अमेरिका से जर्मनी ने अपनी सेना को वापस बुला लिया है और अब करीब 5000 सैनिक अमेरिका लौट जाएंगे. अब सवाल है कि आखिर अमेरिका के सैनिक जर्मनी में क्या कर रहे थे और अब अमेरिका ने इन्हें वापस क्यों बुला लिया है. लेकिन, क्या आप जानते हैं जर्मनी ही नहीं, दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में अमेरिका के जवान तैनात हैं. तो आज समझते हैं कि आखिर अमेरिका दूसरे देशों में अपने सैनिक क्यों रखता है और दूसरे देश भी इन्हें अपने देश में जगह क्यों देते हैं...
जर्मनी में क्या कर रहे थे अमेरिकी सैनिक?
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, अभी करीब 35,000 से 39,000 अमेरिकी सैनिक और लगभग 13,000 वायु सेना कर्मी जर्मनी में तैनात हैं. ये सभी मुख्य रूप से देश के दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में स्थित 20 प्रमुख सैन्य ठिकानों पर फैले हुए हैं. छोटे सैन्य प्रतिष्ठानों को मिलाकर, जर्मनी में कुल मिलाकर लगभग 40 अमेरिकी सैन्य सुविधाएं हैं. जर्मनी जैसे देशों में अमेरिकी सैनिक इसलिए तैनात रहे क्योंकि वे नाटो की सामूहिक सुरक्षा, यूरोप में तेज सैन्य प्रतिक्रिया और मिडिल ईस्ट तक तक लॉजिस्टिक हब की भूमिका निभाते हैं.
राइनलैंड-पैलाटिनेट राज्य में स्थित रामस्टीन वायु सेना अड्डा अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा है. यह मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप जाने वाले सैनिकों, उपकरणों और माल के लिए एक रसद केंद्र के रूप में कार्य करता है.
अब अमेरिका ने क्यों वापस बुला लिया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के ईरान युद्ध पर दिए गए नवीनतम बयान पसंद नहीं आए. इसके बाद उन्होंने जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी कम करने की धमकी दी है. हाल ही में उन्होंने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने अगले छह से बारह महीनों में लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश दे दिया था. लेकिन, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने जर्मनी में तैनात सैनिकों की संख्या कम करने की धमकी दी है.
कितने देशों में तैनात है अमेरिकी फौजी?
यूएस डिफेंस मैनपावर डेटा सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 तक अमेरिका के यूरोप में करीब 68,000 सक्रिय सैन्यकर्मी स्थायी रूप से तैनात थे. इनमें तैनाती और अभ्यास अभियानों पर भेजे गए अस्थायी बल शामिल नहीं हैं. मार्च 2024 तक अमेरिकी सेना 31 स्थायी ठिकानों और 19 अन्य सैन्य स्थलों पर फैली हुई है, जिन तक रक्षा विभाग की पहुंच है. अमेरिकी सेना एक दर्जन से अधिक यूरोपीय देशों में तैनात है. जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में सबसे अधिक सैनिक मौजूद हैं. इस सूची में कुछ सबसे बड़ी सैन्य टुकड़ियों के नाम शामिल हैं.
सिर्फ यूरोप में ही नहीं, इसके बाहर भी कई देशों में अमेरिका के मिलिट्री अड्डे हैं. कई रिपोर्ट्स में ये कहा गया है कि दिसंबर 2025 के आखिरी अमेरिका के बाहर तैनात अमेरिकी सैन्य कर्मियों और रक्षा विभाग के नागरिकों की संख्या 221,599 थी. इनमें 169,589 सक्रिय सैनिक, 23,169 रिजर्व सैनिक या नेशनल गार्ड कर्मी और 28,841 नागरिक रक्षा विभाग के कर्मचारी शामिल थे.
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में अमेरिका के पास बगराम से कंधार तक कम से कम 10 सैन्य ठिकानों पर लगभग 100,000 सैनिक तैनात थे. पेंटागन के अनुसार, कुल मिलाकर 800,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों ने युद्ध में सेवा दी. जुलाई 2021 तक अमेरिका के कम से कम 80 देशों में लगभग 750 सैन्य अड्डे थे. वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है क्योंकि पेंटागन द्वारा सभी आंकड़े प्रकाशित नहीं किए जाते हैं.
करते क्या हैं अमेरिकी जवान?
अमेरिका की सेना अलग-अलग देशों में तैनात है और हर देश में अलग अलग वजहों से उन्हें तैनात किया जाता है. कई देशों में ज्यादा तनाव होने की स्थिति में फोर्स तैनात की गई है जबकि कुछ जगह नाटो की वजह से सैनिक ग्राउंड पर उतारे गए हैं. इसके अलावा जिन देशों तनाव रहता है, उसके आस-पास भी अमेरिका अपनी सेना तैनात करता है. जैसे जर्मनी में अमेरिका के सबसे बड़े ठिकानों में से एक रामस्टीन बेस है, यहां नाटो की सामूहिक सुरक्षा के लिए फोर्स तैनात है.
वहीं, जापान में चीन की वजह से आर्मी को तैनात किया गया है. ओकिनावा में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक हैं, जो चीन की बढ़ती ताकत को बैलेंस करने की कोशिश किया जाता है. नॉर्थ कोरिया के के मिसाइल और न्यूक्लियर खतरे को रोकने के लिए भी आर्मी तैनात है. साउथ कोरिया में भी नॉर्थ कोरिया की वजह से आर्मी तैनात की गई है.
इस मिलिट्री बेस से उन देशों को भी फायदा होता है, जहां वो तैनात है. अगर जर्मनी की ही बात करें तो ये मिलिट्री बेस आर्थिक कारक साबित हो रहे हैं. इनमें से कई अड्डे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां अमेरिकी सेना सबसे बड़ी निवेशक और नियोक्ता के रूप में कार्य करती है. 10,000 से अधिक जर्मन नागरिक सीधे तौर पर अमेरिकी सेना के लिए काम करते हैं, जबकि अनुमानित 70,000 जर्मन नौकरियां अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी सेना के लिए काम करने वाली कंपनियों से जुड़ी हुई हैं.
इसके अलावा जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिक और उनके परिवार अपनी तनख्वाह का एक बड़ा हिस्सा जर्मन दुकानों और व्यवसायों में खर्च करते हैं. अकेले सैन्य समुदाय ही क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में सालाना €3.5 बिलियन (4.1 बिलियन डॉलर) तक का योगदान देता है.