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लैंड फॉर जॉबः लालू यादव ने नकारे CBI के आरोप, बोले- करेंगे मुकदमे का सामना

रेल मंत्री रहते नौकरी के बदले जमीन लेने के आरोप से लालू यादव ने इनकार किया है. लालू यादव ने कोर्ट में सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट के आरोप से इनकार किया और कहा कि हम मुकदमे का सामना करेंगे.

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लैंड फॉर जॉब केस में आरोपों से लालू का इनकार (File Photo: ITG)
लैंड फॉर जॉब केस में आरोपों से लालू का इनकार (File Photo: ITG)

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी लैंड फॉर जॉब स्कैम में घिरे हैं. इस केस की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पास है. सीबीआई ने इस मामले में कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी है. लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने सीबीआई की ओर से लगाए गए आरोप स्वीकार करने से इनकार किया है.

लालू यादव ने कोर्ट में कहा है कि हम मुकदमे का सामना करेंगे. दरअसल, लैंड फॉर जॉब मामले में सांसदों-विधायकों के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर गठित विशेष सीबीआई ईडी अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को पेशी के लिए एक माह का समय दिया था. इन सभी से 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया था.

कोर्ट ने इसका ऐलान 29 जनवरी को ही कर दिया था. विशेष अदालत ने 29 जनवरी को हुई सुनवाई में आदेश दिया था कि आरोपों के औपचारिक निर्धारण के लिए 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच लालू यादव, राबड़ी यादव, तेजस्वी और तेज प्रताप यादव को उपस्थित होना होगा. कोर्ट के आदेश के बाद 9 फरवरी को तेजस्वी यादव राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए थे.

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तेजस्वी यादव ने इस दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि वह केस लड़ेंगे और कोर्ट में आरोपों का सामना करेंगे. लैंड फॉर जॉब घोटाला तब का है, जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे. आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी पदों पर जमीन के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों को रेलवे में नौकरी दी गई.

नौकरी के बदले कीमती जमीनें लेने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, कई लोगों को रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले पटना और आसपास के इलाकों में खासकर हाईवे के आसपास की जमीनें औने-पौने दाम पर या दान के रूप में लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम कराई गईं. यह जमीनें बाद में काफी मूल्यवान साबित हुईं.

चार्जशीट पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ईडी स्पेशल कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में आरोपियों और पूरे घटनाक्रम पर कठोर टिप्पणियां की थीं. तब उन्होंने कहा था कि ऐसा लगता है कि सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल करने के लिए गहरी और व्यापक साजिश की गई थी.

न्यायाधीश ने की थीं सख्त टिप्पणियां

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों और दस्तावेजों से साफ लगता है कि इतने गंभीर आरोपों की सुनवाई ट्रायल में ही होनी चाहिए, क्योंकि मामला केवल अनियमित नियुक्तियों का ही नहीं बल्कि कथित रूप से एक संगठित आपराधिक साजिश से भी जुड़ा हुआ है.

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हालांकि अदालत ने ये भी कहा कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है. बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा. जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कई मामलों में गिफ्ट डीड के जरिए जमीन हस्तांतरित की गई. चार्जशीट में कुल 103 आरोपियों का जिक्र है. उनमें से पांच की मृत्यु हो चुकी है.

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अदालत ने अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मामलों में CBI को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए हैं. अब आरोप तय होने के बाद नियमित ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें साक्ष्य और गवाहों के आधार पर कोर्ट यह तय करेगा कि आरोपी दोषी हैं या नहीं.

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