दुबई के अमीरों या शेखों की लग्जरी लाइफ अक्सर चर्चा में रहती है. सोशल मीडिया पर भी इनसे जुड़े वीडियो शेयर होते रहते हैं. क्या आप जानते हैं इनके घरों में एक मजलिस भी होती हैं, जो पुरुष और महिलाओं की अलग-अलग होती है. सिर्फ अमीरों के घर में ही नहीं, कई आम लोगों के घरों में वहां ऐसा ही होता है. अब सवाल है कि आखिर ये मजलिस है क्या और इनमें क्या किया जाता है और पुरुष-महिलाओं के लिए ये अलग-अलग क्यों बनाई जाती है.
होती क्या है मजलिस?
दरअसल, मजलिस घर का एक हिस्सा होता है, जहां घर में आने वाले मेहमान लोग बैठते हैं. अरब में मजलिस सिर्फ एक कमरा नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, प्रतिष्ठा और मेहमाननवाजी का सबसे बड़ा प्रतीक है. शेखों और आम नागरिकों के घरों में इसका बहुत खास महत्व होता है. अरबी भाषा में 'मजलिस' का शाब्दिक अर्थ होता है 'बैठने की जगह'.
ये एक कमरा या खास हिस्सा होता है, जहां जहाँ मेहमानों, दोस्तों और रिश्तेदारों का स्वागत किया जाता है. शेखों के घरों में मजलिस का उपयोग बिजनेस डील, कबीलों के आपसी मामलों को सुलझाने, कुछ चर्चा के लिए होता है.
घर में मजलिस ही ऐसा कमरा होता है, जिसे सबसे ज्यादा सुंदर बनाया जाता है. इसके इंटीरियर पर खास ध्यान दिया जाता है और बेहतर तरीके से डिजाइन किया जाता है. ये हमेशा घर या विला के मुख्य एंट्री गेट के बिल्कुल पास बनाया जाता है. कई बड़े विला में मजलिस का एंट्री गेट पूरी तरह अलग होता है, ताकि मेहमान सीधे मजलिस में आ सकें.
इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है ताकि बाहर से आने वाले मेहमानों की नजर घर के अंदरूनी हिस्सों (किचन, बेडरूम) पर न पड़े और घर की महिलाओं की प्राइवेसी बनी रहे. इनमें सोफे या गद्दे दीवार के सहारे यू-आकार में लगाए जाते हैं, ताकि हर बैठा हुआ व्यक्ति एक-दूसरे का चेहरा देख सके और बातचीत में बराबरी का अहसास हो.
महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग होती है
अरब में महिला और पुरुष दोनों साथ नहीं बैठते हैं. इस वजह से बड़े घरों में दो अलग मजलिस होती हैं. पुरुष मजलिस में घर के पुरुष अपने पुरुष मित्रों, बिजनेस पार्टनर्स और मेहमानों की मेजबानी करते हैं जबकि महिला मजलिस में महिलाएं अपनी सहेलियों और महिला रिश्तेदारों के साथ बैठती हैं. अलग मजलिस होने से महिलाएं बिना किसी औपचारिकता के दूसरी महिलाओं के साथ खुलकर हंस-बोल सकती हैं और त्योहार मना सकती हैं.