गुड़ भारतीयों की डाइट का सबसे अहम हिस्सा रहा है. चीनी की तुलना में गुड़ अधिक प्रभावी साबित हुआ है क्योंकि यह तुरंत एनर्जी देता है, इंसुलिन रेजिस्ट करता है, पेट की चर्बी कम करता है और अन्य बीमारियों की रोकथाम करता है. मीठे स्वाद के साथ यह बॉडी को गर्म रखने, खून बढ़ाने और पाचन दुरुस्त करने में मदद करता है. मार्केट में कई तरह के गुड़ आते हैं जिन्हें देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि काले गुड़ और पीले गुड़ में से कौन सा गुड़ बेस्ट है. दोनों दिखने में अलग जरूर हैं लेकिन फर्क सिर्फ इनके रंग का नहीं, इनके न्यूट्रिशन और प्योरिटा का भी होता है. तो आइए दोनों गुड़ों में क्या अंतर हैं, इस बारे में जान लीजिए.
काले गुड़ को गन्ने के रस से बनाया जाता है. इसमें बिना किसी केमिकल प्रोसेस से गन्ने के रस को गाढ़ा करके तैयार किया जाता है. गन्ने के रस को भट्टी पर तब तक पकाया जाता है, जब तक इसका रंग गहरा भूरा या लगभग काला न हो जाए.
काले गुड़ में गन्ने के रेस में मौजूद मिठास मोलासेस मौजूद होता है जिससे इसमें आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में रहते हैं. यही कारण है कि काला गुड़ खून की कमी यानी एनीमिया वाले लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है.
पीला गुड़ बनाने के दौरान गन्ने के रस को साफ करने के लिए अक्सर हाइड्रोस यानी सोडियम हाइड्रोसल्फाइट जैसे केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है ताकि इसका रंग हल्का और टेक्सचर चिकना दिखे.
पीला गुड़ देखने में साफ और अच्छा जरूर लगता है लेकिन केमिकल प्रोसेसिंग से इसमें मौजूद कई जरूरी मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं. कुछ मामलों में इन केमिकल्स से एलर्जी या पेट संबंधी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, काला गुड़ नेचुरल होता है और पोषक तत्वों से भरपूर होता है. यह शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाता है, त्वचा में निखार लाता है, थकान दूर करता है. हालांकि एक्सपर्ट काले गुड़ को भी सीमित मात्रा में खाने की सलाह देते हैं क्योंकि यह शुगर का ही प्राकृतिक रूप है. डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
(Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या डाइट में किसी भी बदलाव से पहले हमेशा अपने डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या डायटीशियन से सलाह जरूर लें.)