सेव टमाटर की सब्जी ढावा या होटल पर खाना-खाने वालों की पहली पसंद होती है. वहीं जब रोज की तरह सब्जी खाने का मन भी ना हो या फिर घर में कोई सब्जी न हो और बाजार जाने का मन न करे, तो रसोई में सबसे पहला नाम 'सेव टमाटर' का ही आता है. चटपटी ग्रेवी और कुरकुरी सेव का यह मेल आज उत्तर भारत से लेकर पश्चिम भारत तक हर थाली की शान है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मशहूर डिश किसी शेफ के प्रयोग का नतीजा नहीं बल्कि एक मजबूरी की उपज थी? एक महिला ने इस लाजवाब डिश का आविष्कार किया था. तो आइए जानते हैं इस कुरकुरी डिश की दिलचस्प कहानी.
अकाल के दौर में 'आविष्कार'

इतिहासकार तो सीधे–सीधे तारीखें नहीं बताते, लेकिन कुकबुक्स और फूड ब्लॉग्स में इसका जिक्र 19वीं-20वीं सदी के बीच के ग्रामीण और रेगिस्तानी जीवन से जुड़ा मिलता है. सेव टमाटर की सब्जी की शुरुआती कड़ी राजस्थान और मालवा (मध्य प्रदेश) के सूखे इलाकों से जुड़ी मानी जाती है. तो वहीं कुछ इसे गुजरात और राजस्थान की डिश बताते हैं.
फूड ब्लॉगिंग वेबसाइट्स के मुताबिक, पुराने समय में गर्मियों के मौसम में खेतों में हरी सब्जियां उगना बंद हो जाती थीं. फिर ऐसे में वहां के लोग सूखी चीजों जैसे बेसन से बनी सेव, गट्टे और दांल से बनी मंगोड़ी पर निर्भर रहते थे.
कहा जाता है कि एक बार एक गांव में कई दिनों तक ताजी सब्जियां उपलब्ध नहीं थीं तो ऐसे में घर के मुखिया को तेज भूख लगी और रसोई में केवल टमाटर और चाय के साथ खाने वाली बेसन की सेव बची थी.
ऐसे में घर की महिला ने टमाटर की खट्टी ग्रेवी तैयार की और उसमें वह तीखी सेव डाल दी. यह प्रयोग इतना सफल रहा कि देखते ही देखते धीरे-धीरे रेसिपी सबको पसंद आई और आज उसे ही हर ढाबे और होटल की शान माना जाता है.
दूसरे रिपोर्ट बताती है कि सेव टमाटर (या सेव टमाटर नु शाक) गुजरात राज्य के काठियावाड़ क्षेत्र की एक पारंपरिक, मीठी और खट्टी करी है. यह गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में एक मुख्य व्यंजन है, जिसे अक्सर ढाबों और घरों में झटपट और स्वादिष्ट भोजन के रूप में तैयार किया जाता है.
खैर इसकी उत्पत्ति कहीं से भी हुई हो लेकिन कभी मजबूरी में बनी यह सब्जी आज बड़े-बड़े फाइव स्टार होटलों और हाईवे के ढाबों की सबसे ज्यादा बिकने वाली डिशेज में से एक है.
सेव टमाटक वाली यह डिश राजस्थान से शुरू हुई मानी जाती है, लेकिन इसे ग्लोबल पहचान दिलाने का क्रेडिट मध्य प्रदेश के मालवा और रतलाम क्षेत्र को जाता है.
इसका कारण है, रतलाम अपने मशहूर 'लौंग वाली सेव' के लिए जाना जाता है. जब इस तीखी और चटपटी सेव को टमाटर की खटास के साथ मिलाया गया, तो इसका स्वाद दोगुना हो गया.
ढाबों और होटलों ने जब इसे अपने मेन्यू में शामिल किया, तो यह 'सेव टमाटर' के नाम से पूरे देश में मशहूर हो गई.
सेव खुद एक पुराना नमकीन स्नैक है, जो बेसन से बनकर मध्य प्रदेश के रतलाम, राजस्थान और गुजरात में खास लोकप्रिय हुआ और बाद में पूरे देश में फैल गया.
रतलामी सेव की तेज मसालेदार खुशबू और करारापन इतना पसंद किया गया कि वहीं से सेव को सिर्फ स्नैक नहीं, सब्जी का हिस्सा बनाने की शुरुआत बताई जाती है और आगे चलकर 'रतलामी सेव टमाटर की सब्जी' तक सफर पहुंचा.
दूसरी तरफ गुजरात में यही डिश हल्की मीठी–खट्टी बनकर 'सेव टमेटा नूं शाक' के नाम से लोकप्रिय हुई, जो आज भी काठियावाड़ी थाली और ढाबों की रेगुलर डिश है.
सेव टमाटर इतनी फेमस इसलिए हुई क्योंकि एक डिश में ही खट्टा, मीठा और तीखा स्वाद मिलता है. इसमें टमाटर की कुदरती खटास होती है, जिसे संतुलित करने के लिए अक्सर थोड़ा सा गुड़ या चीनी डाली जाती है. ऊपर से जब लहसुन और अदरक का तड़का लगता है और अंत में कुरकुरी बेसन की सेव डाली जाती है तो यह हर किसी को पसंद आती है.
आज रेस्टोरेंट्स में कई तरह की सेव टमाटर की सब्जी मिलती है और इसके नए-नए वर्जन भी सामने आ गए हैं. कहीं इसे दूध के साथ मलाईदार बनाया जाता है तो कहीं लहसुन की चटनी के साथ बेहद तीखा बनाया जाता है.