मेघालय का कोंगथोंग गांव यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन (UNWTO) अवॉर्ड के लिए बेस्ट टूरिज्म विलेज की कैटेगरी में नॉमिनेट हुआ है. इस लिस्ट में भारत के दो और गांव भी शामिल है. इसमें मध्य प्रदेश के लाधपुर खास और तेलंगाना के पोचमपल्ली गांव का नाम भी शामिल है. टूरिज्म डेस्टिनेशन के लिहाज से ये गांव पर्यटकों को काफी पसंद आते हैं.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पर एक ट्वीट करते हुए लिखा, 'मध्य प्रदेश के लाधपुरा खास गांव की 'बेस्ट टूरिज्म विलेज' में एंट्री हमारे लिए बड़े गर्व की बात है. इस उपलब्धि के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म और प्रशासन की पूरी टीम को मेरी तरफ से शुभकामनाएं. इसी तरह बेहतर काम करते रहें.'
A moment of pride for us all as Madhya Pradesh's village Ladhpura Khas has been selected for entry to the @UNWTO 'Best Tourism Village'.
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) September 10, 2021
My best wishes to the whole team of @MPTourism and administration on this achievement. Keep up the good work!
लाधपुरा खास गांव मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की ओरछा तहसील में है. टूरिज्म एंड कल्चर के प्रमुख सचिव शेखर शुक्ला इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि राज्य की 'ग्रामीण पर्यटन परियोजना' के तहत अगले पांच वर्षों में 100 गावों को विकसित किया जाएगा.
बेस्ट टूरिज्म विलेज में कोंगथोंग गांव के सिलेक्ट होने पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने भी ट्वीट कर अपनी खुशी जाहिर की है. संगमा ने लिखा, 'मेघालय का कोंगथोंग गांव को भारत के दो अन्य गांवों के साथ UNWTO की बेस्ट टूरिज्म विलेज की सूची में शामिल किया गया है.'
#Meghalaya's whistling village Kongthong is selected for entry to the @UNWTO 'Best Tourism Village' along with 2 other villages in the country.@kishanreddybjp @tourismgoi @meghtourism
— Conrad Sangma (@SangmaConrad) September 8, 2021
शिलॉन्ग से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित कोंगथोंग गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य और विशिष्ट संस्कृति के लिए बहुत लोकप्रिय है. यह गांव ‘व्हिस्लिंग विलेज’ के नाम से भी फेमस है. यह उन 12 गांवों में से एक है जहां बच्चे के जन्म से ही उसके साथ एक विशेष प्रकार की 'ध्वनि' जोड़ दी जाती है. यह ध्वनि जीवन भर उसके साथ रहती है. यह परंपरा आज भी बरकरार है.
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