पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को 'लैंड फॉर जॉब स्कैम' मामले में लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया है. रेल मंत्रालय में चतुर्थ श्रेणी में नौकरियों के बदले भूमि लेने के घोटाले में राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया.
कोर्ट ने संदेह की कसौटी पर पाया कि लालू और परिवार की ओर से व्यापक साजिश रची गई थी. चार्जशीट में लालू यादव के करीबी सहयोगियों को नौकरियों के बदले जमीन अधिग्रहण में सह-साजिशकर्ता के रूप में मदद मिली.
कोर्ट ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार की बरी करने की मांग की दलील सही नहीं है. इसके साथ ही, इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य सरकारी पद से अलग होकर आपराधिक उद्यम के रूप में काम कर रहे थे.
52 आरोपी हुए बरी...
अदालत ने कहा कि इस मामले में सरकारी संवैधानिक अधिकारों और विवेक का दुरुपयोग हुआ है. कोर्ट ने 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए. भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(1)(डी) के साथ 13(2) के तहत भी चलेगा मुकदमा. इस मामले में कोर्ट ने 52 आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया. चार्जशीट के मुताबिक इनके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले.
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'जांच एजेंसियों का दुरुपयोग...'
लालू परिवार के ऊपर आरोप तय होने के बाद आरजेडी की पहली प्रतिक्रिया आई है. आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, "जो लोग लालू परिवार से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं, वो लालू परिवार के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने आरोप तय किए हैं. इस पूरी लड़ाई का कानूनी प्रक्रिया के तहत जवाब दिया जाएगा. जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है.