वेलेंटाइन डे को दो प्यार करने वालों के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दिन लोग अपने पार्टनर के साथ वक्त बिताते हैं, प्यार का इजहार करते हैं, गिफ्ट्स देते हैं और अपने रिश्ते को खास महसूस कराते हैं. लेकिन अब भारत के सिंगल लोगों की सोच प्यार और रिश्तों को लेकर काफी तेजी से बदल रही है. अब प्यार सिर्फ दिखावे, बड़े गिफ्ट या वैलेंटाइन डे तक सीमित नहीं रह गया है. भारत की डेटिंग ऐप Aisle की नई रिपोर्ट ‘Better Because of Love’ के मुताबिक, 53% भारतीय सिंगल्स के लिए वैलेंटाइन डे किसी खास दिन जैसा नहीं, बल्कि आम दिन जैसा ही है. रिपोर्ट बताती है कि आज के दौर में प्यार दिखावे या बड़े रोमांटिक जेस्चर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह खुद को बेहतर इंसान बनाने का जरिया बन गया है.
रिपोर्ट में शामिल 84% लोगों का कहना है कि प्यार ने उन्हें बेहतर इंसान बनाया है. लोगों के मुताबिक रिश्तों से वे ज्यादा धैर्यवान बने, बातचीत करने का तरीका बेहतर हुआ, कॉन्फिडेंस बढ़ा और खुद को बेहतर तरीके से समझने लगे. अब रिश्ते सिर्फ साथ निभाने के लिए नहीं, बल्कि साथ सीखने और इमोशनल रूप से मजबूत बनने का जरिया बन रहे हैं.
प्यार अब सिर्फ वादों का नहीं साथ आगे बढ़ने का नाम है
आज की युवा पीढ़ी, खासकर Gen Z और मिलेनियल्स, दिखावे वाले प्यार की बजाय सुकून, समझ और स्थिरता को ज्यादा अहमियत दे रही है. बड़े-बड़े रोमांटिक इशारों से ज्यादा उन्हें ऐसा रिश्ता चाहिए जो उन्हें सेफ फील कराएं और आगे बढ़ने में मदद करे. रिपोर्ट यह भी बताती है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले 73% ज्यादा प्रैक्टिकल मैचिंग यानी रोजाना की समझ और तालमेल को महत्व देती हैं. कुल मिलाकर, आज का प्यार सिर्फ एहसास नहीं रहा, बल्कि लोगों को बेहतर, समझदार और कॉन्फिडेंस बनाने वाली ताकत बन गया है.
वैलेंटाइन डे का क्रेज अब हो रहा है कम
रिपोर्ट के मुताबिक, 53% सिंगल लोग वैलेंटाइन डे को किसी आम दिन की तरह ही देखते हैं. पुरुषों में से कुछ लोग इस दिन अपने रिश्तों को लेकर सोच-विचार करते हैं. आंकड़ों के अनुसार, पुरुष महिलाओं के मुकाबले 42% ज्यादा इस बात पर विचार करते हैं कि उन्हें रिश्ता चाहिए या नहीं. वहीं, वैलेंटाइन डे को लेकर दबाव महसूस करने वाले पुरुष सिर्फ 1% हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा जीरो है.
बड़े गिफ्ट नहीं, छोटे ख्याल ज्यादा जरूरी
आज की महिलाएं बड़े-बड़े रोमांटिक इशारों से ज्यादा खुद का ख्याल रखना पसंद कर रही हैं. रिपोर्ट बताती है कि वैलेंटाइन डे पर महिलाएं पुरुषों के मुकाबले दोगुनी संख्या में खुद को पैम्पर करती हैं. करीब 54% महिलाएं महंगे सरप्राइज या दिखावे वाले प्यार को पसंद नहीं करतीं, बल्कि रोजमर्रा की मदद और केयर को ज्यादा अहम मानती हैं.
प्यार जताने के तरीके भी अलग हैं जहां, पुरुष क्वालिटी टाइम को सबसे जरूरी मानते हैं, जबकि महिलाएं छोटे-छोटे कामों और मदद के जरिए प्यार महसूस करती हैं. मिलेनियल्स, Gen Z के मुकाबले साथ में वक्त बिताने को ज्यादा महत्व देते हैं.
फ्लर्टिंग में इमोजी का चलन घटा
अब फ्लर्ट करने में इमोजी का इस्तेमाल कम हो रहा है. 50% महिलाएं इमोजी के जरिए फ्लर्ट नहीं करतीं. हालांकि कुछ इमोजी, जैसे बंदर वाला इमोजी और रेड हार्ट, पुरुष महिलाओं के मुकाबले ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. रिपोर्ट बताती है कि Gen Z इमोजी को हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज में इस्तेमाल करती है, जबकि उम्र बढ़ने के साथ लोग साफ शब्दों में बात करना ज्यादा पसंद करने लगे हैं.
मदर टंग में प्यार जताना ज्यादा आसान
अधिकतर लोगों को अपनी मदर टंग में प्यार जताना ज्यादा आसान लगता है. लगभग 79% पुरुष और 69% महिलाएं मानती हैं कि वे अपनी भाषा में भावनाएं बेहतर तरीके से जाहिर कर पाते हैं. Gen Z, मिलेनियल्स के मुकाबले मदर टंग में प्यार जताने को थोड़ा ज्यादा पसंद करती है. हालांकि, भावनाएं गहरी होने के बावजूद ज्यादातर लोग आज भी अंग्रेजी में अपनी फीलिंग्स एक्सप्रेस करते हैं.
उत्तर और दक्षिण भारत में प्यार जताने का अलग अंदाज
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि उत्तर भारत के लोग प्यार को फिल्मों से ज्यादा प्रभावित होकर देखते हैं, जबकि दक्षिण भारत में लोग प्यार को काम और जिम्मेदारी निभाने से जोड़ते हैं. दक्षिण भारत के लोग रिश्तों में दिल के साथ-साथ दिमाग से भी फैसला लेने को ज्यादा जरूरी मानते हैं.
कुल मिलाकर, आज का प्यार दिखावे से दूर, समझ, सुकून और साथ मिलकर आगे बढ़ने का नाम है.