World Liver Day 2026: लिवर हेल्थ और लिवर संबंधी बीमारियों के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे सुधार लाकर भी लिवर की बढ़ती समस्या को कम किया जा सकता है. अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि वे तो शराब पीते ही नहीं हैं तो उन्हें फैटी लिवर की शिकायत नहीं होगी. लेकिन डॉक्टर्स का मानना है कि सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतें भी लिवर को नुकसान पहुंचा रही हैं. अच्छी बात यह है कि समय रहते इन आदतों को बदलकर लिवर को दोबारा स्वस्थ बनाया जा सकता है. तो आइए वो कौन सी आदतें हैं, उनके बारे में भी जान लीजिए.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोजाना खाए जाने वाले प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अनहेल्दी फैट्स लिवर के लिए काफी बड़ा जोखिम हैं. ये चीजें धीरे-धीरे आपके लिवर में फैट जमा करने लगते हैं जिससे फैटी लिवर जैसी समस्या पैदा होती है. डॉक्टरों के अनुसार संतुलित बैलेंस डाइट जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट शामिल हों, लिवर को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है.
नींद को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है लेकिन यह लिवर के लिए बेहद जरूरी है. पर्याप्त नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है. यदि नींद पूरी नहीं होती तो मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और लिवर की कार्यक्षमता कम होने लगती है. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कम नींद लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है जिससे लिवर को नुकसान हो सकता है.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव आम हो गया है लेकिन इसका असर लिवर पर भी पड़ता है. अधिक तनाव लेने से शरीर में सूजन और हार्मोनल इम्बैलेंस होता है जिससे लिवर हेल्थ पर भी असर होता है. डॉक्टर्स मानते हैं कि सभी को अपनी मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखना जरूरी होता है क्योंकि ये लिवर को सुरक्षित रखने का तरीका है.
डॉक्टरों के मुताबिक, अच्छी खबर यह है कि लिवर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है. अगर समय रहते खानपान सुधारा जाए, नींद पूरी ली जाए और तनाव कम किया जाए, तो लिवर की हालत में सुधार संभव है. छोटे-छोटे बदलाव जैसे रोजाना एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट और नियमित दिनचर्या अपनाकर लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है.
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित है. इसे किसी भी तरह की मेडिकल सलाह या इलाज का विकल्प न समझें.)