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रामधारी सिंह दिनकर [फाइल फोटो]

जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा...राष्ट्रकवि दिनकर जयंती विशेष

23 सितंबर 2021

दिनकर एक तरफ 'रसवंती' जैसी सरस स्‍नेहिल कविताओं और 'उर्वशी' की श्रृंगारिक सघनता के कवि थे तो दूसरी तरफ 'कुरुक्षेत्र' व 'रश्‍मिरथी' जैसे ओजरस से भरे काव्‍य के प्रणेता भी.

रामधारी सिंह दिनकर [फाइल फोटो]

जयंती विशेषः हटो व्योम के मेघ...दिनकर बहुत याद आते हैं

23 सितंबर 2021

दिनकर राष्ट्र के, अध्यात्म के, जन के, पुराण के कवि हैं. भले ही वे अभी हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी कवितायें आज भी जीवंत और प्रासंगिक हैं.

संतोष चौबे, एक तकनीक चेता कवि

जन्मदिन विशेषः संतोष चौबे, होना कवि इस दुःसह समय में

22 सितंबर 2021

कुंवर नारायण ने कभी लिखा था व्यक्ति की ख्याति मंद-मंद हवा की तरह बहनी चाहिए, दुंदुभि की तरह बजनी नहीं- और ऐसा ही संतोष चौबे के साथ हुआ है.

भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन, एक महान हिंदी सेवी

हिंदी के महान स्वप्नद्रष्टा, अनन्य सेवी राजर्षि टंडन

14 सितंबर 2021

राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन आधुनिक हिंदी के सबसे बड़े अलंबरदारों में से थे, पर विनयी इतने कि न कभी उन्होंने अपने मुंह से अपनी हिंदी-सेवा की चर्चा की और न यह कभी चाहा कि लोग उनके सिर पर प्रशंसाओं के पुलिंदों का ताज रखकर अभिनंदन करें.

लोकदेवता शिक्षक डॉ मदन गोपाल

यादें डॉ मदन गोपाल: शिक्षा-लोक के अविस्मरणीय लोकदेवता!

10 सितंबर 2021

वे चौदह की उम्र में चौरासी जैसा सोचना सिखाते और कहते, चौरासी में चौदह बनकर जीने का आनंद तभी है. भारतीय रिनेसां को जैसा वे बताते, मैंने कभी किसी इतिहासविद से वैसा नहीं सुना.

अमृत राय और रम्या का आवरण चित्र

जन्मशती विशेष: अमृत राय के ललित निबंध

03 सितंबर 2021

अमृत राय को प्राय: 'कलम के सिपाही' के लेखक के रूप में जाना जाता है जबकि उन्होंने कहानी, उपन्‍यास, आलोचना, नाटक और संस्मरण हर विधा में प्रभूत साहित्य लिखा. उनकी जन्मशती पर उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाल रहे हैं हिंदी के सुधी आलोचक डॉ ओम निश्चल

लेखक, अध्यापक, कवि दिविक रमेशः अपनी एक किताब के साथ

जन्मदिन विशेषः दिविक की कविताई से मेरी दोस्ती पुरानी है

28 अगस्त 2021

दिविक रमेश आज पचहत्तर बरस पूरे कर रहे. उनकी कविताओं से मुलाकात के बरसों बाद जब दिल्ली आने पर वह मिले तो कुछ इस तरह कि जैसे अनादिकाल से हम एक-दूसरे को जानते रहे हों...वरिष्ठ लेखक प्रकाश मनु का आलेख

 राजेन्द्र यादव और एक दुनिया: समानान्तर का आवरण-चित्र

जयंती विशेषः क्लीव और बौनों की दुनिया पर राजेन्द्र यादव

28 अगस्त 2021

अफ़सरों और सांसदों की कोठियों से लेकर दस-दस मंज़िले एम्प्लायमेंट एक्सचेंजों के दरवाज़ों के सामने एड़ियां रगड़ती भीड़ है...जो कुछ कर-दिखाने के साहसहीन, साधनहीन सपने देखकर, अपने को निर्ममता से तोड़कर बेच देती है...

सपत्नीक डॉ रामदरश मिश्रः हिंदी साहित्य में हर दिन कुछ जोड़ते रचनाकार

जन्मदिन विशेषः 97 के मेरे अपने रामदरश मिश्र

15 अगस्त 2021

लोहे की भारी-भरकम हथकड़ियां टूट जाती हैं, पर कच्चे धागे की पकड़ नहीं. रामदरश मिश्र भी शायद कच्चे धागों से बांधने वालों में से हैं, जिनसे कभी कोई छूट नहीं पाया...हिंदी के वयोवृद्ध लेखक के जन्मदिन पर लेखक शिष्य प्रकाश मनु का एक आत्मिक लेख

भगत सिंह की फांसी का सच पुस्तक का आवरण चित्र

75 का भारतः पुस्तक अंश- भगत सिंह की फांसी का सच

12 अगस्त 2021

जहां कभी भगत सिंह की काल कोठरी 'फांसी की कोठी' हुआ करती थी, ठीक उसी जगह पर एक सजीली मसजिद की मीनार खड़ी है; लेकिन जिस स्थान पर भगत सिंह और उनके दो कॉमरेडों-सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गई थी, वहां गुंबद नहीं, धातु की पट्टी नहीं, यहां तक कि एक पत्थर तक नहीं लगा है.

प्रेमशंकर शुक्लः चर्चा व विवाद के केंद्र में कविताएं

कविता-विवाद के केंद्र में क्यों हैं प्रेमशंकर शुक्ल?

05 अगस्त 2021

बीते कुछ समय से भोपाल के कवि प्रेमशंकर शुक्‍ल की कुछ कविताएं अश्‍लीलता के आरोपों के कारण चर्चा में हैं. सोशल मीडिया पर इन कविताओं के पक्ष विपक्ष में अनेक साहित्‍यिक लोग सक्रिय हैं. क्‍या है यह पूरा प्रसंग और इन कविताओं में ऐसा क्‍या है जो अश्‍लील है, इस मसले पर लेखकों-कवियों की राय तथा शुक्‍ल के कवित्‍व के आयाम पर प्रकाश

कवयित्री पद्मा सचदेव, एक अनूठा अंदाज [ फोटोः India Today ]

पद्मा सचदेव के निधन से साहित्य जगत में शोक

04 अगस्त 2021

साहित्य में किताबें भी बहुत आएंगी और लिखने वाले भी बहुत होंगे, लेकिन पद्मा सचदेव के निधन से सहज मुस्कान के साथ लोक-जीवन की चितेरी चली गई. यह कहना है वरिष्ठ लेखिका चित्रा मुद्गल का.

पद्मा सचदेवः यह हंसी फिर न दिखेगी

यादेंः पद्मा सचदेव, डूब जाता है कभी मुझमें समंदर मेरा

04 अगस्त 2021

पद्मा सचदेव नहीं रहीं. हिंदी डोगरी की विदुषी कवयित्री, संस्मरणकार, गद्यकार पद्मा सचदेव का न रहना हिंदी की एक दुनिया का लोप हो जाना है.

प्रेमचंद का रेखाचित्र

प्रेमचंद की दृष्टि में साहित्य का उद्देश्य, प्रयोजनीयता

31 जुलाई 2021

प्रेमचंद के समय में भी संसार में, देश में, समाज में बड़ा नैराश्य था. धर्म, जाति, वर्ण की जकड़बंदी, सामंती प्रवृत्तियों की जकड़बंदी खूब थी. उनकी कहानियां और उपन्यास इन प्रवृत्तियों का केवल वर्णन ही नहीं करते बल्कि उनसे लोहा लेते हैं.

गोदान का आवरण-चित्र और लेखक प्रकाश मनु [इनसेट में]

जयंती विशेषः प्रेमचंद की महाकाव्यात्मक कृति है गोदान

31 जुलाई 2021

'रामचरितमानस' में अगर कल का हिंदुस्तान है तो 'गोदान' में आज का हिंदुस्तान है और यों 'गोदान' मानो 'रामचरितमानस' की अगली कड़ी है.

कल्‍पना, यथार्थ और प्रगतिशीलता के कवि राजेश जोशी

75 के हुए संयम में ढले मुहावरों के कवि राजेश जोशी

18 जुलाई 2021

देखते देखते कवि राजेश जोशी पचहत्‍तर के हो गए. एक लंबा दौर कविता का उन्‍होंने देखा और जिया है. नई कविता फार्मेट में लोकप्रिय मुहावरों के साथ कैसे पाठक के दिल में जगह बनाई जा सकती है, इसे उन्‍होंने बहुत पहले पहचान लिया था. उनके पचहत्‍तरवें जन्‍मदिन पर यह खास आलेख .

दिलीप कुमारः वजूद और परछाई पुस्तक का आवरण-चित्र [सौजन्यः वाणी प्रकाशन]

पुस्तक अंशः जब दिलीप साहब को खानी पड़ी थी 'क़ुरान' की कसम

07 जुलाई 2021

दिलीप कुमार की इस आधिकारिक आत्मकथा 'वजूद और परछाईं' में उनके जन्म से लेकर आखिरी दिनों तक की जीवन-यात्रा का वर्णन है. क्या दौर था वह भी. श्रद्धांजलि स्वरूप एक अंश

हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शरद पगारेः सृजन की मिसाल

90 साल के युवा साहित्यकार शरद पगारे की साहित्य यात्रा

05 जुलाई 2021

इंदौर निवासी वरिष्ठ साहित्यकार शरद पगारे आज पांच जुलाई को अपने जीवन के 90 वे वसंत में कदम रख रहे हैं, पर उनकी सृजनात्मकता और उल्लास अब भी कायम है.

जनकवि बाबा नागार्जुन [चित्र सौजन्यः लेखक]

यादें: बाबा नागार्जुन, हमने बाबा को देखा है!

30 जून 2021

बाबा नागार्जुन यानी आम आदमी के गौरव और ठसके के लेखक, जिनसे बात करो तो लगता था, पूरा हिंदुस्तान आपसे मुखातिब है.

महान साहित्यकार विष्णु प्रभाकर [ सौजन्यः India Today Archive ]

जयंती विशेषः विष्णु प्रभाकर के संस्मरणों में समूचा दौर

21 जून 2021

अपनी लंबी सृजन-यात्रा में विष्णु प्रभाकर साहित्य के बड़े से बड़े मनीषियों के संपर्क में आए. शुरुआती दौर में ही उनकी कहानियों को प्रेमचंद, जैनेंद्र और चंद्रगुप्त विद्यालंकार ने सराहा.

अपने गुरु देवेंद्र सत्यार्थी के साथ लेखक प्रकाश मनु

लोक यायावर सत्यार्थी की आत्मकथा में है धरती की गंध

28 मई 2021

लोक यायावर देवेंद्र सत्यार्थी की कृतियों में उनकी आत्मकथा का पलड़ा शायद सबसे अधिक भारी है. यों उनकी कविता, कहानी और उपन्यासों की खासी धूम रही, और लोक साहित्य के तो वे मर्मज्ञ थे ही.