सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज होने वाली ‘मैकेनिकल FIR’ और मनमाने तरीके से की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए कर्नाटक पुलिस ने नई गाइडलाइन जारी की है. 7 फरवरी को जारी इस सर्कुलर में सोशल मीडिया से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने से पहले सख्त जांच और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा तय दिशानिर्देशों को बरकरार रखा गया था.
कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में शिकायतकर्ता की ‘लोकस स्टैंडी’ यानी शिकायत करने के अधिकार की पहले जांच की जाए, खासकर मानहानि से जुड़े मामलों में. गाइडलाइन के अनुसार, संज्ञेय अपराधों में भी FIR दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य होगी.
नई गाइडलाइन में कहा गया है कि ऑनलाइन अभिव्यक्ति से जुड़े मामलों में FIR तभी दर्ज की जाए जब प्रथम दृष्टया हिंसा भड़काने, नफरत फैलाने या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे का स्पष्ट प्रमाण हो. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि राजनीतिक बयानबाजी और आलोचनात्मक टिप्पणियों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है. पुलिस को चेतावनी दी गई है कि केवल तीखी या आलोचनात्मक राय के आधार पर मामला दर्ज न किया जाए, जब तक कि उससे कानून-व्यवस्था को तात्कालिक खतरा न हो.
सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि मानहानि से जुड़े मामले गैर-संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती. इसके अलावा, संवेदनशील मामलों में पुलिस अधिकारियों को पहले कानूनी सलाह लेने के निर्देश दिए गए हैं.
कर्नाटक पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि बेबुनियाद या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को प्रारंभिक जांच के दौरान ही बंद किया जाए. इस कदम को सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के संतुलन को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.