मेरठ में हुई 2007 में पार्षद और उनके साथी की हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. एडीजीसी क्राइम प्रेरणा वर्मा ने बताया कि मंगलवार को कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ वीडियो कॉल के जरिए सजा सुनाई है. इस मामले में 9 आरोपी बनाए गए थे जिसमें एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी. एक को बारी कर दिया गया था और 7 आरोपियों को सजा सुनाई गई. जिला जज कोर्ट-दो प्रहलाद सिंह की अदालत ने सातों आरोपियों को सजा सुनाते हुए एक लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया.
बता दें, थाना कोतवाली क्षेत्र में 2017 में नगर निगम पार्षद आरिफ और उसके दोस्त शादाब की हत्या कर दी गई थी. आरिफ और शादाब की हत्या इसलिए की गई थी क्योंकि वो 26 दिसंबर 2016 में हुई सोनाली उर्फ जमशेद किन्नर की हत्या में गवाह थे. साल 2017 में नई की दुकान पर शेविंग करने पहुंचे पार्षद आरिफ और शादाब की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.
हत्या के मामले में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था
बहुचर्चित इस डबल मर्डर मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता सर्वेश शर्मा ने बताया कि, एडीजीसी प्रेरणा वर्मा ने कुल 12 गवाह पेश किए थे. कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया और मंगलवार को फैसला सुना दिया. घटना में शामिल रहे आरोपी साकिब, शारिक, काशिफ उर्फ चीता, तारिक, राशिद, राजू और ताबिश को आरोपी माना.
हत्या के आरोप में 7 को उम्रकैद
जानकारी के मुताबिक इस मामले में कुल 9 आरोपी बनाए गए थे जिसमें एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हुई थी और एक को अदालत ने बारी कर दिया था. 7 आरोपियों को आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. फैसला सुनाने के दौरान कानून व्यवस्था नहीं बिगड़े इसको लेकर पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में रहा. कोर्ट की कार्रवाई के दौरान पुलिस और पीएसी के अलावा क्यूआरटी तैनात रही. कोर्ट के आदेश के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया गया था.
2007 में पार्षद और उसके साथी की हत्या हुई थी
दोनों पक्षों को सुनने के बाद घटना के आरोपी तारीख, रशीद राजू , ताबिश, साकिब, शरीक, काशिफ और चीता को दोषी माना गया. वहीं नदीम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. एक आरोपी की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है. बताया जा रहा है कि आरिफ की हत्या जेल में बंद शरीक और फाइक ने कराई थी.