How to Make Pahadi Lagdi: भारत के हर राज्य की खाने की अपनी एक खास परंपरा है, जो वहां की संस्कृति, मौसम और लोगों की लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है. इंडिया के हर शहर की एक खास डिश होती है, जो आज भी लोग चाव से खाते हैं. नमकीन चीला तो आपने बहुत खाया होगा,लेकिन उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल इलाकों में बनने वाला मीठा चीला आपने कभी नहीं खाया होगा, जो आपके मुंह को मिठास से भर देगा.
अगर आप भी अलग-अलग खाने के शौकीन हैं तो आपको यह पहाड़ी डिश बहुत पसंद आएगी. खासकर बच्चों की तो यह फेवरेट बन जाएगी और सबसे अच्छी बात यह है कि इसे गेहूं के आटे से बनाया जाता है. इसलिए इसे खाना हेल्दी भी होता है और इसे खाने से कोई नुकसान नहीं होता है.
इस पहाड़ी डिश को लगड़ी कहते हैं और यह एक पारंपरिक, मीठा और पौष्टिक नाश्ता है, जिसे पीढ़ियों से घरों में बनाया जाता रहा है. लगड़ी देखने में पैनकेक जैसी लगती है, लेकिन इसका स्वाद और बनाने की रेसिपी इसे खास बनाती है. इसे गेहूं के आटे, गुड़ या चीनी और पानी से तैयार की जाती है. कई घरों में इसमें थोड़ा घी, इलायची या सौंफ भी मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है.
क्या है लगड़ी की खासियत?
पहाड़ी लगड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी है. इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा इंग्रेडिएंट्स या समय की जरूरत नहीं होती. यही कारण है कि यह गांवों में सुबह के नाश्ते या शाम की हल्की भूख के लिए जल्दी तैयार कर लिया जाता है.
यह सिर्फ टेस्टी ही नहीं, बल्कि पौष्टिक भी है. गेहूं का आटा शरीर को एनर्जी देता है, जबकि गुड़ आयरन और मिनरल्स का अच्छा सोर्स माना जाता है. इसलिए यह बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है.
कैसे बनती है लगड़ी?
लगड़ी बनाने के लिए सबसे पहले गुड़ को पानी में घोलकर मीठा घोल तैयार किया जाता है. फिर उसमें गेहूं का आटा मिलाकर एक स्मूद बैटर बनाया जाता है. बैटर न ज्यादा गाढ़ा हो और न ज्यादा पतला हो. इसके बाद तवा गर्म करके हल्का घी लगाएं और बैटर को पैनकेक की तरह फैला दें. दोनों तरफ से गोल्डन होने तक पकाएं. तैयार लगड़ी को घी के साथ गर्मागर्म डालकर परोसें.
आज भी क्यों है पॉपुलर?
आज के दौर में जब लोग हेल्दी और होममेड खाने की ओर लौट रहे हैं, तब लगड़ी जैसे पारंपरिक डिश फिर से चर्चा में हैं. यह बिना किसी प्रिजर्वेटिव के घर पर बनती है और बच्चों के लिए बाजार की मिठाइयों का बेहतर ऑप्शन है.