कर्नाटक कांग्रेस में जारी नेतृत्व संकट के और गहराने के संकेत मिल रहे हैं. उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के भाई और बेंगलुरु ग्रामीण सीट से कांग्रेस सांसद डी.के. सुरेश के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है. सुरेश ने कहा है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपना वादा जरूर निभाएंगे, भले ही इसमें समय लगे. उनके इस बयान को पावर-शेयरिंग फॉर्मूले (ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद) की ओर इशारा माना जा रहा है.
इस बीच, संकट ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने दिल्ली में दोहराया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके बीच राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी में पावर-शेयरिंग फॉर्मूले पर बातचीत हुई थी. उन्होंने कहा कि इस बारे में वह सही समय आने पर ही बोलेंगे. बेंगलुरु में बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए डी.के. सुरेश ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भले ही इसमें देरी हो, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने शब्दों पर कायम रहेंगेत. उनके इस बयान के बाद नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें और तेज हो गईं.
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कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और डी.के. सुरेश के बयान पर पूछे गए सवालों पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि मीडिया को बार-बार एक ही सवाल नहीं पूछना चाहिए. सिद्धारमैया ने साफ किया, 'जो भी हाईकमान का फैसला होगा, उसे मुझे और शिवकुमार दोनों को मानना होगा. यह मामला पूरी तरह हाईकमान के हाथ में है. आप लोग बाकी मुद्दों को छोड़कर बार-बार नेतृत्व परिवर्तन पर सवाल पूछते हैं. जो बयान दे रहे हैं, उनसे पूछिए, मुझसे क्यों पूछते हैं?' साथ ही उन्होंने दोहराया कि वह हाईकमान के हर फैसले का पालन करेंगे.
विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर सिद्धारमैया ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि अपने निजी खर्च पर विदेश यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न विभागों के साथ बैठकों का दौर जारी है और बजट की तारीख जल्द घोषित की जाएगी. वहीं, दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए डी.के. शिवकुमार ने नेतृत्व विवाद पर कहा, 'मुख्यमंत्री और मैं जानते हैं कि हमारे बीच क्या बातचीत हुई है. समय आने पर सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा.' इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए भी चर्चा बटोरी है, क्योंकि शिवकुमार समर्थक विधायक खुलकर हाईकमान से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर जारी असमंजस खत्म हो सके.