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अपने गुरु देवेंद्र सत्यार्थी के साथ लेखक प्रकाश मनु

लोक यायावर सत्यार्थी की आत्मकथा में है धरती की गंध

28 मई 2021

लोक यायावर देवेंद्र सत्यार्थी की कृतियों में उनकी आत्मकथा का पलड़ा शायद सबसे अधिक भारी है. यों उनकी कविता, कहानी और उपन्यासों की खासी धूम रही, और लोक साहित्य के तो वे मर्मज्ञ थे ही.

लोक यायावर देवेंद्र सत्यार्थी [ फाइल फोटो]

जयंती विशेषः देवेंद्र सत्यार्थी की आत्मकथा के अंश

28 मई 2021

समय की पिटारी में वे स्मृतियां आज भी बंद पड़ी हैं. पिटारी का ढकना उठाया नहीं कि पुरानी स्मृतियां जाग उठीं...सत्यार्थी जी की आत्मकथा के इसी अंश से

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ प्रकाश मनुः एक मोहक अंदाज

जन्मदिन विशेषः प्रकाश मनु, मैं और मेरी कहानी

12 मई 2021

वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाश मनु आज 72वें साल में प्रवेश कर रहे हैं. इस अवसर पर उनके आत्मकथ्य 'मैं और मेरी कहानी' के खास अंश

शीला संधूः जिनके प्रयासों से हिंदी साहित्य जगत समृद्ध हुआ [ फोटो सौजन्यः राजकमल प्रकाशन]

शीला संधूः मर्दों से भरी प्रकाशन दुनिया की अकेली औरत

05 मई 2021

मैं अंधेरे में रास्ता ढूंढ़ते हुए वहीं से उल्टा सफ़र कर रही थी. मुझे न वह भाषा आती थी, न मैं लेखकों या उनकी सामाजिक रीतियों से परिचित थी. हिंदी की संकीर्ण परंपरा ने शुरू में मुझे स्वीकार नहीं किया. वजह यह थी कि मर्दों की दुनिया में मैं अकेली औरत थी- वह भी आधुनिका और पश्चिम के तौर-तरीकों में रची-बसी.

कवि, आलोचक, संपादक विजेंद्र [फाइल फोटो]

मुझे दुख है मैंने अपनी धरती छोड़ी...कवि विजेंद्र की याद

01 मई 2021

'ऋतु का पहला फूल' के बाद विजेंद्र के कवित्व की सुगंध राजस्थान तक सीमित न रही बल्कि वे हिंदी जगत की मुख्य धारा के सम्मानित कवि माने जाने लगे.

कवि, चित्रकार, आलोचक विजेंद्र [ सौजन्यः लेखक ]

विजेंद्र: बिजली की कौंध और लफ़्ज़ों में थरथराहट वाला कवि

01 मई 2021

विजेंद्र कवि थे, चित्रकार थे और आलोचक थे. लेकिन उनका कवि राजकमल चौधरी और मुक्तिबोध जैसी आभा प्रदीप्त था. उनका जाना गहरा और असाधारण वज्रपात है.

डॉ कुंवर बेचैनः जितनी दूर नयन से सपना [सौजन्यः फेसबुक]

प्रयाण: कुंवर बेचैन...तो फिर मौत का क्यों डर रखूं?

29 अप्रैल 2021

कवि सम्मेलनों में शिरकत करने वाला हर शख्स कुंवर बेचैन का नाम अवश्य जानता होगा. गए पांच दशकों से वे कवि सम्‍मेलनों की स्थायी उपस्थि़ति थे. इस मधुर और दिलकश कवि, गीतकार व ग़ज़लगो का आत्मीय स्मरण

लेखक, चिंतक, आध्यात्मिक विचारक मनोज दासः एक दार्शनिक मुद्रा [चित्र सौजन्य-Subrat Bahinipati]

मनोज दासः शिक्षा, अध्यात्म और साहित्य का महान पहरुआ

28 अप्रैल 2021

एक चिंतक, आध्यात्मिक चेतना युक्त प्राध्यापक और अंग्रेजी-ओड़िआ के महान लेखक के रूप में मनोज दास दुनिया भर में समादृत थे. 87 साल की उम्र में पुदुच्चेरी में उनका निधन हुआ. एक आत्मिक याद

अरविंद कुमारः एक शब्द मनीषी, जिसने हिंदी को समृद्ध किया

प्रयाण: अरविंद कुमार, एक शब्द-सहचर का जाना

27 अप्रैल 2021

कोशकारिता के क्षेत्र में गए लगभग चार दशकों से कार्यरत अरविंद कुमार अब हमारे बीच नहीं हैं. वे शायद अकेले ऐसे कोशकार हैं जिन्होंने हिंदी कोशकारिता को अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया तथा अपने बलबूते वह काम कर दिखाया जो बड़ी से बड़ी संस्थाओं के वश का नहीं है.

मंज़ूर एहतेशामः मध्यवर्गीय मुस्लिम समाज की धड़कन का चितेरा

मंज़ूर एहतेशाम की याद और उनकी कहानीः तमाशा

27 अप्रैल 2021

मुस्लिम समाज और उसके बहाने भारतीय जनजीवन के अनेक देखे-अनदेखे पहलुओं के चितेरे कथाकार मंज़ूर एहतेशाम भी कोरोना में चले गए. पर 'सूखा बरगद' जैसे क्लासिक उपन्यास से हिंदी के पाठकों के बीच वह हमेशा याद किए जाएंगे. उनकी याद को समर्पित उनकी एक बेहतरीन कहानी

ललित शुक्‍ल: साहित्यिक खेमेबंदी से परे एक रचनाकार

पुण्‍यतिथि विशेष: अध्‍यवसायिता के पर्याय थे ललित शुक्ल

27 अप्रैल 2021

साहित्‍य में कुछ प्रतिभाएं फोकस के कारण जल्‍दी ही चर्चा में आ जाती हैं, कुछ पर रोशनी देर से पड़ती है. साहित्‍य के भीतर की खेमेबंदियों से कई लेखक अपने दौर में उपेक्षित ही रहे. उनमें एक नाम ललित शुक्‍ल का भी है. उनकी पुण्यतिथि पर उनके लेखक व्‍यक्‍तित्‍व की एक झलक.