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Fish vs chicken: चिकन या मछली? कौन है प्रोटीन का बेहतर सोर्स, मसल बनाने के लिए क्या खाएं

Fish vs Chicken For Muscle Growth: प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है और यह हमें खाने-पीने की चीजों से आसानी से मिल जाता है. आज हम इस खबर में जानेंगे कि मसल्स बनाने के लिए क्या खाना ज्यादा बेहतर मछली या फिर चिकन.

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चियन या मछली, मसल्स बनाने के लिए क्या खाना ज्यादा बेहतर है? (Photo- Pixabay)
चियन या मछली, मसल्स बनाने के लिए क्या खाना ज्यादा बेहतर है? (Photo- Pixabay)

मसल्स बनाने और उन्हें रिपेयर करने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है, खासकर उन लोगों के लिए जो रेगुलर वर्कआउट या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं. जो लोग नॉनवेज खाते हैं, उनके लिए मछली और चिकन प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स हैं. दोनों में फैट कम होता है और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं. लेकिन सवाल यह है कि मसल्स ग्रोथ के लिए इनमें से कौन बेहतर है और क्यों.
 

प्रोटीन की मात्रा 
चिकन ब्रेस्ट को लीन प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स माना जाता है. 100 ग्राम चिकन में लगभग 25–27 ग्राम प्रोटीन होता है. इसमें सभी जरूरी अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं जो मसल्स को रिपेयर करने और बढ़ाने में मदद करते हैं. वहीं मछली में भी अच्छी क्वालिटी का प्रोटीन होता है. अलग-अलग किस्म की मछलियों में 100 ग्राम में लगभग 20–25 ग्राम प्रोटीन मिलता है. चिकन की तरह मछली भी प्रोटीन का बेहतर सोर्स है और मसल्स बनाने में मदद करती है.

ओमेगा-3 फैटी एसिड 
मछली का सबसे बड़ा फायदा इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड है. ये मसल्स की ग्रोथ को सपोर्ट करते हैं, एक्सरसाइज के बाद होने वाले दर्द को कम करते हैं और जोड़ों की सेहत को बेहतर रखते हैं. इससे लंबे समय तक ट्रेनिंग करना आसान हो जाता है. वहीं, चिकन में नेचुरली ओमेगा-3 फैटी एसिड नहीं होते, जब तक कि वह खास तौर पर फोर्टिफाइड न हो.

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डाइजेशन और एब्जॉर्प्शन
मछली आमतौर पर जल्दी पच जाती है, क्योंकि इसके सॉफ्ट फाइबर होते हैं. इसलिए यह जल्दी प्रोटीन लेने के लिए हेल्दी ऑप्शन मानी जाती है. चिकन को डाइजेस्ट होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है लेकिन यह धीरे-धीरे अमीनो एसिड रिलीज करता है, जिससे मसल्स की मरम्मत लंबे समय तक होती रहती है.

कैलोरी और वजन कंट्रोल
स्किनलेस चिकन ब्रेस्ट में कैलोरी कम होती है, इसलिए यह बिना फैट बढ़ाए मसल्स बनाने के लिए सही रहता है. फैटी फिश में हेल्दी फैट की वजह से कैलोरी थोड़ी ज्यादा होती है लेकिन यह शरीर की रिकवरी और ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद होती है, खासकर जब ट्रेनिंग ज्यादा हार्ड हो.

अमीनो एसिड 
मछली और चिकन दोनों में जरूरी अमीनो एसिड्स होते हैं, जिनमें ल्यूसीन भी शामिल है. ल्यूसीन मसल्स ग्रोथ शुरू करने में अहम भूमिका निभाता है. चिकन में ल्यूसीन की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है, इसलिए यह वर्कआउट के बाद रिकवरी के लिए ज्यादा असरदार माना जाता है. मछली में ल्यूसीन थोड़ा कम होता है. 

मसल ग्रोथ के लिए कौन बेहतर?
मसल्स बनाने के लिए मछली और चिकन दोनों ही बेहतरीन प्रोटीन सोर्स हैं. अगर आपका लक्ष्य कम फैट के साथ लीन मसल्स बनाना है तो चिकन बेहतर ऑप्शन है. वहीं अगर आप मसल्स के साथ-साथ बेहतर रिकवरी, जोड़ों की सेहत और सूजन कम करना चाहते हैं तो मछली ज्यादा फायदेमंद है. बेहतर होगा कि आप दोनों को ही अपनी डाइट में शामिल करें. चिकन खाने से लीन प्रोटीन मिलेगा और जबकि मछली खाने से मसल्स की रिकवरी तेजी से होगी.

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नोट: यह खबर सिर्फ जानकारी के लिए है अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लेना न भूलें.

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