मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू शायरी के कालजयी शायर हैं. उन्होंने बदलते हिंदुस्तान, 1857 के दौर और इंसानी जज़्बात को नई गहराई दी. उनकी ग़ज़लें, ख़त और फ़लसफ़ा आज भी साहित्य, सिनेमा और ग्लोबल अकादमिक दुनिया में प्रासंगिक बने हुए हैं.
कविता से जिस कवि का आत्मिक जुड़ाव आधी सदी से भी अधिक पुराना हो, उस कवि की रचना-यात्रा और जीवन-यात्रा के बारे में उसकी किताबों से बेहतर भला कौन कुछ कह सकता है! आइए श्याम सुशील के साथ हम उस किताब के कवि प्रकाश मनु से मिलते हैं