scorecardresearch
 

JEE परीक्षा दे रहे दिव्यांग छात्रों के लिए SC का महत्वपूर्ण निर्देश

सुनवाई के दौरान जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने केंद्र से कहा कि JEE के लिए ब्रोशर में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशिष्ट सुविधा होनी चाहिए और पर्यवेक्षकों के लिए उचित प्रशिक्षण की भी आवश्यकता है.

सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिव्यांग छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
  • JEE परीक्षा के दौरान सुविधा देने पर जोर

JEE परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने JEE के लिए उपस्थित होने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए विशिष्ट सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि परीक्षा के पर्यवेक्षकों को दिव्यांग छात्रों से निपटने के लिए उचित रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए. एक दिव्यांग छात्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणियां की हैं जिसने पुन: परीक्षा/अनुग्रह अंक देने की मांग की है. दरअसल छात्रा को डिस्ग्राफिया (एक सीखने की अक्षमता जो लिखने की क्षमता में कमी की ओर ले जाती है) है.

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
 
छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे नीट की परीक्षा पूरी करने के लिए एक घंटे का अतिरिक्त समय नहीं दिया गया, पेपर छीन लिया गया. सुनवाई के दौरान जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने केंद्र से कहा कि JEE  के लिए ब्रोशर में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए विशिष्ट सुविधा होनी चाहिए और पर्यवेक्षकों के लिए उचित प्रशिक्षण की भी आवश्यकता है.

आपको नीति के मामले के रूप में फैसला करना होगा. आपको सोचना चाहिए कि इसे सही करने के लिए क्या करना चाहिए. आज चिकित्सा क्षेत्र इतना प्रतिस्पर्धी है.

पीठ ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से इस पर विचार करने और जवाब देने के लिए कहा कि क्या दिव्यांग कोटे के तहत खाली सीटों के बीच छात्रा को समायोजित किया जा सकता है. यह मामला जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ के समक्ष आया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के वकील रूपेश कुमार ने कहा कि इस समय हमारे लिए यह मुश्किल होगा क्योंकि वहां 16 लाख छात्र थे.

दिव्यांग छात्रों के लिए महत्वपूर्ण

इस स्तर पर वह कुछ अन्य छात्रों का स्थान ले सकती है और यह दूसरों के लिए कठोर होगा. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के लिए 16 लाख छात्र हैं लेकिन मेरे लिए यह केवल एक परीक्षा है. कलम के एक झटके से मेरा करियर बदल सकता है.

इस पर पीठ ने कहा कि ईश्वर आपके मुवक्किल को आशीर्वाद दें और आपको प्रवेश मिल जाए लेकिन हमें उम्मीद है कि भविष्य में ये गलतियां दोहराई नहीं जाएंगी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को शुक्रवार तक लिखित जवाब मांगा है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करेगा.

गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

 

कोविड से हुई मौत पर 50,000 रुपये मुआवजे के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने “अंसवेदनशीलता” की बात कहकर गुजरात सरकार को फटकार लगाई है. मुआवजे के दावों को प्रमाणित करने के लिए गुजरात में जांच समिति बनाने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार ने कोविड पीड़ितों के परिजनों को मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर किया.

SC ने गुजरात के मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को तलब करने की चेतावनी दी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह उन लोगों के साथ नहीं किया जा सकता है जो पहले से ही इतने पीड़ित हैं. सरकार को विरोध करने के बजाय मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए. लेकिन आपके अधिकारी इसे विपरीत तरीके से लेते हैं. ये सच्चाई है कि लोग अभी भी पीड़ित हैं. जांच समिति बनाने का कोई सवाल ही नहीं था. अब हम देखते हैं कि लंबी कतारें हैं और मुआवजे के फॉर्म इतने जटिल हैं.  ये गरीब लोग हैं. हमारे पास अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं. आप थोड़े संवेदनशील क्यों नहीं हो सकते. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार का स्क्रूटनी कमेटी बनाने का फैसला "सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को खत्म करने का प्रयास" है. हमने पहले ही कहा था कि लोगों की शिकायतों के निवारण के लिए समिति बनाने की जरूरत है ना कि जांच के लिए. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से कोविड मुआवजा देने के लिए उठाए गए कदमों पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा. जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बी वी नागरत्ना की बेंच ने मामले की सुनवाई की. 


 
ये भी पढ़ें

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें