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अभिभावकों की पढ़ाई पर निर्भर है बच्चों का प्रदर्शन

एक शोध में कहा गया है कि स्कूल में बच्चे का शैक्षिक प्रदर्शन उसके अभिभावकों की पढ़ाई-लिखाई पर निर्भर करता है. माता-पिता की शैक्षिक स्थिति का वर्किंग मेमोरी या व्यावहारिक स्मरणशक्ति से संबंधित कार्यों में बच्चों के प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ता है.

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एक शोध में कहा गया है कि स्कूल में बच्चे का शैक्षिक प्रदर्शन उसके अभिभावकों की पढ़ाई-लिखाई पर निर्भर करता है. माता-पिता की शैक्षिक स्थिति का वर्किंग मेमोरी या व्यावहारिक स्मरणशक्ति से संबंधित कार्यों में बच्चों के प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ता है.

वर्किंग मेमोरी का मतलब यह है कि एक बच्चा दिमाग में कितनी सूचनाएं रख सकता है, उस पर कितनी क्षमता से विचार कर सकता है और उसपर व्यवहार में कितना अमल कर सकता है. यह क्षमता बचपन से विकसित होती रहती है और यह स्कूल से लेकर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की कुंजी होती है.

शोध में यह भी पाया गया कि बच्चों में 10 साल की अवस्था में व्यावहारिक स्मरण में विभिन्न बच्चों में जो अंतर होता है, वह किशोरावस्था के अंत तक बना रहता है.

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के विद्वान डैनियल हैकमैन ने कहा, "व्यवहारिक स्मरणशक्ति में असमानातओं के विकास के कारणों और प्रक्रियाओं को यदि समझ लिया जाए, तो इसका उपयोग शिक्षा क्षेत्र में किया जा सकता है."

शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यावहारिक स्मरण शक्ति में अंतर 10 साल की उम्र में पैदा होती है और किसी बच्चे में इसकी कमी इसलिए होती है, क्योंकि उसके अभिभावकों की शिक्षा कम होती है.

यह शोध 'चाइल्ड डेवलपमेंट' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.

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