इंसान अपनी कुल उम्र का लगभग 30-40 प्रतिशत हिस्सा बिस्तर पर सोते हुए गुजारता है लेकिन अधिकतर लोग सोने वाले गद्दे पर अधिक धअयान नहीं देते और जब भी घर के लिए नया गद्दा खरीदने या बनवाने की बात आती है तो वो अक्सर उसके फैब्रिक और डिजाइन पर ध्यान देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गद्दे के अंदर भरी जाने वाली रुई आपकी नींद और सेहत को सीधे प्रभावित करती है. भारत में पारंपरिक रूप से गद्दों में 2 तरह की रुई का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है, सेमल की रुई (Kapok Cotton) और नॉर्मल कॉटन (Regular Organic Cotton). लोग अक्सर इन दोनों के बीच कंफ्यूज रहते हैं कि कौन सी रुई अधिक कंफर्ट देगी. तो आइए आज हम आपको दोनों में अंतर बताते हैं.
क्या होती है सेमल की रुई?
सेमल की रुई नेचुरल फाइबर होती है जो सेमल के पेड़ (Ceiba Pentandra) के फल से मिलती है. यह रुई बेहद हल्की, चमकदार और छूने में सिल्क जैसी मुलायम होती है. सेमल की रुई नॉर्मल कॉटन के मुकाबले 8 गुना तक ज्यादा हल्की होती है. इसके प्राकृतिक गुणों के कारण इसमें किसी भी तरह के केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है. यह गद्दे को एक नेचुरल बाउंस और सपोर्ट देती है जिससे सोते समय शरीर को काफी आराम मिलता है.
नॉर्मल कॉटन के बारे में जानें
नॉर्मल या रेगुलर कॉटन सदियों से गद्दों के लिए इस्तेमाल होता आ रहा है. शुरुआत में इस रुई से बने गद्दे काफी सॉफ्ट और आरामदायक लगते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कॉटन एक ब्रीदेबल और ड्यूरेबल मटेरियल है जो हवा के सर्कुलेशन को बेहतर बनाए रखता है. हालांकि, रेगुलर कॉटन का सबसे बड़ा माइनस पॉइंट यह है कि समय के साथ इसके छोटे फाइबर आपस में चिपकने लगते हैं जिससे गद्दे में गांठें बन जाती हैं और गद्दा सख्त हो जाता है.
पीठ दर्द और पोस्चर के लिए कौन सी रुई है बेहतर?
यदि आप अक्सर कमर या पीठ के दर्द से परेशान रहते हैं तो गद्दे की रुई का चुनाव आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है. काना मेट्रेस के एक्सपर्ट्स के अनुसार, सेमल यानी कपोक रुई से बने गद्दे शरीर के शेप और स्लीपिंग पोजीशन के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं. यह आपकी रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा बनाए रखने में मदद करता है जिससे जोड़ों और हिप्स पर दबाव कम पड़ता है. वहीं दूसरी ओर नॉर्मल कॉटन का गद्दा पुराना होने पर बीच में से दब जाता है जिससे बॉडी पोस्चर बिगड़ सकता है.