यूपी के 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट फिर बनाने को कहा गया है. कोर्ट ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की लिस्ट को गलत माना है. जोर देकर कहा गया है कि 19 हजार से अधिक सीटों पर आरक्षण में विसंगतियां पाई गई हैं.
हाई कोर्ट ने सरकार को 3 महीने में पूरी लिस्ट सही करने के दिए निर्देश दिए हैं. आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों की तमाम दलीलों को कोर्ट ने स्वीकार किया है और फिर लिस्ट बनाने के आदेश दिए हैं. बड़ी बात ये है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने माना है कि भर्ती के दौरान आरक्षण का घोटाला हुआ है. इसी मामले में पिछले साल 8 दिसंबर 2022 को हाई कोर्ट ने आरक्षण घोटाले पर ऑर्डर रिजर्व रखा था.
क्या है मामला?
जानकारी के लिए बता दें कि 5 जनवरी 2022 को 6,800 सीटों की लिस्ट निकली थी. उस लिस्ट के सामने आते ही टीचरों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था और मामला कोर्ट तक चला गया.
अदालत ने दिया आदेश
अब उसी कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि अभ्यर्थियों के गुणांक, कैटिगरी, सबकैटिगरी सहित ओबीसी -एससी वर्ग का पूरा 27% और 21%आरक्षण स्पष्ट तरीके से दिखाया जाए. तीन साल के धरना प्रदर्शन को बाद याचिकाकर्ताओं को ये राहत मिल रही है.
योगी सरकार को कोर्ट से झटका
वहीं दूसरी तरफ योगी सरकार के लिए ये एक बड़ा झटका माना जा रहा है. कोर्ट के आदेश पर सरकार की तरफ से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है.