
Isha Ambani Met Gala 2026: अंबानी परिवार की लेडीज अपने फैशन और स्टाइल से लोगों को इंप्रेस करती रहती हैं. मंच चाहे जो हो अंबानी परिवार की महिलाएं अपनी छाप छोड़ने में सफल हो जाती हैं. इसका लेटेस्ट उदाहरण ईशा अंबानी बनीं, जब वो दुनिया के सबसे बड़े फैशन इवेंट्स में से एक मेट गाला 2026 के रेड कार्पेट पर साड़ी पहनकर चलीं. उन्होंने अपनी मौजूदगी से सबका ध्यान खींच लिया. हर साल की तरह इस बार भी उनका लुक चर्चा में रहा, लेकिन हैरानी की बात ये है कि इस बार उनकी साड़ी और जूलरी के अलावा भी एक चीज थी, जो सुर्खियों में रही. वो हाथ उनके हाथ में दिखा आम. जी हां, जैसे ही ईशा ने आम हाथ में लेकर रेड कार्पेट पर कदम रखा, वैसे ही कुछ सेकंड में ये सबकी जुबान पर था.
पहली नजर में लोगों को लग रहा था कि ईशा अंबानी बाजार में मिलने वाला असली आम लेकर मेट गाला पहुंची हैं, लेकिन जैसे-जैसे इसकी सच्चाई सामने आई इसमें लोगों की दिलचस्पी और बढ़ती चली गई. दरअसल, ये कोई आम नहीं बल्कि करीब 20 साल पुराना एक खास आर्टवर्क है, जिसकी कीमत सुनकर आपके पैरों तले जमीन खिसक सकती है. ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि ईशा का 'आम' बिल्कुल भी आम नहीं है. चलिए जानते हैं इस आम की खासियत और कीमत.
ईशा का 'आम' बना टॉक ऑफ द टाउन
ईशा अंबानी जब रेड कार्पेट पर उतरीं, तो सबके मन में एक ही सवाल था कि क्या उन्होंने हाथ में असली आम पकड़ा है? अगर आप भी उन्हीं में से एक थे, तो आपको ये भी लगा होगा कि ये कोई कीमती क्लच या बैग होगा. लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल, ये कोई मामूली फल या बैग नहीं, बल्कि एक बेशकीमती आर्टवर्क है. ईशा ने मशहूर भारतीय कलाकार सुबोध गुप्ता द्वारा बनाई गई आम की स्टील से बनी एक मूर्ति (स्कल्पचर) को बतौर एक्सेसरी मेट गाला 2026 में कैरी करना चुना. ईशा ने खुद रेड कार्पेट पर बातचीत के दौरान रिवील किया कि ये सुबोध गुप्ता का कोई लेटेस्ट आर्टवर्क नहीं है, बल्कि इसे लगभग 20 साल पहले तैयार किया गया था. इसे हाथ से पेंट करके बनाया गया था ताकि ये बिल्कुल असली पके हुए आम जैसा दिखे. ईशा ने इसे एक ट्रांसपेरेंट बैग के अंदर रखा था, जिसकी मदद से वो इसे आसानी से कैरी कर पा रही थीं.

'आम' की कीमत सुनकर चौंक जाएंगे आप!
ईशा जिस आम को बहुत ही कैजुअल अंदाज में मेट गाला रेड कार्पेट पर फ्लॉन्ट कर रही थीं उसकी कीमत मामूली नहीं है. इसकी कीमत लगभग $100,000 बताई जा रही है यानी करीब 95 लाख रुपये. सुबोध गुप्ता द्वारा बनाए गए इस हाई-वैल्यू आर्ट पीस ने भारतीयों के साथ ही विदेशियों का ध्यान भी खींच लिया. बता दें, सुबोध गुप्ता अपनी कला में रोजमर्रा की चीजों को खास अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं. स्टील से बने इस स्कल्पचर का वजन करीब 800 ग्राम बताया जा रहा है.
इस 'आम' की कीमत सिर्फ इसके मटेरियल या लुक की वजह से नहीं है, बल्कि इसके पीछे छुपे आइडिया और सोच की वजह से भी है. सुबोध गुप्ता ‘आम’ शब्द को दो मायनों में देखते हैं एक फल और दूसरा 'आम आदमी'. यही सोच इस आर्टवर्क को और खास बनाती है. जब ईशा इसे मेट गाला जैसे इंटरनेशनल मंच पर लेकर पहुंचीं, तो ये सिर्फ एक स्टाइल स्टेटमेंट नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, स्वाद और पहचान का प्रतीक बन गया. जहां ज्यादातर सेलेब्रिटी महंगे डिजाइनर क्लच कैरी करते हैं, वहीं ईशा ने भारत के राष्ट्रीय फल को आर्ट के रूप में चुनकर दिखा दिया कि सादगी भी सबसे खास हो सकती है.

सोने के तारों से बनी 6 गज की साड़ी
अब आउटफिट की बात करें तो ईशा ने इस खास मौके के लिए डिजाइनर गौरव गुप्ता और स्वदेश की बनाई सुनहरी साड़ी चुनी थी. इस बनारसी टिशू सिल्क साड़ी को असली सोने के तारों से बुना गया था. साड़ी पर पिछवाई पेंटिंग से इंस्पायर्ड खूबसूरत डिजाइन बनाए गए थे, जिन्हें हाथ से पेंट करके उनपर कढ़ाई की गई है. इसी वजह से ये और भी खास और यूनिक लग रही थी. इसे 50 से ज्यादा कारीगरों ने करीब 1200 घंटों में बड़ी मेहनत से तैयार किया था. इसके साथ उन्होंने गौरव गुप्ता के सिग्नेचर स्टाइल वाला एक स्कल्प्टेड केप भी था, जो इसे एक रॉयल लुक दे रहा था.
1800 कैरेट के हीरे-पन्ना से जड़ा ब्लाउज
आम के बाद जिस चीज ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वो था ईशा अंबानी का ब्लाउज. उन्होंने इस खूबसूरत साड़ी को किसी नॉर्मल ब्लाउज के साथ नहीं, बल्कि हीरे-पन्ने से जड़े ब्लाउज के साथ पहना था. इसमें उनकी मां नीता अंबानी के कलेक्शन के करीब 1800 कैरेट के हीरे, पन्ना, पोलकी और कुंदन जड़े हुए थे. इतना ही नहीं, इसके पीछे की तरफ एक सरपेच भी लगाया गया था, जो कभी हैदराबाद के निजाम के खजाने का हिस्सा हुआ करता था.

कागज और तांबे से बना 'जैस्मीन गजरा'
ईशा अंबानी के हेयरस्टाइल को भी एक आर्टपीस का रूप दिया गया था. उन्होंने बालों में चमेली के फूलों वाला गजरा लगाया था, लेकिन ये असली फूल नहीं थे. सौरभ गुप्ता ने तांबे, पीतल और कागज का इस्तेमाल करके करीब 600 चमेली के फूल तैयार किए थे. इन पर पेंट भी हाथों से किया गया था. इसे बनाने में करीब 150 घंटों की मेहनत लगी थी, जो भारतीय ट्रेडिशन को आधुनिक अंदाज में पेश करने का काम कर रही थी.