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कूलर में लोग क्यों रखते हैं मिट्टी का मटका? वायरल हो रहा है ये देसी जुगाड़!

अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी में घर भी भट्टी की तरह तप रहे हैं और इसकी वजह से एसी और कूलर का इस्तेमाल लोगों ने शुरू कर दिया है. घर के बाहर लू और अंदर उमस से हालत खराब है, कूलर चलाने से भी उमस बढ़ रही है तो आप इससे बचने के लिए देसी जुगाड़ कर सकते हैं.

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समर सीजन में मटके का पानी सही होता है. (PHOTO:ITG/AI)
समर सीजन में मटके का पानी सही होता है. (PHOTO:ITG/AI)

अप्रैल का महीना खत्म होते-होते गर्मी अपने प्रचंड रूप में आ चुकी है. दोपहर की तपती धूप, हवा में घुली उमस और चलती लू ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. बाहर निकलने का मन नहीं करता, और घर के अंदर भी ऐसा लगता है जैसे दीवारें ही आग उगल रही हों. पंखा सिर्फ गर्म हवा घुमा रहा है और कूलर भी राहत नहीं दे पा रहा. ऐसे में हर कोई किसी ऐसे जुगाड़ की तलाश में है, जो कम खर्च में ज्यादा ठंडक दे सके.

इसी बीच एक पुराना देसी तरीका फिर से चर्चा में बना हुआ है, वो है कूलर के अंदर मटका रखना. भले ही यह सुनने में अजीब लगे, लेकिन यह छोटा सा उपाय गर्मी में बड़ी राहत दे सकता है. आखिर कूलर में मटका रखने से क्या होता है और लोग ऐसा क्यों करते हैं. 

चिलचिलाती गर्मी में लोग ठंडी हवा पाने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं, कूलर में मटका रखने का यह तरीका भी उन्हीं में से एक है. जो सालों से आजमाया जा रहा है, खास बात यह है कि यह आसान होने के साथ-साथ बेहद किफायती भी है.

कूलर के अंदर एक छेद करके मटका रखा जाता है और उसके अंदर कूलर की टंकी रखते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियोज काफी वायरल हो चुके हैं, जिसमें लोग मटके को कूलर के अंदर रख रहे थे और दावा किया जा रहा था कि इससे कूलर की हवा ज्यादा चिल्ड हो जाती है. चलिए जानते हैं कि आखिर यह देसी जुगाड़ में कितना कारगर है.

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इसके पीछे का 'देसी विज्ञान'

मिट्टी का मटका सदियों से हमारा 'प्राकृतिक रेफ्रिजरेटर' रहा है. विज्ञान की भाषा में इसे इवेपोरेटिव कूलिंग कहते हैं.

मटके की सतह पर मौजूद हजारों छोटे छेदों से जब पानी बाहर आता है, तो वह वाष्पित होने के लिए आसपास की गर्मी सोख लेता है.

इससे मटके के अंदर का पानी ठंडा हो जाता है. लोग मानते हैं कि अगर कूलर की टंकी का पानी मटके के संपर्क में रहेगा, तो वह भी ठंडा होगा और जाली से गुजरने वाली हवा का तापमान गिर जाएगा.

क्या वाकई यह आईडिया काम करता है?

लाइफस्टाइल एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों की मानें तो इस सिक्के के दो पहलू हैं.

  • मटका पानी के तापमान को कुछ डिग्री तक कंट्रोल जरूर रख सकता है, लेकिन यह कूलर को AC नहीं बना सकता. 
  • मटके को ठंडा होने के लिए ताजी और सूखी हवा की जरूरत होती है. कूलर के बंद चैंबर के अंदर नमी इतनी ज्यादा होती है कि मटका अपना काम पूरी ताकत से नहीं कर पाता.
  • कूलर की टंकी में मटका रखने से पानी की शक्ति कम हो जाती है, जिससे आपको बार-बार पानी भरने की जरूरत पड़ सकती है.

इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप फिर भी इस देसी नुस्खे को ट्राई करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ख्याल रखें.

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  • पुराने मटके के छेद बंद हो जाते हैं, इसलिए नया कोरा मटका ही इस्तेमाल करें.
  • मटके को कूलर में रखने से पहले अच्छी तरह धो लें ताकि मिट्टी के कण पंप को जाम न करें.
  • कूलर को ऐसी जगह रखें जहां से उसे ताजी हवा मिले, तभी यह उपाय कुछ असर दिखा पाएगा.

असली ठंडक के लिए क्या करें?

अगर मटका रखने के बाद भी राहत न मिले, तो क्रॉस वेंटिलेशन पर ध्यान दें. कूलर चलाते समय कमरे की एक खिड़की खुली रखें ताकि अंदर की नमी बाहर निकल सके.

उमस भरे मौसम में कूलर में बर्फ डालना मटका रखने से कहीं ज्यादा प्रभावी साबित होता है. इससे पूरा कमरा जल्दी ठंडा हो जाएगा.

कूलर में मटका रखना एक 'नॉस्टैल्जिक' और सस्ता प्रयोग तो है, पर बहुत ज्यादा उम्मीदें पालना सही नहीं होगा. आखिर में, हमारी देसी मिट्टी की खुशबू और थोड़ी सी ठंडी हवा मन को सुकून तो दे ही देती है.

 

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