Menstruation at an early age: वैसे तो लड़कियों को 11 वर्ष से 15 वर्ष की उम्र के बीच पीरियड्स आना शुरू हो जाते हैं लेकिन हाल ही में एक रिसर्च में सामने आया है कि जिन लड़कियों को कम उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, उन्हें आगे चलकर डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है.
क्या कहा गया है रिसर्च में
रिसर्चर्स ने 1999 से 2018 के बीच 20 से 65 वर्ष की उम्र की 17,300 से अधिक लड़कियों और महिलाओं के डेटा पर रिसर्च की. इसके बाद उन्हें पीरियड्स शुरू होने की उम्र के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में डिवाइड किया गया जिसमें 10, 11, 12,13,14, 15 और उससे अधिक उम्र की लड़कियां थीं.
बीएमजे न्यूट्रिशन प्रिवेंशन एंड हेल्थ जर्नल में 5 दिसंबर को पब्लिश हुई रिसर्च के मुताबिक, कम उम्र में पीरियड्स शुरू होने से 65 साल की उम्र से पहले स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, खासकर उन महिलाओं में जिन्हें 10 साल की उम्र से पहले पीरियड्स शुरू हो जाते हैं.
लुइसियाना में तुलाने यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया कि उनमें से 1773 महिलाओं को टाइप टू डायबिटीज हो गई थी और उनमें से 205 महिलाओं को हार्ट संबंधित समस्याएं भी थीं. ये सभी महिलाएं वो थीं जिनके पीरियड्स 13 साल से पहले शुरू हो गए थे.
इन महिलाओं को था अधिक जोखिम
रिसर्च में पाया गया है कि जिन महिलाओं को 10 वर्ष या उससे कम उम्र में पीरियड्स शुरू हो गए थे, उनमें टाइप टू डायबिटीज का जोखिम 32 प्रतिशत, 11 वर्ष की आयु में आने पर 14 प्रतिशत और 12 की उम्र वाली लड़कियों को 29 प्रतिशत अधिक जोखिम पाया गया था.
उन्होंने यह भी पाया कि डायबिटीज वाली वो महिलाएं जिन्हें पीरियड्स पहले आए थे, उनमें स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया था लेकिन ओवरऑल कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा नहीं था.
जिन महिलाओं को 10 साल या उससे कम उम्र में पीरियड्स शुरू हुए थे, उन डायबिटीज वाली महिलाओं में स्ट्रोक का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक था.
बीएमजे में पब्लिश हुई स्टडी में निष्कर्षों के आधार पर यही बताया गया है कि पीरियड्स देर से यानी 13 साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं तो इस तरह के जोखिम कम होते हैं. क्योंकि अगर पीरियड्स जल्दी शुरू हो जाते हैं फिर मेनोपॉज आने तक शरीर लंबे समय तक एस्ट्रोजन के संपर्क में रहता है जिसके कारण यह समस्या हो सकती है.
वजन और पीरियड्स
नॉट्रे डेम ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी में हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में असिस्टेंट क्लिनिकल प्रोफेसर डॉ. जूली क्विनलिवन ने कहा है कि इस रिसर्च के रिजल्ट आश्चर्यजनक नहीं हैं. प्यूबर्टी की शुरुआत सीधे तौर पर वजन और बॉडी मास इंडेक्स और लेप्टिन हार्मोन से संबंधित होती है. ऐसे में जब बच्ची का वेट बढ़ता है तो लेप्टिन का लेवल बदल जाता है और वह कम उम्र में ही प्यूबर्टी से गुजरने लगती हैं.