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कला, कविता, संस्कृति मर्मज्ञ अशोक वाजपेयी, एक छवि

सांसारिकता का गान और कविता से अभिसार करते अशोक वाजपेयी

16 जनवरी 2021

कविता में गए छह दशक से स्‍थापित और सक्रिय अशोक वाजपेयी 80 वर्ष के हो गए. उन्होंने कविता, कला, साहित्‍य, संस्कृति के क्षेत्र में विमर्श, विवाद, संवाद, प्रतिवाद का एक सुदीर्घ जीवन जीया है. उनकी कविताओं में कोमलता और सांसारिकता का गान भी है कवि का उत्‍तरदायित्‍व भी.

कैलाश सत्यार्थी और उनकी पुस्तक कोविड-19: सभ्यता का संकट और समाधान का आवरण

नोबेल सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के जन्मदिन पर खास बातचीत

11 जनवरी 2021

बचपन, जो बेपरवाह होता है हर उलझन से, संकट से, वही जब संकट में हो तो हमारे दौर में उसको बचाने की जो सबसे ताकतवर आवाज सुनाई देती है, वह है कैलाश सत्यार्थी की. नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के जन्मदिन पर उनकी पुस्तक कोविड-19: सभ्यता का संकट और समाधान' पर विशेष बातचीत

साहित्य व कला क्षेत्र की वह हस्तियां जो वर्ष 2020 में हमसे बिछड़ गईं

अमरता के अक्षर बोने वाले लेखक-कलाकार, जो हमसे बिछड़ गए

28 दिसंबर 2020

साल 2020 लगभग गुजर सा गया है. यह ऐसा साल था, जिसका अधिकतर वक्त कोरोना नामक महामारी से जूझने व प्रभाव में गुजरा. इस बीच कई कलमजीवी, कवि, कलाकार हमारे बीच से चले गए. इस जीवनावसान से साहित्‍य और शब्द की दुनिया की क्षति का जायज़ा साहित्य आजतक पर ले रहे हैं डॉ ओम निश्‍चल.

अपने प्रिय लेखकों, साहित्यकारों के साथ डॉ ओम निश्चल

भाषा की सन्निधि में सांस लेती शख्सियत ओम निश्‍चल

15 दिसंबर 2020

हिंदी कविता के विवेचन मूल्यांकन पर गए दो-तीन दशकों को गौर से देखा जाए तो इस क्षेत्र में ओम निश्चल नामक एक शख्स पूरे मन और समर्पण से संलग्न रहा है. निश्चल के जन्मदिन पर उनके साहित्यिक अवदान की चर्चा कर रहे हैं डॉ आनंद वर्धन द्विवेदी

मैत्रेयी पुष्पा की पुस्तक 'वह सफ़र था कि मुकाम था' का कवर

मैत्रेयी पुष्पा जन्मदिन विशेषः वह सफर था कि मुकाम था

30 नवंबर 2020

हिंदी की बिंदास और बेबाक विचारों वाली लेखिकाओं में मैत्रेयी पुष्पा अग्रगण्य हैं. उनके 76वें जन्मदिवस के अवसर पर उनकी पुस्तक 'वह सफ़र था कि मुकाम था' के कुछ अंश

साहित्य व संस्कृति को समर्पित मृदुला सिन्हा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ

स्मृतिः दिनकर-गांधी और लोक संस्कृति से प्रभावित थीं मृदुला सिन्हा

19 नवंबर 2020

मृदुला सिन्हा लोक संस्कृति के पहलुओं पर लिखने वाली रचनाकार थीं. उनकी कहानियां गांव-घर-देहात की, लोक रस में पगी कहानियां हैं. अपनी राजनीतिक आपाधापी में भी वे लिखने का वक्त निकाल लेती थीं.

भारतीय चिंतन की बहुस्‍पर्शिता के कवि कैलाश वाजपेयी [फाइल फोटो]

जयंती विशेष: भारतीय चिंतन प्रज्ञा के वाहक कवि कैलाश वाजपेयी

11 नवंबर 2020

हिंदी की दुनिया में कैलाश वाजपेयी एक अलग तरह के कवि थे. अपने पहनावे व चिंतन दोनों में. उनके भीतर भारतीयता को लेकर न गांठें थीं न पाश्‍चात्‍य चिंतन से अरुचि. उनका लेखन चिंतन इस बात का साक्ष्‍य है.

अदम गोंडवी [ फाइल फोटो]

जयंती विशेषः ग़ज़ल की इन्‍कलाबी फसल पैदा करने वाले शायर अदम गोंडवी

22 अक्टूबर 2020

अदम गोंडवी का होना शायरी के उस मिजाज़ का अवतरण है, जिसने सत्ता का कभी मुँह नहीं जोहा, जीवन में कभी समझौते नहीं किए. अदम की जयंती पर उनकी शायरी और शख्‍सियत पर एक तहरीर

लुईस ग्लिक, साहित्य की नोबेल पुरस्कार विजेता 2020

लुईस ग्लिक जैसी कवयित्री के नोबेल पुरस्कार जीतने के मायने

14 अक्टूबर 2020

साहित्‍य के सर्वोच्‍च पुरस्‍कार के केंद्र में एक अरसे बाद कोई कवयित्री थी, वह भी अमेरिकी कवयित्री लुईस ग्‍लिक. ग्‍लिक के पुरस्‍कृत होने के मायने शब्दों की दुनिया के लिए क्या है? पढ़ें यह विश्लेषण

काका हाथरसी [फाइल फोटो]

काका हाथरसी जानते थे कि आने वाले कल के नेता, पुलिस व देश ऐसा होगा

30 सितंबर 2020

हाथरस अभी चर्चा में है. एक बेटी के कथित बलात्कार, बर्बर हत्या, दबंगों के जुल्म और पुलिसिया व्यवहार को लेकर. लेकिन वही हाथरस कभी काका हाथरसी के कटाक्ष के लिए जाना जाता था. ऐसा-व्यंग्य जिसमें आज के हालात के संकेत भी थे.

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर [फाइल फोटो]

जयंती विशेष: दिनकर की 'उर्वशी', जिसमें प्रेम कामध्‍यात्‍म के तटों को छूता है

23 सितंबर 2020

दिनकर जितने राष्‍ट्रीयता, ओज और वीर रस के कवि थे, उतने ही श्रृंगार के भी अद्भुत कवि थे. उर्वशी इसका प्रमाण है. दिनकर की जयंती पर उनके श्रृंगार काव्य की एक पड़ताल