7 जनवरी का दिन सुप्रीम कोर्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है. शीर्ष अदालत में पर्यावरण, नागरिक सुरक्षा, धार्मिक परंपराओं और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से जुड़े कई बड़े मामलों पर सुनवाई होनी है. इन मामलों के फैसले दूरगामी असर डाल सकते हैं.
कोर्ट अरावली की परिभाषा और संरक्षण अरावली पहाड़ियों के संरक्षण और उसकी सटीक परिभाषा को लेकर आज सुनवाई करेगा. पूर्व वन अधिकारी आरपी बलवान की याचिका पर होने वाली यह सुनवाई हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण के लिए निर्णायक हो सकती है. कोर्ट ने पहले ही केंद्र और संबंधित राज्यों को इस मामले में नोटिस जारी कर पारिस्थितिक चिंताओं पर जवाब मांगा है.
वहीं देशभर में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं और उससे होने वाले रेबीज के बढ़ते मामलों पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आवेदनों की भारी संख्या को देख टिप्पणी करते हुए कहा कि 'इतने आवेदन तो इंसानों के केस में भी नहीं आते'.
तीन जजों की विशेष बेंच आज स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा और पशु कल्याण के संतुलन पर विचार करेगी.
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सोनम वांगचुक की रिहाई को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई
वहीं जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से संबंधित एक याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. सोनम वांगचुक पिछले 100 से अधिक दिनों से जोधपुर जेल में बंद हैं. उन पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी गीतांजलि की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. वांगचुक को पिछले साल सितंबर में लेह से हिरासत में लिया गया था.
याचिका में दावा किया गया है कि 26 सितंबर को सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने की कार्रवाई न सिर्फ कानून के खिलाफ थी, बल्कि यह उनकी बुनियादी संवैधानिक स्वतंत्रताओं पर सीधा आघात है. इससे पहले 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाल दी थी, क्योंकि केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गीतांजलि अंगमो की ओर से दाखिल जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी.
बांके बिहारी मंदिर से जुड़े मामले पर सुनवाई
इसके अलावा मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा मामला भी सुप्रीम कोर्ट में अहम मोड़ पर है. अमीर श्रद्धालुओं को पैसे लेकर ‘विशेष पूजा’ की अनुमति दिए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर शीर्ष अदालत सुनवाई करेगी. दिसंबर 2025 में इस मामले पर हुई पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि मंदिर बंद होने के बाद या भगवान के विश्राम काल में चुनिंदा लोगों को गुपचुप तरीके से पूजा कराने दी जाती है.
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उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे “भगवान का शोषण” करार दिया था. इसी से जुड़े एक अन्य मामले में मंदिर में दर्शन के समय में बदलाव और देहरी पूजा बंद किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है, जिस पर यूपी सरकार को आज अदालत के सामने अपना जवाब दाखिल करना होगा.