भले ही वे अभी हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी कवितायें आज भी जीवंत और प्रासंगिक हैं.

संतोष चौबे, एक तकनीक चेता कवि

जन्मदिन विशेषः संतोष चौबे, होना कवि इस दुःसह समय में

22 सितंबर 2021

कुंवर नारायण ने कभी लिखा था व्यक्ति की ख्याति मंद-मंद हवा की तरह बहनी चाहिए, दुंदुभि की तरह बजनी नहीं- और ऐसा ही संतोष चौबे के साथ हुआ है.

भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन, एक महान हिंदी सेवी

हिंदी के महान स्वप्नद्रष्टा, अनन्य सेवी राजर्षि टंडन

14 सितंबर 2021

राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन आधुनिक हिंदी के सबसे बड़े अलंबरदारों में से थे, पर विनयी इतने कि न कभी उन्होंने अपने मुंह से अपनी हिंदी-सेवा की चर्चा की और न यह कभी चाहा कि लोग उनके सिर पर प्रशंसाओं के पुलिंदों का ताज रखकर अभिनंदन करें.

लोकदेवता शिक्षक डॉ मदन गोपाल

यादें डॉ मदन गोपाल: शिक्षा-लोक के अविस्मरणीय लोकदेवता!

10 सितंबर 2021

वे चौदह की उम्र में चौरासी जैसा सोचना सिखाते और कहते, चौरासी में चौदह बनकर जीने का आनंद तभी है. भारतीय रिनेसां को जैसा वे बताते, मैंने कभी किसी इतिहासविद से वैसा नहीं सुना.

अमृत राय और रम्या का आवरण चित्र

जन्मशती विशेष: अमृत राय के ललित निबंध

03 सितंबर 2021

अमृत राय को प्राय: 'कलम के सिपाही' के लेखक के रूप में जाना जाता है जबकि उन्होंने कहानी, उपन्‍यास, आलोचना, नाटक और संस्मरण हर विधा में प्रभूत साहित्य लिखा. उनकी जन्मशती पर उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाल रहे हैं हिंदी के सुधी आलोचक डॉ ओम निश्चल

लेखक, अध्यापक, कवि दिविक रमेशः अपनी एक किताब के साथ

जन्मदिन विशेषः दिविक की कविताई से मेरी दोस्ती पुरानी है

28 अगस्त 2021

दिविक रमेश आज पचहत्तर बरस पूरे कर रहे. उनकी कविताओं से मुलाकात के बरसों बाद जब दिल्ली आने पर वह मिले तो कुछ इस तरह कि जैसे अनादिकाल से हम एक-दूसरे को जानते रहे हों...वरिष्ठ लेखक प्रकाश मनु का आलेख

 राजेन्द्र यादव और एक दुनिया: समानान्तर का आवरण-चित्र

जयंती विशेषः क्लीव और बौनों की दुनिया पर राजेन्द्र यादव

28 अगस्त 2021

अफ़सरों और सांसदों की कोठियों से लेकर दस-दस मंज़िले एम्प्लायमेंट एक्सचेंजों के दरवाज़ों के सामने एड़ियां रगड़ती भीड़ है...जो कुछ कर-दिखाने के साहसहीन, साधनहीन सपने देखकर, अपने को निर्ममता से तोड़कर बेच देती है...