Boiled Potato Water Reuse: ज्यादातर घरों में अक्सर आलू उबाले जाते हैं और आलू उबालने के बाद उसका पानी फेंक दिया जाता है. ये बहुत ही आम बात है ना? अगर आप भी आलू उबालने के बाद बचा हुआ पानी बिना सोचे-समझे नाली में बहा देते हैं, तो हो सकता है कि आप एक बेहद काम की चीज को बेकार समझकर फेंक रहे हों. आलू उबालने के बाद बचे पानी में बहुत सारा स्टार्च होता है, जो आपकी एक मुश्किल को आसान बना सकता है.
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक घरेलू हैक तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि उबले आलू का पानी काली पड़ चुकी चांदी की चमक वापस लाने में मदद कर सकता है. दिलचस्प बात ये है कि इस ट्रिक के लिए आपको पानी में कोई महंगा सिल्वर क्लीनर या खास केमिकल मिलाने की भी जरूरत नहीं पड़ती. चलिए जानते हैं कि कैसे आप उबले आलू के बचे पानी से पुरानी और फीकी दिखने वाली चांदी की जूलरी या बर्तनों को फिर से चमका सकते हैं. अगर आपके घर में भी चांदी के गहने या बर्तन काले पड़ गए हैं, तो यह आसान और किफायती उपाय आपके काम आ सकता है.
कैसे काम करता है ये घरेलू हैक?
उबले आलू के पानी में खूब सारा स्टार्च मौजूद होता है. वायरल हैक कि मानों तो जब इसमें थोड़ा सा सफेद सिरका मिलाया जाता है, तो ये मिश्रण चांदी की सतह पर जमी कालिमा को लूज करने में मदद करता है. यही वजह है कि कई लोग इसे चांदी की जूलरी और बर्तनों की सफाई के लिए इसे इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.
कैसे करें इस्तेमाल?
1. सबसे पहले आलू उबालने के बाद बचा गर्म पानी अलग कर लें.
2. इसके बाद इसमें 1 चम्मच सफेद विनेगर मिला दें.
3. अब काली पड़ चुकी चांदी की जूलरी या बर्तन को इसमें डाल दें.
4. इसे पानी में ऐसे डुबाएं कि ये पूरी तरह से उसमें डूब जाए. इसे करीब 15 मिनट तक इसे ऐसे ही रहने दें.
5. बाद में निकालकर मुलायम कपड़े से साफ कर लें.
15 मिनट में दिख सकता है फर्क
इस तरह से उबले आलू के पानी में चांदी की जूलरी या बर्तन भिगोने से सिर्फ 15 मिनट में चांदी की कालिमा काफी हद तक कम हो सकती है और उसकी चमक पहले से बेहतर दिखाई देने लगती है. हालांकि, अगर चांदी पर पुरानी जिद्दी काली परत है तो उसपर असर अलग दिख सकता है. हो सकता है वो पहली बार में थोड़ी कम साफ हो.
इस्तेमाल करते वक्त ध्यान रखें ये बातें
अगर चांदी की जूलरी या बर्तन में कोई नाजुक पत्थर, मोती या स्पेशल कोटिंग लगी हो, तो इस तरीके को अपनाने से पहले थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. इसे इस्तेमाल करने से पहले छोटे हिस्से पर टेस्ट करना बेहतर माना जाता है.