scorecardresearch
 

जिम जाने वालों के लिए कितना जरूरी है प्रोटीन पाउडर? सेलेब्रिटी ट्रेनर ने बताई हकीकत

आमिर खान, अर्जुन कपूर और रणबीर कपूर जैसे कई सेलेब्स को ट्रेनिंग देने वाले कोच दीपेश भट्ट ने प्रोटीन पाउडर के बारे में बताया है कि प्रोटीन सप्लीमेंट लेना सही है या नहीं, इस बारे में आर्टिकल में बताएंगे.

Advertisement
X
प्रोटीन पाउडर वेजिटेरियन सप्लीमेंट है. (Photo: Instagram/shivoham & Pixabay)
प्रोटीन पाउडर वेजिटेरियन सप्लीमेंट है. (Photo: Instagram/shivoham & Pixabay)

Protein powder supplement: फिटनेस इंडस्ट्री में प्रोटीन पाउडर के बारे में अक्सर आपने मिली-जुली बातें सुनी होंगी. कोई कहता है इन्हें लेना सही है तो कोई कहता है, इनसे किडनी पर बुरा असर होता है. दरअसल, प्रोटीन पाउडर एक ऐसा सप्लीमेंट है जो शरीर की प्रोटीन जरूरत पूरी करने में मदद करता है. यह दूध से मिलने वाले व्हे, दूध के ठोस हिस्से केसिन, सोया, मटर या दालों से बनाया जाता है. विभिन्न सोर्सों से प्रोटीन निकालकर, सुखाकर और पीसकर पाउडर बनाया जाता है. इसे पानी या दूध में मिलाकर पिया जाता है. ऐसे में आमिर खान, अर्जुन कपूर और रणबीर कपूर जैसे कई सेलेब्स को ट्रेनिंग देने वाले कोच ने साइंटिफिक तरीके से समझाया है कि प्रोटीन सप्लीमेंट लेना सही है या नहीं.

प्रोटीन लेना सही है या नहीं?

सेलेब्रिटी कोच दीपेश भट्ट ने अपनी बुक में बताया है, 'दुनिया में कई ऐसे इंटरनेशनल एथलीट हैं जो शाकाहारी वेगन हैं और अपनी डाइट (सॉलिड मील) से ही प्रोटीन लेते हैं और फिर भी वर्ल्ड क्लास परफॉर्म करते हैं. वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वर्कआउट से पहले, वर्कआउट के दौरान और वर्कआउट के बाद प्रोटीन सप्लीमेंट लेते हैं लेकिन उतनी अच्छी परफॉर्मेंस नहीं दे पाते. हममें से अधिकतर लोग इन दोनों के बीच में आते हैं और कुछ इतने सीरियस हो जाते हैं कि प्रोटीन पाउडर खरीद लेते हैं. मेरा मानना है कि सप्लीमेंट महंगे होते हैं इसलिए वो फिटनेस पर बोझ नहीं बनने चाहिए. फिटनेस किफायती होनी चाहिए, न कि जेब पर बोझ.'

Advertisement

प्रोटीन सप्लीमेंट क्या काम करते हैं?

कोच दीपेश ने बुक में बताया है, 'प्रोटीन की जरूरत मसल्स ग्रोथ और ट्रेनिंग के दौरान होने वाले टिश्यूज को रिपेयर करने के लिए होती है लेकिन अगर कोई व्यक्ति अच्छी डाइट लेता है और हफ्ते में सिर्फ 2 से 3 दिन जिम जाता है तो उसे अंडे, पनीर, सोया, दही, मीट और नट्स जैसी चीजों से ही पर्याप्त प्रोटीन मिल जाता है. न्यूट्रिशन और हेल्थ रिसर्च बताती हैं कि जो लोग औसतन हफ्ते में 2 बार वर्कआउट करते हैं, उन्हें प्रोटीन सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती.'

हालांकि, दीपेश यह भी स्वीकार करते हैं कि जिम में ट्रेनर्स से बात करने पर अक्सर इसके विपरीत ही सलाह सुनने को मिलती है. इसी वजह से पिछले कुछ सालों में प्रोटीन शेक और प्रोटीन बार की बिक्री तेजी से बढ़ी है.

'चॉकलेट बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अब प्रोटीन बार बेच रही हैं. लोग कार्बोहाइड्रेट से डरने लगे हैं और प्रोटीन को अधिक अहमियत दे रहे हैं. इस गलतफहमी में कि अगर वे अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट कम कर देंगे तो अपने-आप शरीर में फैट बर्न अधिक होगा और वजन तेजी से कम होगा.'

कितना प्रोटीन लेना चाहिए?

इंटरनेशनल गाइडलाइंस का जिक्र करते हुए दीपेश ने बताया, 'अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन रोजाना 0.8 ग्राम प्रतिकिलो प्रोटीन लेने की सलाह देता है. वहीं पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के मुताबिक, 19 से 64 साल के पुरुषों को 55.5 ग्राम और महिलाओं को 45 ग्राम प्रोटीन रोजाना लेना चाहिए.'

Advertisement

'न्यूट्रिशनिस्ट्स का मानना है कि जो लोग हफ्ते में सिर्फ 2-3 दिन जिम जाते हैं, उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती लेकिन जो एथलीट्स हैं या हाई इंटेंसिटी ट्रेनिंग लंबे समय तक करते हैं, उन्हें अतिरिक्त प्रोटीन की जरूरत पड़ती है. मैं यह भी मानता हूं कि प्रोटीन सप्लीमेंट का एक मनोवैज्ञानिक असर होता है जो महसूस कराता है कि हम अपनी फिटनेस में सुधार कर रहे हैं.'

हालांकि वो चेतावनी भी देते हैं कि किडनी से जुड़ी बीमारी वालों को एक्स्ट्रा प्रोटीन लेने से सावधान रहना चाहिए और प्रोटीन शेक या बार को कभी भी खाने का रिप्लेसमेंट नहीं बनाना चाहिए. शरीर को फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ अधिक पसंद हैं ना कि प्रोटीन सप्लीमेंट.'

मैं लेता हूं प्रोटीन शेक

दीपेश का मानना है, 'मैं प्रोटीन शेक लेता हूं क्योंकि मैं रोजाना दिन में करीब 2 से 3 बार हाई इंटेंसिटी पर ट्रेनिंग करता हूं इसलिए मुझे डाइट से ज्यादा प्रोटीन की जरूरत होती है. अगर आप भी इतनी ट्रेनिंग करते हैं तो आप भी ले सकते हैं. लेकिन उसके पहले अपने डॉक्टर या सर्टिफाइड ट्रेनर की सलाह जरूर लें.'

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement