बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपनी विवादित टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि के मामले को रद्द करने की मांग की है.
न्यायमूर्ति एन.आर. बोरकर की पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रखा. यह मामला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल द्वारा साल 2019 में गिरगांव स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर एक आपराधिक मानहानि की शिकायत से जुड़ा है.
शिकायत में आरोप है कि सितंबर 2018 में राजस्थान की एक रैली में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 'कमांडर-इन-थीफ' कहा और 24 सितंबर 2018 को इसी आशय का ट्वीट भी किया. शिकायतकर्ता का दावा है कि इस टिप्पणी से प्रधानमंत्री और भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा.
मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए गांधी को समन जारी किया था. इसके बाद जुलाई 2021 में समन मिलने पर राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का रुख किया. याचिका में उन्होंने कहा कि शिकायत राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित और निराधार है.
गांधी के वकीलों ने दलील दी कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199(2) के तहत यदि किसी लोकसेवक के आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े आचरण पर आरोप हो तो सत्र अदालत को ही संज्ञान लेना चाहिए. साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 499 की व्याख्या का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी राजनीतिक दल को मानहानि वाद दायर करने योग्य व्यक्तियों के समूह के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है.
वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से दलील दी गई कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है और मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समन जारी किया. अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है.